Last Updated:
Delhi Gandhinagar Market Ground Report: दिल्ली के गांधीनगर बाजार में एलपीजी गैस की भारी किल्लत और लॉकडाउन की अफवाह से फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं. यहां यूपी -बिहार के मजदूर अपने-अपने घर लौट गए हैं. यहां के बाजार में सन्नाटा है. दुकानदारों का भी धंधा ठप हो गया है. एक मजदूर ने बताया कि वह 3 दिनों तक बिस्किट खाकर बिताया है.
नई दिल्ली: दिल्ली का मशहूर बाजार, जिसे लोग गांधीनगर बाजार कहते हैं. यहां पर आज से 3 महीने पहले कदम रखने लायक भी जगह नहीं होती थी. यहां पर खरीदार से लेकर फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों की भी कमी नहीं थी, लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ कि मार्केट में सन्नाटा पसर गया. फैक्ट्री जहां मजदूरों से भरी रहती थी, वो अब एकदम खाली हो गई है. यूपी-बिहार के मजदूर अपनी दुकान बंद करके वापस गांव लौट गए हैं. पूरे मार्केट में कारीगर और मजदूर नहीं मिल रहे हैं.
यहां पहुंचकर लोकल 18 की टीम ने ग्राउंड रिपोर्ट की तो चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं. सबसे पहले यहां पर चाय की दुकान बीते 25 सालों से लगा रही रेशमा ने बताया कि इस मार्केट के खाली होने की वजह एलपीजी गैस का ना मिलना है. उन्होंने बताया कि एक ओर एलपीजी गैस नहीं मिल रही है. दूसरी ओर यह अफवाह उड़ गई थी कि लॉकडाउन लगने वाला है. इसीलिए यह मार्केट खाली है. क्योंकि यूपी बिहार के जितने भी मजदूर और कारीगर थे. वो अपने गांव लौट गए हैं.
दिल्ली में यहां नहीं मिल रही एलपीजी गैस
रेशमा ने बताया कि वह खुद चाय की दुकान लगाती हैं और अब इस चाय की दुकान को उन्होंने बंद कर दिया है. एक इंडक्शन खरीदा है, जिसकी कीमत भी 7000- 8000 रुपए से कम नहीं है. क्योंकि एलपीजी गैस न मिलने की वजह से इंडक्शन की कीमत बढ़ गई है. उन्होंने बताया कि एजेंसी पर जाती हैं तो एलपीजी गैस लेने तो वहां पर 200 लोगों की लाइन लगी है. एलपीजी गैस 5000 रुपए से लेकर 6000 रुपए में मिल रही है. जबकि उनके पति अमित ने बताया कि धंधा पूरी तरह से चौपट हो चुका है. कोई कमाई नहीं हो रही है. घर का किराया भी नहीं निकल पा रहा है. एक छोटी सी चाय की दुकान थी. जहां पर मजदूर और कारीगर ज्यादा चाय पीते थे. वो सब अपने गांव लौट गए हैं. इस वजह से इंडक्शन पर चाय बनाकर सिर्फ कुछ दुकानदार हैं, उनको ही बेच रहे हैं.
गांव लौट गए मजदूर और कारीगर
गांधीनगर बाजार में पिछले कई सालों से काम कर रहे बृजपाल ने बताया कि इस समय मार्केट में कोई काम नहीं है. क्योंकि जो बड़े-बड़े दुकान के मालिक हैं. वो किसी न किसी डर से नए मजदूर और कारीगर को नहीं ले रहे हैं. उनके अपने पुराने मजदूर और कारीगर गांव चले गए हैं. जहां वह खुद काम करते थे. वहां की फैक्ट्री भी बंद हो गई है. एलपीजी गैस न मिलने की वजह से दो दिन भूखे भी रहना पड़ा है.
वहीं, बगल में खड़े कारीगर सुरेश ने बताया कि एलपीजी गैस न मिलने की वजह से सिर्फ बिस्किट खाकर 3 दिन बिताए हैं. इसके बाद लाइन में लगे तो 25 दिन की वेटिंग चल रही है. 25 दिन बाद ही एलपीजी गैस मिलेगी. वहीं, एक और कारीगर मोहन पाल ने बताया कि गैस एजेंसी पर लंबी लाइन लगी है. गैस नहीं मिल रही है. ब्लैक में गैस को 3000 से लेकर 7000 रुपए तक में बेचा जा रहा है. गरीब लोग कैसे खरीद पाएंगे.
पूरे मार्केट में पसरा सन्नाटा
गांधीनगर बाजार में कई बड़ी फैक्ट्री हैं, जहां पर कपड़ों की रंगाई और पुताई होती है. वो फैक्ट्री भी फिलहाल बंद हो चुकी है. इसके अलावा कारीगर और मजदूर ना होने की वजह से कई शोरूम भी बंद चल रहे हैं और जो छोटी खाने पीने की दुकान होती थी. जहां पर छोले भटूरे कुलचे चाय कॉफी मिलती थी. गैस न मिलने की वजह से वो दुकान भी बंद हो गई हैं. यही वजह है कि मार्केट में धीरे-धीरे सन्नाटा पसरता जा रहा है. दुकानदार भी परेशान हैं. क्योंकि उनको कारीगर और मजदूर नहीं मिल रहे हैं.
About the Author
बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें
