गाजियाबाद में कचरा प्रबंधन का नया दौर… अब 'डिजिटल ट्रैकिंग' से होगी कूड़े की निगरानी, नियम तोड़ा तो खैर नहीं!

Ghaziabad News: शहर को गंदगी और कूड़े के पहाड़ों (लैंडफिल साइट्स) से बचाने के लिए प्रशासन ने अब कमर कस ली है. गाजियाबाद नगर निगम अब कचरे के प्रबंधन के लिए ‘सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एक्ट-2026’ को पूरी सख्ती से लागू करने जा रहा है. इस नए बदलाव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब कूड़े की ‘डिजिटल ट्रैकिंग’ की जाएगी. यानी कचरा कहां से उठा, किस गाड़ी में गया और उसका अंत में क्या हुआ, इसका एक-एक रिकॉर्ड ऑनलाइन मौजूद रहेगा.

डिजिटल पोर्टल रखेगा पाई-पाई का हिसाब
अभी तक शहर में कचरा प्रबंधन की कोई ऐसी सेंट्रलाइज्ड व्यवस्था नहीं थी, जिससे यह पता चल सके कि कितना कचरा प्रोसेस हुआ और कितना फेंक दिया गया. अक्सर निगरानी की कमी के कारण कूड़ा सीधे डंपिंग ग्राउंड तक पहुंच जाता था, जिससे लैंडफिल साइट्स का बोझ बढ़ता जा रहा था.

नए नियमों के तहत एक सेंट्रलाइज्ड ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया जाएगा. इस पोर्टल पर कचरा पैदा होने से लेकर उसके डिस्पोजल (निस्तारण) तक की पूरी जानकारी दर्ज होगी. इससे न केवल नगर निकायों की जवाबदेही तय होगी, बल्कि डेटा को जरूरत पड़ने पर सार्वजनिक भी किया जा सकेगा.

लैंडफिल साइट्स पर अब नहीं जाएगा हर तरह का कूड़ा
सरकार का मुख्य उद्देश्य लैंडफिल साइट्स यानी ‘कूड़े के पहाड़ों’ को खत्म करना है. नए नियमों के मुताबिक, अब लैंडफिल साइट पर सिर्फ वही कूड़ा भेजा जाएगा जिसे न तो रिसाइकिल किया जा सकता है और न ही जिससे ऊर्जा बनाई जा सकती है. यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि कचरे का अधिकतम उपयोग हो सके और पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे.

‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ के लिए कड़े नियम
इस नए एक्ट में सबसे ज्यादा सख्ती बड़ी हाउसिंग सोसायटियों, होटलों, मॉल्स, अस्पतालों और बड़े संस्थानों पर की गई है. इन्हें ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ की श्रेणी में रखा गया है. वे सभी संस्थान जो रोजाना 100 किलो या उससे ज्यादा कचरा निकालते हैं. वे जगहें जिनका क्षेत्रफल 20,000 वर्ग मीटर से अधिक है. इन सभी के लिए अब अपने परिसर का कचरा खुद मैनेज करना अनिवार्य होगा.

अपना कचरा, अपनी जिम्मेदारी: खुद करना होगा निपटान
नए प्रावधानों के अनुसार, अब इन बड़े संस्थानों को अपना गीला कचरा कैंपस के अंदर ही कंपोस्टिंग या बायोगैस जैसे तरीकों से प्रोसेस करना होगा. अगर किसी कारणवश परिसर के अंदर यह संभव नहीं है, तो उन्हें ऐसी अधिकृत एजेंसियों को हायर करना होगा जो नियमों के तहत कूड़े का निस्तारण करती हैं. सिर्फ इतना ही नहीं, संस्थानों को उन एजेंसियों से कचरा निपटान का सर्टिफिकेट भी लेना होगा.

नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश ने बताया कि हम वेस्ट टू एनर्जी पर पहले से काम कर रहे हैं. अब बल्क वेस्ट जनरेटरों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं. सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एक्ट 2026 को शहर में पूरी सख्ती से लागू किया जा रहा है.

जवाबदेही होगी तय, शहरवासियों को मिलेगी राहत
नियमों में पहली बार यह साफ कर दिया गया है कि ‘कचरा पैदा करने वाला ही उसके निपटान के लिए जिम्मेदार होगा’. इस नई व्यवस्था का सीधा मकसद शहरवासियों को गंदगी और बदबू से राहत दिलाना है. डिजिटल ट्रैकिंग से यह भी सुनिश्चित होगा कि कोई भी एजेंसी या कर्मचारी काम में लापरवाही न बरते. आने वाले समय में गाजियाबाद के नागरिकों को एक साफ-सुथरा और आधुनिक कचरा प्रबंधन सिस्टम देखने को मिलेगा.

गाजियाबाद का यह नया मॉडल अगर सफल रहता है, तो यह दूसरे शहरों के लिए भी एक मिसाल बनेगा. तकनीक और जिम्मेदारी के इस मेल से उम्मीद है कि आने वाले सालों में शहर के डंपिंग ग्राउंड्स का बोझ कम होगा और ‘जीरो वेस्ट सिटी’ का सपना सच हो सकेगा.

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