30 साल से राम बनकर जीत रहे दिल, कैंसर पीड़ित मां के लिए छोड़ी दुनिया की खुशियां, भावुक कर देगी राजकुमार शर्मा की कहानी

दिल्ली. रामलीला में जब भगवान राम मंच पर आते हैं, तो दर्शक उनके रूप में मर्यादा, धैर्य और प्रेम देखते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पर्दे पर भगवान राम का किरदार निभाने वाला इंसान अपनी असल जिंदगी में कैसा होता होगा? दिल्ली के श्रीराम भारतीय कला केंद्र में पिछले 30 वर्षों से भगवान राम की भूमिका निभा रहे राजकुमार शर्मा की जिंदगी इस सवाल का बेहद खूबसूरत जवाब देती है. राजकुमार शर्मा के लिए राम का किरदार सिर्फ मंच पर निभाई जाने वाली भूमिका नहीं है.

यह उनके जीवन का ऐसा हिस्सा बन चुका है, जिसमें उनकी कला, उनके संस्कार और परिवार के प्रति उनका समर्पण एक साथ नजर आते हैं. उनकी कहानी में एक तरफ 30 साल की मेहनत है, तो दूसरी तरफ मां के प्रति ऐसा प्रेम है, जिसे सुनकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं.

छात्र बनकर आए थे, आज 30 साल से निभा रहे हैं राम का किरदार
राजकुमार शर्मा बताते हैं कि उनका सफर श्रीराम भारतीय कला केंद्र में एक छात्र के तौर पर शुरू हुआ था. उस समय वह 12वीं कक्षा में पढ़ते थे. इसी दौरान उन्होंने खजुराहो में भारतीय कला केंद्र का एक कार्यक्रम देखा. वहां उन्हें पहली बार एहसास हुआ कि बिना कुछ बोले भी अपनी भावनाओं को कितनी खूबसूरती से व्यक्त किया जा सकता है. यह प्रस्तुति मूक अभिनय पर आधारित थी. राजकुमार को यह कला इतनी पसंद आई कि उन्होंने केंद्र से जुड़ने का फैसला कर लिया.

एक्टर ही नहीं कोरियोग्राफर भी
वह बताते हैं कि उन्होंने पद्मश्री शोभा दीपक सिंह से मिलकर अपनी इच्छा जाहिर की. इसके बाद उनका ऑडिशन हुआ और वह चुन लिए गए. शुरुआत में उन्होंने गोल्डन डियर और जटायु जैसे किरदार निभाए. फिर भरत की भूमिका मिली और धीरे-धीरे उनका सफर राम के किरदार तक पहुंच गया. आज वह सिर्फ भगवान राम की भूमिका ही नहीं निभाते, बल्कि एसोसिएट कोरियोग्राफर के तौर पर भी काम कर रहे हैं. उनके लिए यह सफर गुरुजनों के आशीर्वाद और लगातार सीखते रहने का नतीजा है.

जब पहली बार बने राम, तो मिली तारीफ भी और सीख भी
किसी भी कलाकार के लिए पहली बार किसी बड़े किरदार को निभाना आसान नहीं होता. राजकुमार शर्मा के लिए भी भगवान राम की भूमिका निभाने का पहला अनुभव ऐसा ही था. वह बताते हैं कि शुरुआत में उनके वरिष्ठ कलाकार उन्हें अभिनय से जुड़ी छोटी-छोटी बातें समझाते थे. कोई उनके चेहरे के भावों पर ध्यान देने को कहता, तो कोई मुस्कुराने और देखने के तरीके में सुधार करने की सलाह देता. राजकुमार ने इन बातों को आलोचना मानकर नजरअंदाज नहीं किया, बल्कि हर सुझाव से कुछ न कुछ सीखने की कोशिश की.

शुरुआती सीख बनी अभिनय का आधार
उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अपनी कुछ परेशानियों के बारे में निर्देशक शोभा दीपक सिंह को बताया, तो उन्होंने उनके लिए अलग से समय निकाला. दोपहर के समय उन्हें अभिनय की बारीकियां सिखाई जाती थीं. चेहरे के भाव कैसे होने चाहिए, आंखों से बात कैसे कहनी है, भौंहों और होंठों का इस्तेमाल किस तरह करना है, इन सभी चीजों पर काम किया गया. राजकुमार आज भी उस सीख को अपने अभिनय का आधार मानते हैं. उनके लिए यह सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, बल्कि गुरु का दिया हुआ ऐसा प्रसाद है, जो पिछले तीन दशकों से उनके साथ है.

