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Anand Bakhshi Mohammed Rafi Lata Mangeshkar Rare Song : गीतकार आनंद बख्शी ने अपने करियर में कई यादगार गाने लिखे. बहुत कम लोग जानते होंगे कि आनंद बख्शी सिंगर बनने का सपना लेकर मुंबई आए थे. उन्होंने कुछ फिल्मों में गाने भी गाए हैं. 70 के दशक में धर्मेंद्र-हेमा मालिनी की एक एक्शन थ्रिलर फिल्म आई थी. इसका म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने कंपोज किया था. आनंद बख्शी ने इस फिल्म में मोहम्मद रफी-लता मंगेशकर के साथ एक गाना गाया था. गाने की शुरुआत आनंद बख्शी ने ही की थी. गाना ब्लॉकबस्टर साबित हुआ. फिल्म ने शानदार कमाई की. प्रोड्यूसर ने इतने रुपये कमाए कि इनकम टैक्स को लाखों का जुर्माना पड़ा था. यह फिल्म कौन सी थी, वो ब्लॉकबस्टर गाना कौन सा था, आइये जानते हैं…….
वैसे तो आनंद बख्शी फिल्मों में गीत ही लिखते थे लेकिन वो गाने गुनागुनाते हुए लिखा करते थे. म्यूजिक की उन्हें बहुत अच्छी समझ थी. कुछ फिल्मों में उन्होंने गाने भी गाए हैं. 1976 में आई धर्मेंद्र-हेमा मालिनी स्टारर फिल्म ‘चरस’ में मोहम्मद रफी-लता मंगेशकर के साथ उन्होंने एक गाना रिकॉर्ड करवाया था. यह गाना आज भी दिल को तड़पा देता है. चरस फिल्म में कुल 6 गाने थे. इस इस फिल्म का सबसे पॉप्युलर गाना ‘कि आजा तेरी याद आई’ था जिसे मुख्य रूप से लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी ने गाया था. इस गाने का शुरुआती मुखड़ा आनंद बख्शी ने गाया था जिसे सुनकर दिल रोमांचित हो जाता है.
फिल्म के दो गाने असाधरण थे. ये गाने थे : कल की हसीन मुलाकात के लिए, हम तुम जुदा हो जाते हैं, अच्छा चलो सो जाते हैं और ‘आ जा तेरी याद आई. यह गाना फिल्म की बैकबोन था. गानों का प्लेसमेंट लाजवाब था. आनंद बख्शी ने ‘मोम की गुड़िया’ में दो गाने गाए थे. फिल्म नहीं चली थी. उनके दिमाग में यह बात बैठ गई थी कि उनका गाना अनलकी रहा. चरस के लिए जब गाने का शुरुआती हिस्सा लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने उनसे रिकॉर्ड करवाया तो उन्होंने रामानंद सागर से कहा था कि मेरे वाले हिस्से पर धार्मिक चीजें दिखा देना ताकि निगेटिविटी खत्म हो जाए. इसलिए गाने की शुरुआत में मदर मेरी और जीसस के शॉट्स लगाए गए थे.
‘चरस’ फिल्म का निर्देशन-प्रोडक्शन रामानंद सागर ने किया था. 1972 में युगांडा से एशियाई देश के रहवासियों को निकाला जा रहा था. इस बात को चरस की कहानी का आधार बनाया गया. फिल्म में अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, अजित, अमजद खान, सुजीत कुमार, अरुणा ईरानी, असरानी और टॉम अल्टर जैसे सितारे थे. टॉम अल्टर की यह पहली फिल्म थी. डायलॉग वेद राही ने लिखे थे. स्क्रीनप्ले मोती सागर ने लिखे थे. फिल्म के लेखक-निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर थे.
