गाजियाबाद: गांधी जी ने जिंदगी में सच, अहिंसा और स्वदेशी को अपनाने की सीख दी थी, लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम इन बातों को कितना निभा पाते हैं? क्या काम जल्दी कराने के लिए रिश्वत देने से इनकार कर पाते हैं, क्या छोटी-छोटी बातों में भी झूठ से बचते हैं और क्या सोशल मीडिया पर गुस्सा आने के बाद भी शब्दों की मर्यादा रखते हैं? गांधी जयंती पर जब लोगों से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े ऐसे ही सवाल पूछे गए तो जवाब काफी दिलचस्प मिले. कुछ जवाब गांधी के विचारों के करीब दिखे तो कुछ ने आज की हकीकत और सोच के बीच का फर्क भी सामने रख दिया.
कारोबारी चौधरी सतबीर सिंह तेवतिया ने बेबाकी से कहा कि आज के दौर में व्यापार के लिए झूठ बोलना पड़ता है. जमीन की नपाई से जुड़े काम में रिश्वत देने की बात भी उन्होंने स्वीकार की. सोशल मीडिया पर जवाब देने की बात कही, लेकिन अपशब्दों से बचने और तहजीब से बात करने का दावा किया. भारतीय सामान को देश की तरक्की से जोड़ा. हिंसक प्रदर्शन को सामान्य तौर पर गलत बताया.
बंटवारे व अहिंसा को लेकर अलग राय
एक हालिया छात्र प्रदर्शन को सही ठहराते हुए कहा कि मेहनत करने वाले छात्रों को उनका हक मिलना चाहिए. सफाई को लेकर खुद को जिम्मेदार बताया, जबकि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर कार्रवाई के डर का हवाला देकर कई बार चुप रहना बेहतर बताया. खुद को अहिंसावादी कहने के बावजूद गांधी जी को अपना आदर्श मानने से इनकार किया और बंटवारे व अहिंसा को लेकर अपनी अलग राय रखी.
भाषा में शालीनता रखने की बात
व्यापारी धनराज चारण के जवाब गांधी की सीख के काफी करीब नजर आए. उन्होंने कभी-कभार छोटे झूठ की बात मानी लेकिन किसी को नुकसान पहुंचाने वाले झूठ से इनकार किया. रिश्वत को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि सही तरीके से काम करने पर इसकी नौबत नहीं आनी चाहिए. सोशल मीडिया पर गाली-गलौज से दूरी और भाषा में शालीनता रखने की बात कही.
भारतीय सामान को घरेलू उद्योग, रोजगार और देश की तरक्की से जोड़ा. हिंसक प्रदर्शन को गलत बताते हुए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की बात कही. बिना जांचे नफरत भरे संदेश शेयर नहीं करने, सार्वजनिक जगह पर कागज तक डस्टबिन में डालने और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की बात भी कही. गांधी की सबसे बड़ी सीख उनके लिए अहिंसा है.
जिंदगी में अहिंसा अपनाने की बात
कॉलेज छात्र रोहित ने छोटे-मोटे झूठ की बात मानी, लेकिन किसी को नुकसान पहुंचाने वाला झूठ नहीं बोलने की बात कही. रिश्वत देने से इनकार किया और कहा कि ऐसी जरूरत कभी पड़ी ही नहीं. सोशल मीडिया पर अपशब्दों से बचने और सामने वाले के गलत बोलने पर भी शांत रहने की सलाह दी. भारतीय सामान को देश की तरक्की से जोड़ा. हिंसक प्रदर्शन को ‘बेकार की चीज’ बताया. कचरा मिलने पर उसे डस्टबिन में डालने, भ्रष्टाचार रोकने के लिए सामने वाले को समझाने और निजी जिंदगी में अहिंसा अपनाने की बात कही. गांधी की सीख पूछने पर उनका सीधा जवाब था अहिंसावादी.
रिश्वत देने पर बोला छात्र
कॉलेज छात्रा गुणगुण यादव ने कॉलेज न जाने या दोस्तों के साथ घूमने जैसी छोटी बातों पर झूठ बोलने की बात स्वीकार की. दस्तावेजी काम के लिए रिश्वत देने पर उनका जवाब था वो देनी पड़ती है इंडिया है न. सोशल मीडिया पर गाली-गलौज से इनकार किया और भारतीय सामान को अर्थव्यवस्था मजबूत करने से जोड़ा. हिंसक प्रदर्शन को सही नहीं माना और नफरत वाले मैसेज को नजरअंदाज करने की बात कही. Gen Z को सफाई के प्रति जागरूक बताते हुए पुरानी पीढ़ी में सिविक सेंस बढ़ाने की जरूरत बताई. भ्रष्टाचार पर आवाज उठाने के बजाय दूरी बनाना बेहतर माना.
Gen Z प्रदर्शन में हुई हिंसा को बताया जरूरी
कॉलेज छात्रा नमरा ने घर की छोटी-छोटी बातों पर कभी-कभी झूठ बोलने की बात कही, लेकिन रिश्वत से साफ इनकार किया. सोशल मीडिया इस्तेमाल नहीं करने के कारण गाली-गलौज से भी दूरी है. भारतीय सामान को देश के विकास से जोड़ा हिंसक प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि मुद्दा समझने के बाद ही राय बनानी चाहिए. हालांकि Gen Z प्रदर्शन में हुई हिंसा को जरूरी बताया. सार्वजनिक जगहों पर गंदगी न फैलाने और गंदगी मिलने पर उसे साफ करने की कोशिश करने की बात कही. भ्रष्टाचार देखकर चुपचाप निकल जाना बेहतर माना. अहिंसा पर उनका जवाब परिस्थितियों पर निर्भर रहा, जबकि गांधी की सीख के तौर पर उन्होंने कहा- ‘हमेशा सच बोलना चाहिए’.
मौजूदा परिस्थिति में दूसरा गाल आगे लाने की बात गलत
वहीं व्यापारी गणेश अग्रवाल ने सच बोलने की कोशिश करने और किसी का नुकसान कर अपना फायदा न उठाने की बात कही. रिश्वत की जरूरत अब तक न पड़ने और सोशल मीडिया पर अपशब्दों से दूर रहने की बात कही. भारतीय सामान को देश की उन्नति से जोड़ा. हिंसक प्रदर्शन को गलत बताते हुए कहा कि इससे निर्दोष लोगों और देश दोनों का नुकसान होता है. सार्वजनिक सफाई को नागरिक का फर्ज बताया. भ्रष्टाचार का जहां संभव हो विरोध करने, लेकिन कुछ जगह मजबूरी में पीछे हटने की बात कही. खुद को अहिंसावादी बताते हुए गांधी की सीख याद रखने की बात कही. हालांकि मौजूदा दौर में हर परिस्थिति में दूसरा गाल आगे करने की सोच को व्यावहारिक नहीं माना.
