Jhunjhunu News: 3 खिलाड़ियों से शुरू हुआ सफर 300 तक पहुंचा; पहली बार 9 खिलाड़ी राज्य स्तर पर दिखाएंगे दम

Last Updated:

Jhunjhunu Chess State Level Competition : झुंझुनू का मंडावा अब शतरंज के खेल में अपनी अलग पहचान बना रहा है. छह साल पहले शुरू हुए मंडावा चेस क्लब के करीब 300 खिलाड़ी जुड़ चुके हैं, और पहली बार नौ खिलाड़ियों का राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयन हुआ है. वर्ष 1972 और 1973 में जयपुर और जोधपुर में आयोजित प्रतियोगिताओं में उन्होंने राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया था. दोनों ही बार वे प्रदेश के नंबर वन खिलाड़ी बने.

ख़बरें फटाफट

झुंझुनूं. हवेलियों और पर्यटन के लिए दुनियाभर में पहचान रखने वाला मंडावा अब शतरंज की बिसात पर भी अपनी अलग पहचान बना रहा है. यहां कभी कुछ लोगों तक सीमित रहने वाला शतरंज का खेल आज बच्चों और युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रहा है. छह साल पहले महज तीन खिलाड़ियों से शुरू हुआ मंडावा चेस क्लब का सफर आज करीब 300 खिलाड़ियों तक पहुंच चुका है. इस बदलाव का नतीजा है कि पहली बार मंडावा के नौ खिलाड़ियों का राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में खेलने के लिए चयन हुआ है. यह उपलब्धि न केवल क्लब, बल्कि पूरे कस्बे के लिए गौरव की बात है.

मंडावा में शतरंज का शौक कोई नया नहीं है. पुराने समय से ही कस्बे के कई संभ्रांत नागरिक इस खेल के माहिर रहे हैं. पूर्व चेयरमैन पंडित लादूराम मिश्रा, रतनलाल मिश्रा, कस्तूरी लाल मिश्रा, ओमप्रकाश सोनी, रामेश्वर चौहान, शिवचंद्र पीपलवा, पुरुषोत्तम पीपलवा और चिरंजीलाल तोलासरिया जैसे लोगों ने शतरंज की परंपरा को आगे बढ़ाया. इन खिलाड़ियों की बिसात पर चलने वाली चालें देखने के लिए लोग उत्सुक रहते थे. बाद में इसी परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत महसूस हुई.

बुजुर्गों के शौक को नई पीढ़ी ने बनाया जुनून
मंडावा निवासी केशरदेव टेलर कोलकाता में रहते थे. सेवानिवृत्ति के बाद मंडावा लौटे तो उन्होंने बच्चों और युवाओं को शतरंज सिखाने की पहल की. उनके साथ कस्बे के अन्य खेलप्रेमियों ने भी सहयोग किया. गोपाल सिंह चौहान की प्रेरणा से 2 फरवरी 2020 को मंडावा चेस क्लब की स्थापना हुई. शुरुआत में क्लब से केवल तीन खिलाड़ी जुड़े थे, लेकिन धीरे-धीरे यह कारवां बढ़ता गया. आज करीब 300 खिलाड़ी क्लब से जुड़े हुए हैं. यहां सीनियर खिलाड़ियों के मार्गदर्शन में बच्चों को नियमित रूप से अभ्यास करवाया जाता है.

रतनलाल मिश्रा ने भी प्रदेश में बनाई थी पहचान
मंडावा में शतरंज को लोकप्रिय बनाने में पूर्व सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी और पूर्व डिप्टी डायरेक्टर रतनलाल मिश्रा का भी अहम योगदान रहा. वे शतरंज के बेहतरीन खिलाड़ी थे. वर्ष 1972 और 1973 में जयपुर और जोधपुर में आयोजित प्रतियोगिताओं में उन्होंने राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया था. दोनों ही बार वे प्रदेश के नंबर वन खिलाड़ी बने. उनके खेल से प्रभावित होकर कई लोग शतरंज की ओर आकर्षित हुए. उनकी प्रेरणा भी मंडावा में चेस क्लब की स्थापना और उसके विस्तार की एक मजबूत वजह बनी.

हर साल होती है राज्य स्तरीय प्रतियोगिता
क्लब का संचालन 15 सदस्यीय कमेटी करती है. संस्था प्रधान बाबूलाल कुमावत, सचिव ज्ञानप्रकाश गोयनका और संरक्षक केशरदेव टेलर के नेतृत्व में खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं. तोलासरिया परिवार के सहयोग से सेठ चिरंजीलाल तोलासरिया की स्मृति में हर साल राज्य स्तरीय शतरंज प्रतियोगिता आयोजित की जाती है. इसमें अंडर-14 और अंडर-19 आयु वर्ग के खिलाड़ी भाग लेते हैं. बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को पुरस्कार, क्लब का प्रतीक चिह्न और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाता है.

पांच बार ट्रॉफी जीतकर बढ़ाया मंडावा का मान
क्लब अब तक अपने खिलाड़ियों को कोटा, उदयपुर, जयपुर, चूरू सहित प्रदेश के कई जिलों में आयोजित प्रतियोगिताओं में भेज चुका है. यहां के खिलाड़ियों ने पांच बार ट्रॉफी जीतकर मंडावा का नाम रोशन किया है. अब नौ खिलाड़ियों का राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयन क्लब की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल है.

About the Author

आनंद पाण्डेयContent Producer

आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…

और पढ़ें

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *