नई दिल्लीः कपड़ों पर कढ़ाई तो आपने खूब देखी होगी, लेकिन क्या कभी कागज पर सुई-धागे से बनी खूबसूरत तस्वीरें देखी हैं. दिल्ली हाट के Master Creation में अपनी अनोखी कला पेश कर रहीं रितु जम्मू-कश्मीर की रितु गुप्ता कागज पर आरी से कढ़ाई कर एक अलग पहचान बना रही हैं. उनकी यह कला सिर्फ खूबसूरती तक सीमित नहीं, बल्कि युवाओं को नशे से दूर रखने और महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने का रास्ता दिखाने की कोशिश भी है.
कपड़ों से हटकर कागज पर शुरू किया नया प्रयोग
कढ़ाई का नाम आते ही अक्सर कपड़े, रंग-बिरंगे धागे और डिजाइन याद आते हैं. लेकिन जम्मू की रहने वाली रितु गुप्ता ने इसी कला को एक नए अंदाज में पेश किया है. वह कागज पर आरी की सुई से कढ़ाई करती हैं. इसमें धागों की मदद से भगवान की तस्वीरों से लेकर पक्षियों, जानवरों और लोगों के पोर्ट्रेट तक तैयार किए जाते हैं. रितु बताती हैं कि उन्होंने साल 2004 में इस कला पर काम शुरू किया था. लेकिन, बीच में कई बार काम रुका, लेकिन कला से उनका जुड़ाव बना रहा. कोरोना के बाद उन्होंने इस काम पर खास तौर पर ध्यान देना शुरू किया और अपने पति व परिवार के सहयोग से कागज पर कढ़ाई का नया प्रयोग किया.
भगवान के श्रृंगार से शुरू हुआ सफर
रितु ने शुरुआत भगवान की तस्वीरों और उनके श्रृंगार से की.आमतौर पर तस्वीरों को सजाने के लिए ग्लिटर या दूसरी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन उन्होंने उन पर कढ़ाई करने की कोशिश की. धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने पक्षियों, जानवरों और पोर्ट्रेट पर भी काम शुरू कर दिया.उनके मुताबिक, इस कला में सबसे ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ती है. कागज पर सुई चलाते समय अगर जरा सी चूक हो जाए, तो पूरी मेहनत खराब हो सकती है. कई बार आधी बनी तस्वीर भी टूट जाती है. ऐसे में दोबारा शुरुआत करनी पड़ती है.
डिप्रेशन से जूझीं, कला ने दिया आगे बढ़ने का हौसला
रितु की कहानी सिर्फ एक कलाकार की कहानी नहीं है. वह बताती हैं कि कोरोना के बाद वह डिप्रेशन और गंभीर शारीरिक परेशानी से भी गुजरीं. करीब तीन साल तक उन्होंने मुश्किल दौर का सामना किया. डॉक्टर की सलाह पर खुद को व्यस्त रखने की कोशिश की, लेकिन उन्हें खास फर्क महसूस नहीं हुआ. इसके बाद उन्होंने बचपन से जुड़ी अपनी कला को फिर से समय देना शुरू किया. धीरे-धीरे यही कला उनके लिए हिम्मत और आगे बढ़ने का सहारा बनी.
800 से ज्यादा लड़कियों और बच्चों को दी ट्रेनिंग
रितु का मकसद इस कला को अपने तक सीमित रखना नहीं है. वह चाहती हैं कि युवा नशे से दूर रहें और घरों में रहने वाली महिलाएं भी कुछ नया सीखकर अपनी पहचान बना सकें. वह जम्मू में कॉलेजों, आर्मी वुमन वेलफेयर स्टेशन और पुलिस वेलफेयर स्टेशन में ट्रेनिंग दे चुकी हैं. उनके मुताबिक, अब तक करीब 800 से 900 लड़कियों और बच्चों को यह कला सिखा चुकी हैं.
500 रुपये से शुरू होती है तस्वीरों की कीमत
रितु के मुताबिक, भगवान की तस्वीरों की कीमत करीब 500 रुपये से शुरू होती है. वहीं, पक्षियों की कलाकृतियां लगभग 3,500 से 4,000 रुपये तक की हैं और पोर्ट्रेट की कीमत करीब 15,000 रुपये तक पहुंच सकती है. डिजाइन और आकार के हिसाब से कीमत बदलती है.साल 2024 में उन्हें जम्मू-कश्मीर का स्टेट अवॉर्ड भी मिला था. वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू समेत कई बड़ी हस्तियों के पोर्ट्रेट भी बना चुकी हैं और चाहती हैं कि उनकी कला उन तक पहुंचे.
