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एक दौर था जब हिंदी सिनेमा में अमिताभ बच्चन, मिथुन चक्रवर्ती और राजेश खन्ना जैसे सितारों का दबदबा था. 80 के दशक में बॉक्स ऑफिस पर इन दिग्गजों का राज चलता था. लेकिन साल 1985 में एक नया नवेला एक्टर इन पर भारी पड़ा था.
नई दिल्ली. 70-80 के दशक में मिथुन चक्रवर्ती, धर्मेंद्र, राजेश खन्ना और अनिल कपूर जैसे दिग्गजों की फिल्में रिलीज हुई थी. लेकिन इसी साल एक ऐसे एक्टर ने डेब्यू किया, जिसने अपनी फिल्म से ही बॉक्स ऑफिस को हिलाकर रख दिया था.(तस्वीर बनाने में AI की मदद लगी गई है.)
वो एक्टर हैं, राज कपूर के बेटे राजीव कपूर. साल 1985 में उनकी फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ रिलीज हुई थी. इस फिल्म को उनके पिता ने ही डायरेक्ट किया था. फिल्म में उनके अपोजिट मंदाकिनी ने डेब्यू किया था.
1985 में सिनेमाघरों में जब इस फिल्म ने दस्तक दी तो, लोगों को थिएटर तक आने के लिए मजबूर कर दिया था. फिल्म में कई ऐसे सीन थे, जिन्हें देखकर दर्शकों के आंखें फटी रह गई थीं.मंदाकिनी तो इसी फिल्म से रातोंरात स्टार बन गई. लेकिन हीरो का करियर ठप हो गया था.
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राजीव ने तो डेब्यू करते ही अपनी पहली फिल्म से उस दौर के सुपरस्टार का स्टारडम ही हिला दिया था. बाद में भले ही लोग उन्हें फ्लॉप एक्टर कहने लगे. लेकिन उस समय उनकी फिल्म के आगे बड़े सितारों की फिल्मों को कड़ी टक्कर मिली थी.
राज कपूर के बेटे और कपूर खानदान से ताल्लुक रखने वाले राजीव कपूर ने बड़े बैनर और मजबूत बैकग्राउंड के साथ इंडस्ट्री में कदम रखा था. लेकिन उनका करियर उतना लंबा और सफल नहीं रहा, जितनी उनसे उम्मीद की जा रही थी. इसके बावजूद, उन्होंने अपने करियर में एक ऐसा मुकाम जरूर हासिल किया, जिसने उन्हें हमेशा के लिए यादगार बना दिया.
साल 1985 इसी फिल्म के साथ मिथुन चक्रवर्ती की ‘प्यार झुकता नहीं’, अमिताभ की ‘मर्द’ और राजेश खन्ना की ‘हम दोनों’ जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा दी थी. इनमें ‘अनिल कपूर की ‘मेरी जंग’ भी थी,जो जबरदस्त हिट रही. लेकिन राजीव कपूर की फिल्म नंबर 1 पर रही.
मंदाकिनी और राजीव कपूर की फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ बॉक्स ऑफिस पर सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. इस फिल्म ने राजीव कपूर और मंदाकिनी को ताउम्र पहचान दी. यही दोनों के करियर की पहली और आखिरी ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी.
पद्मिनी कोल्हापुरे, राज कपूर की फेवरेट एक्ट्रेस रही हैं, वह तो इस फिल्म में भी पद्मिनी को ही कास्ट करना चाहते थे. लेकिन बात नहीं बनी. बाद में जब साल 1982 में फिल्म प्रेम रोग बना रहे तो राजीव कपूर इसमें असिस्टेंट-डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे.इस दौरान उनकी पद्मिनी कोल्हापुरे से नजदीकियां बढ़ने लगीं. कई मैगजीन में भी ये बात छपी, लेकिन राज कपूर की वजह से ये कहानी आगे नहीं बढ़ पाई.
