नोएडा और ग्रेटर नोएडा में फ्लैट या दुकान खरीदने से पहले जरूर चेक करें ये 6 दस्तावेज, फ्रॉड से बचने के लिए जानिए एक्सपर्ट टिप्स

Greater Noida News: ग्रेटर नोएडा-नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में रियल एस्टेट निवेश को लेकर खरीदारों की दिलचस्पी बढ़ रही है. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बाद देश ही नहीं, बल्कि दुनियाभर से लोग यहां प्रॉपर्टी में निवेश करने के लिए पहुंच रहे हैं. ऐसे में सही प्रोजेक्ट और भरोसेमंद बिल्डर का चुनाव करना खरीदारों के सामने बड़ी चुनौती बन गया है. रियल एस्टेट एक्सपर्ट अंकुर मित्तल ने प्रॉपर्टी खरीदने वालों को छह महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है.

नए खरीदारों के सामने भरोसे और सही चुनाव का संकट
उन्होंने बताया कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में प्रॉपर्टी की संभावनाओं को देखते हुए बड़ी संख्या में लोग निवेश के लिए रुचि दिखा रहे हैं. इनमें ऐसे खरीदार भी शामिल हैं, जो पहली बार यहां फ्लैट, दुकान या कमर्शियल प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं. लेकिन उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि किस बिल्डर पर भरोसा करें, किस प्रोजेक्ट में पैसा लगाएं और किससे दूरी बनाकर रखें.

UP RERA रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता
उन्होंने कहा कि खरीदारों को सबसे पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिस परियोजना में वे निवेश करने जा रहे हैं, उसका पंजीकरण उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP RERA) में है या नहीं. इसके अलावा प्रॉपर्टी की बुकिंग करने से पहले छह बिंदुओं की जांच बेहद जरूरी है.

1. प्रोजेक्ट का नक्शा अथॉरिटी से स्वीकृत है या नहीं
उन्होंने कहा कि सबसे पहले खरीदार को यह जांचना चाहिए कि जिस प्रॉपर्टी को वह खरीद रहा है, उसका नक्शा संबंधित प्राधिकरण से पूरी तरह स्वीकृत और पास है या नहीं. केवल बिल्डर की बातों पर भरोसा करने के बजाय नक्शे की कॉपी मांगनी चाहिए. साथ ही यह भी देखना चाहिए कि जिस फ्लैट, दुकान या यूनिट की बुकिंग की जा रही है, वह स्वीकृत नक्शे का हिस्सा है या नहीं.

2. बिल्डर के पास सभी जरूरी NOC हैं या नहीं
उन्होंने कहा कि दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु परियोजना से जुड़ी जरूरी अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) की जांच करना है. बिल्डर के पास फायर विभाग की प्रोविजनल NOC, जिलाधिकारी कार्यालय से संबंधित NOC और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित अन्य जरूरी विभागों की अनुमतियां होनी चाहिए. खरीदार को इन दस्तावेजों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए.

3. बैंक से प्रोजेक्ट अप्रूवल की करें जांच
उन्होंने बताया कि तीसरा बिंदु प्रोजेक्ट का बैंक से अप्रूवल होना है. अंकुर मित्तल ने बताया कि यदि कोई परियोजना राष्ट्रीयकृत या निजी बैंक से स्वीकृत है, तो खरीदार को संबंधित बैंक से इसकी पुष्टि करनी चाहिए. HDFC और ICICI जैसे बैंक परियोजनाओं की जांच के बाद लोन उपलब्ध कराते हैं. आजकल कमर्शियल प्रॉपर्टी पर भी बैंक आसानी से लोन दे रहे हैं. इसलिए बैंक अप्रूवल की जानकारी लेना जरूरी है.

4. डेवलपर का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड जरूर देखें
किसी भी प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले डेवलपर का पिछला रिकॉर्ड जांचना चाहिए. यह देखना जरूरी है कि बिल्डर ने पहले कितने प्रोजेक्ट पूरे किए हैं, ग्राहकों को तय समय पर कब्जा दिया है या नहीं और उसकी डिलीवरी कैसी रही है. इससे बिल्डर की विश्वसनीयता का अंदाजा लगाया जा सकता है.

5. निर्माण कार्य की रफ्तार पर रखें नजर
उन्होंने बताया कि सिर्फ प्रोजेक्ट की बुकिंग और कागजी दावों को देखकर निवेश नहीं करना चाहिए. खरीदार को मौके पर जाकर निर्माण कार्य की स्थिति देखनी चाहिए. यह जांचना जरूरी है कि प्रोजेक्ट में काम किस गति से चल रहा है और निर्माण कार्य नियमित रूप से आगे बढ़ रहा है या नहीं.

6. प्राधिकरण से जुड़ी औपचारिकताओं की करें जांच
उन्होंने कहा कि छठा और बेहद जरूरी बिंदु संबंधित प्राधिकरण से जुड़ी सभी औपचारिकताओं की जांच करना है. खरीदार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बिल्डर ने प्राधिकरण से संबंधित जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की हैं और परियोजना से जुड़ी कोई धोखाधड़ी या गड़बड़ी तो नहीं है.

खरीदारों को जल्दबाजी में नहीं लेना चाहिए फैसला
उन्होंने कहा कि यदि कोई खरीदार इन छह बिंदुओं को ध्यान में रखकर प्रॉपर्टी का चयन करता है और सभी जरूरी दस्तावेजों की सही तरीके से जांच करता है, तो निवेश से जुड़ी परेशानियों और जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

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