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सुनील शेट्टी ने बच्चों अथिया शेट्टी और अहान शेट्टी को लाइमलाइट से दूर सामान्य माहौल में पाला था. कड़े नियमों के बावजूद अथिया ने अभिनय को चुना और 2015 में फिल्म हीरो से बॉलीवुड में डेब्यू किया.
नई दिल्ली: बॉलीवुड की चकाचौंध भरी दुनिया में कई सितारे ऐसे हैं, जिन्हें अभिनय विरासत में मिला लेकिन उस मुकाम तक पहुंचना उनके लिए भी आसान नहीं रहा. जब घर का माहौल अनुशासन, सख्त कायदों और पारंपरिक मूल्यों से बंधा हो, तो एंटरटेनमेंट की दुनिया में कदम रखना एक चुनौती बन जाता है. कुछ ऐसी ही कहानी है- एक्ट्रेस अथिया शेट्टी की. (फोटो साभार: Instagram@athiyashetty)
बॉलीवुड के ‘अन्ना’ सुनील शेट्टी के घर में बच्चों के मनोरंजन खासकर फिल्मों और टीवी को लेकर सख्त नियम हुआ करते थे, जहां आज के समय युवा पीढ़ी के लिए स्क्रीन टाइम पर कोई पाबंदी नहीं होती है, तो वहीं अथिया शेट्टी के बचपन में मनोरंजन की हर एक्टिविटी पर एक कड़ा पहरा था. (फोटो साभार: Instagram@athiyashetty)
5 नवंबर 1992 को मुंबई में जन्मी अथिया शेट्टी के पिता सुनील शेट्टी बॉलीवुड के बड़े स्टार हैं और मां माना शेट्टी एक फैशन डिजाइनर और समाज सेविका हैं. इसके बावजूद, उनकी मां ने उन्हें बॉलीवुड की ग्लैमरस दुनिया और स्टार्स (जैसे जुहू या बांद्रा) से दूर साउथ मुंबई के अल्टमाउंट रोड वाले इलाके में पाला-पोसा ताकि बच्चे एक सामान्य जीवन जी सकें. (फोटो साभार: Instagram@athiyashetty)
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एक्टर सुनील शेट्टी के घर में सख्त नियम था कि बच्चे फिल्म के सेट पर नहीं जाएंगे और घर में कोई फिल्म मैगजीन भी नहीं आती थी. दरअसल, सुनील शेट्टी नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे फिल्म इंडस्ट्री की गॉसिप, अफवाहों या किसी भी तरह की निगेटिव खबरों को पढ़कर बड़े हों. यही वजह है कि अथिया शेट्टी और उनके भाई अहान शेट्टी को अपने पिता की फिल्मों के सेट पर जाने की इजाजत नहीं थी. उन्हें एक सामान्य और साधारण माहौल में बड़ा किया गया, ताकि वे लाइमलाइट के दबाव से बच सकें. (फोटो साभार: Instagram@athiyashetty)
बचपन से ही अथिया में समाज सेवा के संस्कार डाले गए. वे मात्र 10-12 साल की उम्र से ही अपनी मां और नानी की संस्था ‘सेव द चिल्ड्रन इंडिया’ में जाकर स्पेशल नीड्स बच्चों को पढ़ाने और उनकी मदद करने का काम करती थीं. सुनील शेट्टी का मानना था कि फिल्म इंडस्ट्री में आने वाले उतार-चढ़ाव, सफलता-विफलता और मीडिया ट्रायल का असर बच्चों के मानसिक विकास पर नहीं पड़ना चाहिए. वे उन्हें एक सुरक्षित और सामान्य बचपन देना चाहते थे. (फोटो साभार: Instagram@athiyashetty)
सुनील शेट्टी ने एक पॉकास्ट के दौरान इस बात का खुलासा भी किया था कि उन्होंने अपने बच्चों को भारतीय बोर्ड के बजाय इंटरनेशनल/अमेरिकन बोर्ड के स्कूल में क्यों पढ़ाया था. सुनील का कहना था कि वे चाहते थे कि उनके बच्चे ऐसे स्कूलों में पढ़ें, जहां शिक्षक और स्टाफ अमेरिकी (विदेशी) हों, जिन्हें भारतीय सिनेमा के स्टार्स के बारे में ज्यादा जानकारी न हो. इससे बच्चों पर ‘सुनील शेट्टी की बेटी या बेटा’ होने का कोई मानसिक दबाव या खास पहचान का असर नहीं पड़े, ताकि उनके बच्चे जमीन से जुड़े रहें और अपनी खुद की पहचान बनाएं.
(फोटो साभार: Instagram@athiyashetty)
दिलचस्प बात है कि इतनी पाबंदियों के बावजूद अथिया शेट्टी ने बड़े होकर अभिनय को ही अपने करियर के रूप में चुना. स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद अथिया ने आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका के अटलांटा में एक कॉलेज में दाखिला ले लिया था लेकिन एयरपोर्ट पर उनका मन बदल गया और उन्होंने अपने पिता से कहा कि वे फिल्मों की दुनिया में ही जाना चाहती हैं. (फोटो साभार: Instagram@athiyashetty)
अथिया फिर अकेले न्यूयॉर्क शहर चली गईं और वहां की मशहूर न्यूयॉर्क फिल्म एकेडमी में दाखिला लिया. उन्होंने वहां से फिल्ममेकिंग और लिबरल आर्ट्स में ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी की. उन्होंने हायर एजुकेशन पूरी करने के बाद साल 2015 में फिल्म ‘हीरो’ से बॉलीवुड में कदम रखा. (फोटो साभार: Instagram@athiyashetty)
