नोएडा के युवाओं का दिवाली प्लान… कोई जाएगा गांव तो कोई अपनों के साथ बनाएगा त्योहार, जानिए Gen Z के लिए क्या हैं त्योहार के मायने

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Noida News: नोएडा में इस बार Gen Z युवाओं की दिवाली तैयारियों में खास बदलाव दिख रहा है. पटाखों के शोर और प्रदूषण से दूरी बनाकर युवा पर्यावरण संरक्षण, दीयों की रोशनी और परिवार के साथ वक्त बिताने को तरजीह दे रहे हैं. कोई गांव जाकर अपनों संग त्योहार मना रहा है, तो कोई फोटोग्राफी और सोशल अवेयरनेस के जरिए इस पर्व को यादगार बना रहा है. जानिए युवाओं का दिवाली प्लान.

Noida News: रोशनी के महापर्व दिवाली को लेकर इस बार दिल्ली-एनसीआर के युवाओं की सोच और प्राथमिकताओं में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है. ‘Gen Z’ यानी नई पीढ़ी अब केवल शोर-शराबे तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके लिए इस त्योहार का मतलब अपनों का साथ, मानसिक शांति और पर्यावरण की सुरक्षा बन चुका है.

नोएडा के युवाओं में इस बार दिवाली को लेकर पार्टी, फोटोग्राफी, सोशल मीडिया और घूमने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी खास संजीदगी नजर आ रही है. किसी के लिए यह मौका भागदौड़ भरी जिंदगी से निकलकर परिवार के साथ सुकून के पल बिताने का है, तो कोई दोस्तों संग यादगार लम्हे संजोने की तैयारी में है. युवाओं ने लोकल18 से खास बातचीत में साझा किया कि वे इस बार दिवाली किस खास अंदाज में मनाने जा रहे हैं और उनके लिए इस पर्व के असली मायने क्या हैं.

पारंपरिक तरीके से दिवाली मनाने का प्लान
कॉलेज स्टूडेंट शालू ने बात करते हुए बताया कि वह इस बार दिवाली अपने परिवार के सदस्यों के साथ मनाने की योजना बना रही हैं. उनके कॉलेज और काम की वजह से परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना मुश्किल हो जाता है. इसलिए इस बार वह त्योहार को परिवार के साथ यादगार बनाना चाहती हैं. शालू ने दूसरे युवाओं को भी सलाह दी कि चाहे पढ़ाई हो या काम, दिवाली पर घर जाने और परिवार के साथ त्योहार मनाने की कोशिश होनी चाहिए. उन्होंने बताया कि कुछ दोस्त हॉस्टल में रहते हैं और नौकरी या पढ़ाई के कारण घर नहीं जा पाते, ऐसे दोस्तों के लिए उन्हें बुरा लगता है. वहीं पटाखों को लेकर शालू का अनुभव अलग है. उन्होंने बताया कि एक बार पटाखे से उनका हाथ जल गया था, इसके बाद से वह करीब 10 से 12 साल से पटाखों से दूर हैं.

ग्रीन दिवाली और पर्यावरण का संकल्प
ध्रुव प्रजापति ने बताया कि इस बार वह ग्रीन दिवाली मनाएंगे. पटाखों से होने वाले प्रदूषण के कारण आंखों में जलन और वातावरण में धुंध जैसी परेशानी महसूस होती है. इसलिए वह पटाखों से दूरी बनाकर परिवार के साथ दीये जलाने, मिठाइयां बांटने और पुरानी परंपराओं के अनुसार त्योहार मनाना चाहते हैं. ध्रुव को फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी का शौक है, ऐसे में वह परिवार के साथ बिताए पलों को कैमरे में कैद कर सोशल मीडिया पर डालेंगे. जबकि सूरज ने बताया कि इस बार वह उत्तर प्रदेश के जालौन स्थित अपने गांव जाकर परिवार के साथ दिवाली मनाएंगे. उनके मुताबिक शहर की तुलना में गांव में परिवार के साथ त्योहार मनाने का अनुभव ही बिल्कुल अलग होता है.

बच्चों के साथ त्योहार का लुत्फ और सामाजिक संदेश
दूसरी ओर हाफ़िया ने बताया कि वह धार्मिक रूप से दिवाली नहीं मनाती हैं, लेकिन उन्हें यह त्योहार बहुत अच्छा लगता है. इस बार वह बच्चों के साथ दिवाली का लुत्फ जरूर उठाएंगी. उन्होंने बताया कि घर पर रहकर या परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर त्योहार मनाना उन्हें पसंद है. वहीं बीसीए के छात्र आदित्य इस बार अपने दोस्तों और जिस एनजीओ से जुड़े हैं, वहां के शिक्षकों के साथ दिवाली मनाने की योजना बना रहे हैं. उनका कहना है कि वह लोगों को पटाखों से होने वाले प्रदूषण के बारे में जागरूक करना चाहते हैं.

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Rahul Goel

Rahul Goel is a senior journalist with over 15 years of experience in print and digital media. He currently serves as a Coordinator and Publisher at News18 Hindi, managing State and Local18 content operations a…

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