रामायण पढ़कर समझते हैं किरदार की भावनाएं
भगवान राम का किरदार निभाने के लिए सिर्फ मुकुट पहनना, धनुष उठाना और संवाद बोलना काफी नहीं है. इसके पीछे किरदार को समझने और उसकी भावनाओं को महसूस करने की लंबी तैयारी होती है. राजकुमार शर्मा बताते हैं कि उन्होंने वाल्मीकि रामायण, तुलसीदास रामायण और अद्भुत रामायण सहित कई ग्रंथ पढ़े हैं. केंद्र की लाइब्रेरी में मौजूद रामायण से जुड़ी किताबों को पढ़कर उन्होंने इस चरित्र को समझने की कोशिश की.

उनका मानना है कि किसी भी संवाद को रट लेने से अभिनय पूरा नहीं होता. जरूरी यह है कि कलाकार समझे कि भगवान राम उस परिस्थिति में क्या महसूस कर रहे हैं और उनके सामने जो स्थिति है, उसमें उनका व्यवहार कैसा होगा.

आंखें सब बयां कर देती हैं
वह बताते हैं कि जब राम को वनवास मिलता है, जब उन्हें माता सीता या राजा दशरथ से संवाद करना होता है, तब केवल शब्दों पर ध्यान देना काफी नहीं होता. उन शब्दों के पीछे छिपी भावनाओं को समझना भी जरूरी है. राजकुमार के मुताबिक, इस किरदार में आंखों का बहुत महत्व है. कई बार बिना कुछ कहे भी आंखें वह सब बयां कर देती हैं, जिसे शब्दों में समझाना मुश्किल होता है.

मां के लिए छोड़ दी जिंदगी की दूसरी खुशियां, 12 साल से कर रहे सेवा
राजकुमार शर्मा की कहानी का सबसे भावुक हिस्सा उनकी मां से जुड़ा है. बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि भगवान राम के किरदार ने उनकी जिंदगी को किस तरह प्रभावित किया है, तो उन्होंने अपने परिवार का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि उनके दोनों बच्चे विदेश में रहते हैं और उनकी पत्नी भी उनसे दूर रहती हैं. वहीं, वह अपनी मां के साथ रहते हैं और उनकी देखभाल करते हैं.

भगवान ने दी सेवा की शक्ति
राजकुमार बताते हैं कि उनकी मां पिछले 12-13 साल से कैंसर से जूझ रही हैं. ऐसे में उनके लिए मां के पास रहना और उनकी सेवा करना सबसे जरूरी है. उनके बड़े भाई वीरेंद्र शर्मा ने भी मुंबई में अपना काम छोड़कर मां के साथ रहने का फैसला किया. राजकुमार कहते हैं कि भगवान राम की भूमिका निभाते हुए उन्हें ऐसा लगता है, जैसे प्रभु ने उन्हें परिवार की सेवा करने की शक्ति दी है.

वह इसे भगवान का आशीर्वाद मानते हैं कि वह इतने वर्षों से अपनी मां के साथ रह पा रहे हैं. उनकी बातें सुनकर यह समझ आता है कि उनके लिए परिवार की जिम्मेदारी किसी मजबूरी का नाम नहीं, बल्कि प्रेम से निभाया जाने वाला कर्तव्य है.

मां आज भी कहती हैं, सभी बच्चों को तुम्हारे जैसा होना चाहिए
राजकुमार शर्मा अपनी मां के बारे में बात करते हुए भावुक हो जाते हैं. वह बताते हैं कि उनकी मां भी उन्हें भगवान राम के रूप में देखना चाहती हैं, लेकिन बीमारी के कारण वह भीड़भाड़ वाली जगहों पर नहीं जा सकतीं. ऐसे में वह घर पर बैठकर वीडियो देखती हैं या दूसरों से उनके अभिनय के बारे में सुनती हैं. राजकुमार बताते हैं कि वह कई बार अपनी मां को वीडियो दिखाते हैं, लेकिन मां का प्यार भरा जवाब उन्हें भावुक कर देता है. वह कहते हैं कि मां के लिए उनकी भूमिका से ज्यादा जरूरी उनका साथ है. उन्हें इस बात की खुशी है कि वह अपनी मां के पास रहकर उनकी सेवा कर पा रहे हैं.

काश सभी के बच्चे ऐसे हों
राजकुमार ने अस्पताल का एक किस्सा भी साझा किया. उन्होंने बताया कि एक बार वह अस्पताल में अपनी मां के पास बैठे उनसे बात कर रहे थे. उसी वार्ड में भर्ती एक बुजुर्ग ने डॉक्टर से कहा कि उनके बेटे उनके पास नहीं आते, जबकि राजकुमार इतने वर्षों से अपनी मां की सेवा कर रहे हैं. राजकुमार के मुताबिक, डॉक्टर ने उस बुजुर्ग के बेटे को भी मां-बाप के साथ रहने और उनकी देखभाल करने का महत्व समझाया.

