क्रीमी और पीले गूदा वाली आलू, किसानों के लिए मालामाल करने वाली किस्म, जानें इसका अनोखा नाम

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क्रीमी और पीले गूदा वाली आलू, किसानों के लिए मालामाल करने वाली किस्म

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Ajab Gajab Potato: अभी तक आलू को लोग सेहत के लिए हानिकारक मानते थे. क्योंकि इसके अंदर उच्च स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट होता है, लेकिन देश में पहली बार कई अनोखी किस्म की आलू विकसित की गई. इस आलू की खासियत यह है कि इनका गूदा रंगीन है और ये एंटीऑक्सीडेंट के साथ ही कई तरह के विटामिन से भरपूर सुपर फूड हैं, जिसे खाने से न सिर्फ आपको अच्छी सेहत मिलेगी, बल्कि देश के किसानों की किस्मत भी खुल जाएगी.

यह आलू कम क्षेत्र में ज्यादा उत्पादन देगी और किसानों को मालामाल कर देगी. इस रंगीन गूदा वाली आलू को केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान मेरठ ने विकसित किया है. जहां दिल्ली के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में लेकर केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के मुख्य तकनीकी अधिकारी डॉ. अशोक कुमार चौहान पहुंचे हैं. बता दें कि इस अनोखी आलू को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है. विशेषज्ञ भी इसे देखकर हैरान हैं.

केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के मुख्य तकनीकी अधिकारी डॉ. अशोक कुमार चौहान ने बताया कि देश में पहली बार ऐसी आलू उनके संस्थान द्वारा विकसित की गई है. इस आलू का गूदा रंगीन है. बायो-फोर्टिफाइड आलू में इसका नाम कुफरी जामुनिया रखा गया है. उन्होंने बताया कि यह एक बार में ज्यादा उत्पादन देगी. इसकी अवधि 100 दिन की है. भारत के उत्तरी मैदानी इलाकों के लिए इसे विकसित किया गया है. इसका गूदा बैगनी रंग का है. इसमें विटामिन-सी भरपूर मात्रा में उपलब्ध है और तो और इसके अंदर एंथोसायनिन जोकि कैंसर, मधुमेह और उम्र बढ़ने के प्रभावों को कम करते हैं, वो तक ज्यादा मात्रा में मौजूद है.

यही नहीं, इसके अंदर कैरोटीनॉयड भी मौजूद है. उन्होंने बताया कि देश की यह पहली आलू है. जो लोगों की सेहत का ख्याल रखेगी, जिसका स्वाद भी बेहद अनोखा और स्वादिष्ट है. किसान अगर इसे अपने खेतों में लगाएंगे तो उन्हें ज्यादा उत्पादन मिलेगा और यह मार्केट में उपलब्ध आलू से 5 से 10 रुपए ज्यादा बिकेगी. इसकी अन्य आलू से खासियत भी अलग है.

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डॉ. अशोक कुमार चौहान ने बताया कि एक और आलू विकसित की गई है, जिसका नाम कुफरी नीलकंठ है. यह आलू पूरी तरह से एंटीऑक्सीडेंट है. जो लोगों को जवान बनाए रखने में काफी मदद करेगी. इसके अलावा कुफरी लोहित जिसका गूदा क्रीमी है. इसे पूर्वी और मध्य क्षेत्र के लिए विकसित किया गया है. कुफरी रतन जिसका गूदा पीला है यह उत्तरी मैदानी इलाकों के लिए विकसित की गई है.

बता दें कि कुफरी नीलकंठ आलू की जो कि मैदानी क्षेत्रों में आसानी से उग सकती है. इसका गूदा पीला होगा. इसके अलावा कुफरी भास्कर भी विकसित की गई है, जिसका गूदा क्रीमी है. कुफरी मोहन उत्तरी पूर्वी मैदानी लाखों के लिए विकसित की गई है, जिसका गूदा सफेद है. कुफरी सूर्या, कुफरी बाहर जैसी कई और आलू भी विकसित की गई है. कुफरी फ्राई सोना खास तौर पर चिप्स, पापड़ और फ्रेंच फ्राइज के लिए विकसित की गई है.

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