JNU Professor case: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद अंगामचा विमोल के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर आंतरिक समिति की कार्रवाई के बाद कैंपस में यह मामला चर्चा में है. समिति ने प्रोफेसर को बर्खास्त करने का फैसला लिया है और मामले में पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज की है. इस मामले में शिकायत करने वाली छात्राओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें शिकायत वापस लेने के लिए दबाव का सामना करना पड़ा. वहीं कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में ऐसे मामलों को दबाने और आरोपी प्रोफेसर का बचाव करने की कोशिश की गई. छात्राओं और छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालयों में महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल नारे लगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस कार्रवाई भी जरूरी है.
11 छात्राओं ने की थी शिकायत, दबाव बनाने का भी आरोप
छात्राओं के मुताबिक प्रोफेसर के खिलाफ एक बार नहीं बल्कि पहले भी दो-तीन बार शिकायतें की जा चुकी थीं. शिकायत करने वाली 11 छात्राओं को कथित तौर पर अपने नाम वापस लेने के लिए दबाव का सामना करना पड़ा. छात्रों का आरोप है कि ऐसी सोच के कारण कई मामलों को गंभीरता से नहीं लिया जाता कि कुछ साल बाद छात्राएं पढ़ाई पूरी करके विश्वविद्यालय से चली जाएंगी और मामला अपने आप खत्म हो जाएगा. छात्राओं का कहना है कि वे विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने आती हैं लेकिन अगर उन्हें यौन उत्पीड़न जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़े तो यह बेहद चिंताजनक है. उनका मानना है कि महिला सुरक्षा को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए, ताकि किसी भी छात्रा को डर या दबाव में न रहना पड़े.
मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप
शिकायतों के संबंध में छात्रों ने प्रोफेसर पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उनके मुताबिक प्रोफेसर कथित तौर पर मौखिक परीक्षा (वाइवा) के दौरान छात्राओं को छूते थे. आरोप यह भी है कि छात्राओं को उनके घर बुलाया जाता था जहां कथित तौर पर अश्लील श्रेणी की फिल्में दिखाई जाती थीं. छात्रों के अनुसार इन स्क्रीनिंग के दौरान प्रोफेसर छात्राओं से उनके प्रति भावनाओं के बारे में भी पूछते थे. छात्रों ने दावा किया कि इस तरह की घटनाओं के कारण छात्राओं को मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा.
लेफ्ट विचारधारा वाले शिक्षकों पर भी लगे बचाव के आरोप
जेएनयू के कुछ छात्रों ने शिक्षक संगठनों से जुड़े लोगों पर भी सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि शिक्षक संघ में लेफ्ट विचारधारा से जुड़े कुछ शिक्षकों ने प्रोफेसर का बचाव करने की कोशिश की. छात्रों के मुताबिक जेएनयू शिक्षक संघ (JNUTA) की ओर से भी प्रोफेसर के समर्थन में पर्चा निकाले जाने की बात सामने आई. छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में यौन उत्पीड़न जैसे मामलों को दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए. उनका आरोप है कि कई बार छात्राओं के विश्वविद्यालय से पासआउट होकर चले जाने के बाद मामले को खत्म मान लिया जाता है. ऐसे में आंतरिक समिति की कार्रवाई को वे महिला सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रहे हैं.
प्रोफेसर बोले- मुझे बनाया जा रहा है सॉफ्ट टारगेट
जेएनयू से बर्खास्त किए गए प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद अंगामचा विमोल अकोइजाम ने अपने ऊपर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को खारिज किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि मणिपुर में जातीय हिंसा के मामले को संभालने के तरीके की आलोचना करने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को चुप कराने की कोशिश और ‘विच हंट’ यानी चुन-चुनकर निशाना बनाने की कार्रवाई बताया. जेएनयू की 11 छात्राओं ने उन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे. विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति ने उन्हें नौ मामलों में दोषी पाया था, जिसके बाद पिछले सप्ताह उन्हें बर्खास्त कर दिया गया. इस मामले में दिल्ली में उनके खिलाफ केस भी दर्ज किया गया है. बीजेपी की ओर से उन्हें कांग्रेस से हटाने की मांग किए जाने के बीच अकोइजाम ने उन आरोपों को भी खारिज किया कि वह दिल्ली में दर्ज मामले का सामना करने से बचने के लिए मणिपुर में रह रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह मेरा निर्वाचन क्षेत्र है. मैं दिल्ली का सांसद नहीं हूं. मैं मणिपुर का सांसद हूं.
ABVP ने किया छात्राओं का समर्थन करने का दावा
इस मामले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े छात्रों ने कहा कि संगठन शिकायत करने वाली छात्राओं के साथ खड़ा रहा. उनका दावा है कि छात्राओं के समर्थन और मामले को उठाए जाने के बाद कार्रवाई हुई. वहीं छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रोफेसर अपने राजनीतिक पद का इस्तेमाल करके खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. उनके मुताबिक प्रोफेसर की ओर से कथित तौर पर धमकी भरे अंदाज में यह भी कहा जाता था कि बाद में देख लेंगे.
राहुल गांधी और कांग्रेस पर भी छात्रों ने उठाए सवाल
जेएनयू के कुछ छात्रों ने इस मामले को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर भी सवाल उठाए. एक छात्र ने कहा कि राहुल गांधी सार्वजनिक रूप से पितृसत्ता (Patriarchy) को चुनौती देने की बात करते हैं, लेकिन आरोपों के घेरे में कांग्रेस के एक सांसद का नाम सामने आना गंभीर सवाल खड़े करता है.
छात्र ने महिला कांग्रेस की ओर से सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट का भी जिक्र किया. उसका दावा था कि सांसद की पहचान सामने आने के बाद पोस्ट हटा दी गई. छात्रों ने इस मामले को लेकर राजनीतिक संगठनों के दोहरे रवैये पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा की बात करने वाले सभी दलों और संगठनों को ऐसे आरोपों पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए. किसी व्यक्ति की राजनीतिक पहचान के आधार पर मामले को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
‘नारे लगाने से कुछ नहीं होगा, ठोस कदम उठाने होंगे’
मामले को लेकर छात्राओं ने कहा कि महिला सुरक्षा केवल नारों और भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. इसके लिए विश्वविद्यालयों में शिकायत दर्ज कराने की सुरक्षित व्यवस्था, निष्पक्ष जांच और शिकायतकर्ताओं को दबाव से बचाने जैसे कदम जरूरी हैं. कैंपस में प्रदर्शन के दौरान महिला सुरक्षा से जुड़े नारे भी लगाए गए. छात्राओं का कहना है कि विश्वविद्यालय ऐसा स्थान होना चाहिए, जहां वे बिना किसी डर के पढ़ाई कर सकें और अपनी शिकायत खुलकर रख सकें. उनके मुताबिक, अगर किसी छात्रा के साथ गलत व्यवहार होता है, तो उसकी शिकायत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और जांच के आधार पर उचित कार्रवाई होनी चाहिए.छात्रों ने यह भी कहा कि महिला सुरक्षा के मुद्दे पर राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर सोचने की जरूरत है. उनके अनुसार, किसी भी संगठन या विचारधारा से जुड़े व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगने की स्थिति में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए.