राजकुमार इसे अपनी कोई महानता नहीं मानते. उनका कहना है कि हर माता-पिता को अपने बच्चों से प्यार मिलता है और हर बच्चे को अपने माता-पिता के प्रति जिम्मेदारी समझनी चाहिए. उनकी मां भी उनसे कहती हैं कि काश, सभी बच्चे ऐसे ही होते. राजकुमार के लिए इससे बड़ा आशीर्वाद शायद कुछ नहीं है.

सुबह 4:30 बजे उठकर करते हैं योग, दौड़ और मेडिटेशन
तीन दशकों तक भगवान राम का किरदार निभाने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रहना भी जरूरी है. राजकुमार शर्मा बताते हैं कि उनकी फिटनेस का सबसे बड़ा कारण उनकी दिनचर्या और मां का साथ है. वह सुबह करीब 4:30 बजे उठ जाते हैं. इसके बाद दौड़ लगाना, योग करना और मेडिटेशन करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है. वह बताते हैं कि शूटिंग या कार्यक्रम के कारण देर रात घर पहुंचने पर भी कोशिश रहती है कि उनकी दिनचर्या बनी रहे.

खाने-पीने को लेकर भी वह काफी ध्यान रखते हैं. राजकुमार बताते हैं कि उन्होंने काफी समय पहले ही पान, बीड़ी, तंबाकू और सिगरेट जैसी चीजों से दूरी बना ली थी. पहले वह मांसाहारी भोजन करते थे, लेकिन अब पूरी तरह शाकाहारी हैं. वह मानते हैं कि फिट रहने के लिए जरूरी नहीं कि इंसान अपनी जिंदगी की हर छोटी खुशी छोड़ दे. संतुलित खानपान और नियमित दिनचर्या से भी शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है.

राम का किरदार निभाने के लिए नहीं बदली जिंदगी
अक्सर रामलीला में भगवान राम का किरदार निभाने वाले कलाकारों की जीवनशैली को लेकर लोगों के मन में कई सवाल होते हैं. क्या उन्हें कुछ खास चीजों का त्याग करना पड़ता है. क्या उन्हें अपने रहन-सहन में बदलाव करना होता है? इस सवाल पर राजकुमार शर्मा बताते हैं कि वह अपनी मां से सलाह लेते हैं. उनकी मां का कहना है कि किसी चीज को केवल इसलिए नहीं छोड़ना चाहिए कि लोग ऐसा करने को कह रहे हैं. इंसान को अपनी समझ और जरूरत के हिसाब से फैसला करना चाहिए.

राजकुमार के लिए भगवान राम का किरदार निभाने का अर्थ दिखावा करना नहीं है. वह कहते हैं कि भगवान राम के जीवन और उनके विचारों को समझना ज्यादा जरूरी है. उनके मुताबिक, वह जैसे हैं, वैसे ही रहना चाहते हैं. उनके लिए राम का किरदार निभाना एक जिम्मेदारी है, लेकिन इसके लिए खुद को दूसरों के सामने अलग दिखाने की जरूरत नहीं है. शायद यही वजह है कि तीन दशक बीत जाने के बाद भी वह अपने काम को भगवान की कृपा और गुरुजनों के आशीर्वाद से जोड़कर देखते हैं.

दर्शकों से की खास अपील
श्रीराम भारतीय कला केंद्र में होने वाली रामलीला को लेकर राजकुमार शर्मा कहते हैं कि इसके पीछे कलाकारों की बहुत मेहनत होती है. यहां बड़े-बड़े सेट तैयार किए जाते हैं और पूरी टीम दिन-रात काम करती है. उनके मुताबिक, इस प्रस्तुति को तैयार करने में करीब 150 से 200 लोगों की टीम जुटी रहती है. हर कलाकार और तकनीकी सदस्य अपनी जिम्मेदारी निभाता है, ताकि दर्शकों को रामायण की कहानी मंच पर जीवंत दिखाई दे सके.

राजकुमार चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग रामलीला देखने आएं और कलाकारों की मेहनत को करीब से समझें. उन्होंने दर्शकों से अपील की कि वे पास के बजाय टिकट लेकर कार्यक्रम देखने आएं, ताकि इस तरह की प्रस्तुतियों को प्रोत्साहन मिल सके.

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