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रामानंद सागर के बेटे प्रेम सागर ने एक बुक ‘एन एपिक लाइफ रामानंद सागर, फ्रॉम बरसात टू रामायण’ लिखी है. चरस के सिनेमेटोग्राफर प्रेम सागर ही थे. उन्होंने किताब में लिखा है कि जब फिल्म बन रही थी तो धर्मेंद्र-हेमा मालिनी का रोमांस पीक पर था. फिल्म के प्रमोशन में ‘हॉटेस्ट रोमांस ऑफ द ईयर’ शब्द यूज किया गया था. फिल्म की शूटिंग यूरोप के कई देशों जैसे इटली, स्विस, फ्रांस और माल्टा में की गई थी. धर्मेंद्र-हेमा मालिनी और रामानंद सागर माल्टा के हिल्टन होटल में रुके थे. प्रेम सागर-आनंद सागर दिनभर शूटिंग करते थे और रात को कलाकारों के कपड़ों में इस्त्री किया करते थे.
शूटिंग पर हेमा मालिनी के पिता भी साथ में गए थे. धर्मेंद्र के सेक्रेटरी दीनानाथ उन्हें दिनभर बिजी रखा करते थे. कभी-कभी तो रात को भी. एक बार तो उन्हें कैसिनो दिखाने ले गए और जानबूझकर वोट मिस कर दी. ऐसे में धर्मेंद्र-हेमा मालिनी को वक्त बिताने का मौका मिल गया. फिल्म का क्लाइमैक्स नटराज स्टूडियो में शूट किया गया था. अमजद खान को रामानंद सागर ने एक टैलेंट कॉन्टेस्ट से सिलेक्ट किया था. शोले पहले रिलीज हो गई और अमजद खान रातोंरात पॉप्युलर हो गए.
अमजद खान की पॉप्युलैरिटी का फायदा रामानंद सागर को भी मिला. डिस्ट्रीब्यूटर्स उनकी फिल्म महंगे दामों में खरीदने के लिए तैयार थे. ऐसे में रामानंद सागर ने फिल्म में उनका रोल और बढ़ा दिया था. फिल्म रिलीज होने से पहले सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से रामानंद सागर को खूब परेशान किया गया. प्रेम सागर के मुताबिक, ऐसा लग रहा था जैसे सरकार में शामिल किसी शख्स का ‘शोले’ में हिस्सा था. फिल्म के कई सीन काट लिए गए. इमरजेंसी का पीरियड था. ऐसे में रातोंरात धर्मेंद्र के पोस्टर बदले गए.
रामानंद सागर ने फिल्म्स के एक्शन सीन फिर से काट-छांट दिए. नाजुक हालात में रामानंद सागर दिल्ली गए. तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री विद्याचरण शुक्ला को फिल्म दिखाई. फिल्म रिलीज होने में एक हफ्ता बचा था तभी दिल्ली से एक बार फिर से रामानंद सागर के पास फोन आया कि वीसी शुक्ला फिल्म की रिलीज से एक दिन पहले मूवी देखेंगे. मूवी को बैन करने की पूरी तैयारी थी लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. जिस दिन वीसी शुक्ला को मुंबई आना था, उसी दिन 27 मई 1976 को तूफानी बारिश के चलते दिल्ली-मुंबई के बीच सभी फ्लाइट कैंसिल हो गईं. वीसी शुक्ला जेनोवा चले गए.
फिल्म कामयाब रही. ट्रेड जनरल के मुताबिक, फिल्म का बजट 1.45 करोड़ था और मूवी ने 1.8 करोड़ रुपये की कमाई की थी. फिल्म हिट रही थी. हकीकत यह थी कि फिल्म से इससे कहीं ज्यादा कमाई हुई थी. यह मामला 2017 में सामने आया था. सागर परिवार पर इनकम टैक्स की चोरी का आरोप लगा. परिवार को 6 लाख का जुर्माना भरना पड़ा था. दरअसल, रामानंद सागर को जो पैसा डिस्ट्रीब्यूटर्स से मिला था, वो उन्होंने अपने दस्तावेज में नहीं दिखाया था. कहते हैं रामानंद सागर ने ऐसा इसलिए किया था क्योंकि उन्हें इस फिल्म के बाद ‘ललकार’ और ‘जलते बदन’ फिल्म में हुए घाटे को रिकवर करना था.
