दिल्ली सरकार के सबसे बड़े अस्पताल लोक नायक जयप्रकाश नारायण (एलएनजेपी) में इलाज कराने वाले मरीजों के लिए राहत की खबर है. अस्पताल में नई मशीनें लगाई गई हैं. जिनकी कीमत करीब 40 करोड़ रुपये है. ऐसे में जांचें कराने के लिए महीनों नहीं बल्कि एक-दो साल तक का इंतजार करने वाले मरीजों को आराम मिलने वाला है. उन्हें अब लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा.
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक एलएनजेपी में मरीजों को एमआरआई स्कैन के लिए दो से तीन साल तक इंतजार करना पड़ता था. मशीनों की कमी के कारण यह स्थिति बनी हुई थी. अस्पताल के ओपीडी में रोजाना औसतन 5,000 मरीज आते हैं. सितंबर में ही रिपोर्ट आई थी कि अस्पताल में सिर्फ एक एमआरआई और एक सीटी स्कैनर काम कर रहा था. जांच मुफ्त होने के बावजूद देरी से मरीजों के इलाज पर असर पड़ रहा था.
अब हुआ नई मशीनों का उद्घाटन
गुरुवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने अस्पताल में नई मशीनों का उद्घाटन किया. इनमें एक 3-टेस्ला एमआरआई मशीन और एक ड्यूल-सोर्स 256-स्लाइस सीटी स्कैनर शामिल हैं. ये दोनों मशीनें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के सीएसआर कार्यक्रम के तहत लगाई गई हैं. इनकी लागत करीब 40 करोड़ रुपये है. अस्पताल अधिकारियों के अनुसार नई मशीनों से एमआरआई और सीटी स्कैन की संख्या दोगुनी हो जाएगी.
स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा, “ये मशीनें मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होंगी. सीटी स्कैनर से किडनी स्टोन जैसी समस्याओं का जल्दी और सही निदान हो सकेगा. एमआरआई मशीन से गंभीर बीमारियों का पहले पता चल सकेगा. दिल्ली के लोगों के लिए ये जांच पूरी तरह मुफ्त होंगी.” उन्होंने बताया कि अब मरीजों को महत्वपूर्ण जांच के लिए दूसरे अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. दिल, दिमाग, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का निदान अब यहीं हो सकेगा.
नई मशीनें कैसे काम करती हैं
ड्यूल-सोर्स सीटी स्कैनर में एक के बजाय दो एक्स-रे ट्यूब होती हैं. इससे तस्वीरें जल्दी बनती हैं और दिल जैसे चलते अंगों की जांच आसान हो जाती है. 3-टेस्ला एमआरआई मशीन सामान्य 1.5-टेस्ला मशीनों से दोगुनी चुंबकीय शक्ति वाली होती है. इससे दिमाग और नर्वस सिस्टम की साफ तस्वीरें मिलती हैं.
मशीनें मरीजों के लिए आरामदायक भी हैं. एमआरआई मशीन का खुलने वाला हिस्सा 70 सेंटीमीटर चौड़ा है, जिससे बंद जगह का डर कम लगता है. अंदर स्क्रीन पर वीडियो या गाने चलते हैं, जिससे मरीज शांत रहते हैं. स्कैन का समय भी कम लगता है और रिपोर्ट जल्दी मिलती है.
अस्पताल के अधिकारी के अनुसार पहले रोज 30 से 40 एमआरआई स्कैन होते थे, अब 80 से 100 हो सकेंगे. सीटी स्कैन की संख्या 150 से बढ़कर करीब 300 हो जाएगी. इससे मरीजों का इंतजार आधे से भी कम हो जाएगा और जांच का बोझ कम होगा और मरीजों को जल्दी रिपोर्ट मिल सकेगी.
अस्पताल की अन्य सुविधाएं
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि पिछले मई में मेडिकल जेनेटिक्स विभाग शुरू किया गया था. यह दिल्ली सरकार के किसी अस्पताल में पहला ऐसा विभाग है. यहां एक बूंद खून से जेनेटिक बीमारी का पता लगाया जा सकता है. मिशन एएनएमओएल को बढ़ाकर 63 दुर्लभ बीमारियों तक पहुंचाया जा रहा है. यह मिशन नवजात बच्चों की मुफ्त स्क्रीनिंग के लिए है.
सितंबर में रिपोर्ट हुई थी कि एलएनजेपी के जेनेटिक लैब में हर महीने 14,000 से ज्यादा नवजात बच्चों के सैंपल की जांच होती है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि अस्पताल की लेक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट दिल्ली की इकलौती ऐसी सुविधा है. यह समय से पहले पैदा हुए, कम वजन वाले और गंभीर रूप से बीमार बच्चों के लिए है. यहां स्तनपान की सलाह, दूध का सुरक्षित संग्रह और डोनर ह्यूमन मिल्क की सुविधा उपलब्ध है.
