Explainer on Delhi AQI increased: जुलाई का महीना मॉनसून का महीना है. दो दिन पहले तक भी मॉनसून की मूसलाधार बारिश ने भिगोया था. पानी बरसने से सिर्फ तापमान में ही गिरावट नहीं हुई थी, बल्कि दिल्ली की आबो-हवा भी सुधर गई थी. दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स घटकर 50 से नीचे आ गया था. दिल्लीवासी शुद्ध हवा में सांस ले रहे थे लेकिन बारिश के बंद होने के बाद ही अचानक राजधानी का मौसम बदल गया है. पूरी दिल्ली में धूल का गुबार है और प्रदूषण स्तर एक बार फिर बढ़ गया है. अब सबसे बड़ा सवाल है कि ऐसा आखिर क्यों हो रहा है?
आज 13 जुलाई के दिल्ली के ताजा आंकड़े देखें तो लाइव एक्यूआई अभी भी खराब श्रेणी में है. इस दौरान पीएम 2.5 की मात्रा 116 है, जबकि पीएम-10, 185 प्रति घन मीटर है. लिहाजा दिल्ली में हवा की गुणवत्ता पूअर हो चुकी है. सिर्फ राजधानी ही नहीं आसपास के शहरों में भी यही हाल है.
मौसम विभाग से जुड़े विशेषज्ञों की मानें तो गर्मी के मौसम में अचानक दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण हैं, हालांकि यहां धूल भरी आंधियां आना सबसे बड़ा कारण है. दिल्ली में रविवार से अचानक धूल भरी हवाओं का प्रकोप बढ़ गया है. यह हवा भारत से नहीं बल्कि ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान की ओर से भारत की ओर बढ़ रही है. ये उत्तर-पश्चिमी हवाएं अपने साथ धूल और मिट्टी का गुबार लेकर भारत में घुस रही हैं. जिसकी वजह से दिल्ली-एनसीआर में धूल के बड़े कणों यानि PM10 की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ गई है.
दिल्ली में धूल का गुबार उठ रहा है और प्रदूषण बढ़ गया है.
इस बारे में भारत मौसम विभाग के पूर्व डीजीएम डॉ.केजे रमेश से जानते हैं कि वे क्या कहते हैं..
- . डॉ. रमेश कहते हैं कि दिल्ली एनसीआर में बारिश के बंद होते ही लगातार बहुत ज्यादा प्रदूषण फैल रहा है. बारिश आए दो दिन ही हुए हैं कि दिल्ली का एक्यूआई जो 50 के आसपास पहुंच गया था तुरंत बढ़कर खराब केटेगरी में आ गया है.
- . ऐसा देखा जा रहा है कि पश्चिम, दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिशाओं से धूल और प्रदूषित हवाएं सूखे मौसम के कारण NCR की ओर बढ़ रही हैं. ये हवाएं अपने साथ धूल के कण भारी मात्रा में लेकर आ रही हैं, जो एनसीआर में आकर मौसम और वातावरण को खराब कर रहे हैं.
- . इस बार प्रदूषण बढ़ने के पीछे हवा की रफ्तार भी जिम्मेदार है. विंड स्पीड बहुत कम है और मौसम स्थिर है, क्योंकि मानसून इस बार कमजोर है. 13 जुलाई को ही हवा की रफ्तार 12 किलोमीटर प्रति घंटा है. यह भी कई जगहों पर कमजोर पड़ रही है.
- . इसके अलावा दिल्ली में जगह-जगह कूड़े के पहाड़ों से अमोनिया, मीथेन, वाष्पशील कार्बनिक यौगिक और सतही ओजोन जैसे प्रदूषक बन रहे हैं और हवा में फैल रहे हैं. ये भी प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं.
बता दें कि 7 जुलाई से 9 जुलाई के बीच हुई भारी बरसात के चलते 10 जुलाई को दिल्ली-एनसीआर की हवा बेहद साफ हो गई थी, यहां तक कि यह तीन साल में सबसे साफ दिनों में शुमार हो गई थी. लेकिन इसके बाद से एक बार फिर दिल्ली में प्रदूषण बढ़ गया है और एक्यूआई खराब हो गया है.
दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है.
विशेषज्ञों ने बताया कि अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान के आसपास पैदा हुआ धूल भरा तूफान उत्तर पश्चिम से भारत में प्रवेश कर गया है, जो बढ़ते हुए दिल्ली एनसीआर में पहुंच गया है. सिर्फ दिल्ली-एनसीआर ही नहीं बल्कि पूरे इंडो-गंगा के मैदानी इलाकों में धूल भरी तेज हवाएं चल रही हैं.
क्या होगा सुधार
वैज्ञानिक केजे रमेश कहते हैं कि धूल का यह गुबार ज्यादा लंबा नहीं चलेगा, बशर्ते उत्तर पश्चिम इलाकों में और धूल भरे तूफान न उठें. इससे दिल्ली की एयर क्वालिटी में अगले दो दिन में सुधार हो सकता है. हालांकि इस तरह के धूल भरे आंधी-तूफान गर्मी और बरसात के मौसम में अक्सर आते हैं. हालांकि ऐसा जून में ज्यादा देखने को मिलता है, इस बार मॉनसून की तरह यह तूफान भी कुछ देरी से आया है.
मॉनसून का कम आना इस समय का सबसे बड़ा संकट है. अल नीनो की वजह से इस बार न केवल मॉनसून देरी से आया है, बल्कि बारिश भी इस बार कम हुई है. जून इस बार सबसे सूखा रहा है, जबकि पिछले 125 साल का पांचवा सबसे सूखा महीना रहा है. वहीं जुलाई में इस बार बारिश होने की संभावना है.
क्या बचाव करें लोग
इस बारे वैज्ञानिकों का कहना है कि ये धूल भरा गुबार लोगों की सेहत के लिए नुकसानदेह है. जितना हो सके घर में रहें. इससे आंखों और सांसों में जलन भी हो सकती है. हवा में धूल आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है. इस दौरान बाहर निकलने से पहले चश्मा जरूर पहनें. पानी पीते रहें. मौसम भी इस बार गर्म हो रहा है. जब तक बारिश नहीं आती, तब तक गर्मी से बचाव का भी ध्यान रखें. हाइड्रेटेड रहें. अगर तेज हवाएं चलती हैं तो पेड़ों और दीवारों के आसपास न रहें.
जो भी अस्थमा के मरीज हैं, वे इस दौरान बाहर निकलना अवॉइड करें.
