नोएडा: कानपुर के एक गांव से निकलकर समाज सेवा की राह पर आगे बढ़ने वाली रानी की कहानी संघर्ष, जिम्मेदारी और दूसरों की मदद करने के संकल्प की कहानी है. छोटी उम्र में माता-पिता का साया सिर से उठ गया, तो परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. माता-पिता के निधन के बाद परिवार, समाज और दोस्तों में से उन्हें किसी का साथ नहीं मिला. मुश्किल परिस्थितियों के बीच उन्होंने हार मानने के बजाय अपने छोटे भाई-बहनों का भविष्य संवारने का फैसला किया. इसी संघर्ष ने उनके भीतर उन महिलाओं, लड़कियों और असहाय लोगों की मदद करने की भावना पैदा की, जिनके पास मुश्किल समय में साथ देने वाला कोई नहीं होता.
12वी की पढ़ाई के बाद नहीं कर पाई पढ़ाई
लोकल 18 से खास बातचीत में रानी ने बताया कि जब हाई स्कूल में पढ़ रही थीं, तभी उनके पिता का निधन हो गया था. परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि उनकी पढ़ाई का खर्च आसानी से उठाया जा सके. फीस भरने के लिए उन्हें दूसरों के खेतों में मजदूरी करनी पड़ी. इस तरह उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और 12वीं तक शिक्षा पूरी की. इसके बाद उन्होंने बीए के प्रथम वर्ष में दाखिला लिया, लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि अपनी आगे की पढ़ाई पर खर्च करने के बजाय उसी पैसे से छोटे भाई-बहनों की शिक्षा और जरूरतें पूरी की जा सकती हैं. परिवार के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़ने का फैसला किया. इसके बाद उन्होंने एक छोटे स्कूल में पढ़ाना और बच्चों को ट्यूशन देना शुरू किया. करीब पांच साल तक पढ़ाकर उन्होंने भाई-बहनों की जरूरतों में सहयोग किया और उनके लिए स्कूल में मुफ्त दाखिले की व्यवस्था कराने की कोशिश की.
अपनी कमाई से लोगों की मदद करना शुरू किया
परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के साथ रानी के मन में जरूरतमंद लोगों की मदद करने की इच्छा भी मजबूत होती गई. उन्होंने नौकरी शुरू की और अपनी कमाई में से कुछ पैसे बचाकर गरीबों की मदद करनी शुरू की. वह बताती हैं कि अपनी जरूरतों में कटौती करके किसी ऐसे व्यक्ति की सहायता करना, जिसके पास खाने या पहनने तक के पर्याप्त साधन नहीं हैं, उन्हें खुशी देता था. धीरे-धीरे उन्होंने घरेलू हिंसा और पारिवारिक विवादों से जूझ रही महिलाओं का साथ देना शुरू किया. ऐसे मामलों में वह दोनों पक्षों की बात सुनने और स्थिति समझने की कोशिश करती हैं. जरूरत पड़ने पर महिलाओं को की समस्याओं को सुलझाने के लिए काउंसलिंग करती हैं. उनका मानना है कि मुश्किल परिस्थितियों में किसी के साथ खड़ा होना और उसे अकेला महसूस नहीं होने देना भी मदद का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
फिर इस संस्था से जुड़कर बढ़ाए ये कदम
रानी करीब एक साल पहले महिला उन्नति संस्था से जुड़ीं. सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें संस्था के कामों के बारे में जानकारी मिली, जो संस्था महिलाओं की सुरक्षा, घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों और रोजगार जैसे विषयों पर काम करती है. यही वो संस्था है जो पहली महिला जेसीबी पायलट दिया. संस्था के साथ जुड़ने के बाद उन्होंने अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद महिलाओं, गरीब बच्चों और अनाथ आश्रमों में सहायता करना शुरू करदी. वह कहती हैं कि मदर्स डे जैसे अवसरों पर किसी जरूरतमंद मां के लिए कुछ कर पाना उन्हें खास खुशी देता है, क्योंकि वह अपनी मां के लिए वह सब नहीं कर सकीं जो करना चाहती थीं. महिला उन्नति संस्था कई सालों से महिलाओं की सुरक्षा और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही है.
एडमिन के तौर पर करती है ऑफिस में काम
फिलहाल रानी रियल एस्टेट क्षेत्र की कंपनियों में एडमिन के तौर पर काम कर रही हैं. उन्होंने बताया कि कोरोना काल के बाद वह कई कंपनियों में काम कर चुकी हैं, लेकिन नौकरी के साथ समाज सेवा जारी रखने का उनका प्रयास बना हुआ है. उनका सपना है कि वह आर्थिक और सामाजिक रूप से इतनी सक्षम बनें कि असहाय महिलाओं, माता-पिता का सहारा खो चुके बच्चों और जरूरतमंद परिवारों की अधिक मदद कर सकें.
