कानपुर में लें बिहार के लिट्‌टी चोखा का टेस्ट, 300 से 400 ग्राहक रोज चखते हैं स्वाद, जानें पता

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कानपुर में लें बिहार के लिट्‌टी चोखा का टेस्ट, सैकड़ों लोग रोज चखते हैं स्वाद

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यादव जी के लिट्‌टी चोखा स्टॉल पर सत्तू वाली बाटी मिलती है. यहां पास में कई बैंक, हॉस्पिटल, आरटीओ और कई ऑफिस होने की वजह से काफी भीड़ लगती है. वैसे तो यहां कई लिट्‌टी चोखा की अस्थायी दुकानें लगती हैं, लेकिन जो भीड़ इनके यहां होती है उतनी कहीं नहीं होती. सुबह 9 बजे शाम 5 बजे तक इनकी दुकान खुली रहती है.

आयुष तिवारी/कानपुर: बिहार के लिट्‌टी चोखा का स्वाद कानपुर में लोगों की जुबान पर चढ़ चुका है. यादव जी के लिट्‌टी चोखा स्टॉल पर सत्तू वाली लिट्‌टी मिलती है. लेकिन खास है इसमें भरे हुए ड्राई फ्रूटस, देशी घी में डूबी हुई गरम-गरम लिट्‌टी और उसके अंदर भरे हुए काजू, बादाम, किशमिश और सत्तू इसका स्वाद बढ़ाते हैं. साथ में मिलने वाला चोखा, हरी चटनी और मसाले वाली हरी मिर्च के साथ जब आप खायेंगे तो वाह वाह कहें बिना नहीं रह पाएंगे.

जी हम बात कर रहे हैं सर्वोदय नगर में आरटीओ दफ्तर के बाहर ठेले पर लगने वाले ‘यादव जी चोखा’ की. दुकान मालिक संतोष बताते है कि मेरे पिता हरिनाथ यादव ने 1999 में दुकान खोली थी तब से लगातार दुकान लग रही है. शहर के हर एक कोने से ग्राहक हमारी दुकान पर लिट्‌टी चोखा का स्वाद लेने के लिए आते हैं. उनकी डिमांड पर गरमा गरम ड्राई फ्रूट्स वाली लिट्‌टी भी बनाई जाती है. ड्राई फ्रूट वाली लिट्‌टी 80 रुपए प्लेट में देते हैं. सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक दुकान खुलती है. इस बीच तकरीबन 350 से 400 ग्राहक प्रतिदिन यहां आ जाते हैं.

ये है यहां की खासियत
दुकान मालिक बताते है कि पिता जी ने कब दुकान खोली थी उस वक्त पांच रुपये में मिलने वाली ये लिट्‌टी आज 30 रुपये की हो गई है. वह बताते हैं कि लिट्‌टी के लिए सत्तू किसी दुकान से लेने की बजाय वो खुद तैयार करते हैं. चोखे में बैगन, आलू, टमाटर के अलावा खास तरह का मसाला भी डालते हैं जो इसे दूसरों से अलग करता है.

24 साल से लगा रहे ठेला
कानपुर के यादव जी की लिट्‌टी चोखा के आगे बिहार के लिट्टी चोखा का स्वाद भी आपको फीका सा लग सकता है. देशी घी में डूबी सत्तू भरी लिट्‌टी के साथ खास मसाले से तैयार चोखा लोगो की जुबान का स्वाद को दोगुना कर देता है. यहां पर कई बैंक, हॉस्पिटल, आरटीओ और कई ऑफिस होने की वजह से यहां काफी भीड़ लगती है. यूं तो यहां कई लिट्‌टी चोखा की अस्थायी दुकानें लगती है लेकिन जो भीड़ इनके यहां होती है, उतनी कहीं नहीं. सुबह 9 बजे शाम 5 बजे तक इनकी दुकान लगती है.

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