अगर आपका MMS लीक हो जाए तो क्या करना चाहिए? पैनिक होने से अच्छा है सॉल्यूशन जान लें

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अगर MMS लीक हो जाए तो क्या करना चाहिए? पैनिक होने से अच्छा है सॉल्यूशन जान लें

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MMS Leak Hone Par Kya Karein: साइबर युग में आपका एमएमएस कब और कहां से लीक हो जाए, कोई नहीं जानता है. यदि आपके साथ भी ऐसा हो जाए, तो किसी सख्‍त कदम उठाने की बजाय यह सॉल्‍यूशन जान लें. यह सॉल्‍यूशन आपकी जिंदगी में आई इस आफत से आपको निजात दिला सकता है.

एमएमएस लीक होने के बाद आपको कौन बचा सकता है?

What to Do If MMS Gets Leaked: आज की डिजिटल दुनिया में कब, कहां और किसका एमएमएस बन जाए, इस बात का बिल्‍कुल भी भरोसा नहीं है. यह एमएमएस मॉल के चेंजिंग रूम, हॉस्‍टल के बाथरूम, मूवी हॉल कहीं भी बन सकता है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने के बाद तो साइबर क्रिमिनल्‍स को सिर्फ आपका फोटो चाहिए. वे बॉडी स्‍वैपिंग के जरिए 10 मिनट में आपका पूरा एमएमएस तैयार कर देंगे. आपको जबतक इस एमएमएस के बारे में पता चलेगा, तब तक ना जाने कितने लोग देख चुके होंगे.

ऐसे माहौल में, यह सवाल और इसका जवाब जानना आपके लिए भी बेहद जरूरी हो गया है. सवाल यह कि अगर मेरा एमएमएस लीक हो जाए, तो मुझे क्‍या करना चाहिए? जवाब जानने से पहले आपके लिए यह जानना भी जरूरी है कि सिर्फ 2024 में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) में इस तरह की करीब 19.18 लाख शिकायतें दर्ज की गईं थी. इस एमएमएस लीक की वजह से करीब 22,812 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. सबसे खतरनाक यह कि ज्‍यादातर मामलों में लीक की वजह अपने ही थे.

जान लीजिए किन वजहों से लीक होते हैं एमएमएस लीक

  1. फिशिंग और हैकिंग: साइबर क्रिमिनल फिशिंग के जरिए बिल्‍कुल असली जैसे दिखने वाली एक फर्जी ई-मेल, एसएमएस या वेबसाइट बनाते हैं. जैसे ही आप उसके भेजे गए लिंग पर क्लिक करते हैं या वेबसाइट में लॉगिन डिटेल भरते हैं, आपकी पूरी डिटेल क्रिमिनल्‍स के पास पहुंचा जाती है. इस डिटेल की मदद से वह मोबाइल डिवाइस और क्‍लाउड अकाउंट तक पहुंच जाते हैं. वहां मौजूद ऐसी फोटो और वीडियो, जो आपकी निजी जिंदगी से जुड़ी हैं, आपको एमएमएस लीक वाली परेशानी में डाल सकते हैं.
  2. मोबाइल का ऑटो मोड: आप अपने मोबाइल की गैलरी को गूगल ड्राइव, आईक्‍वालउड और वन ड्राइव जैसे क्‍लाउड को लिंक कर देंते हैं. ऐसे में, आपकी मोबाइल गैलरी में मौजूद सभी निजी तस्‍वीरों और वीडियो का बैकअप क्‍लाउड में चला जाता है. साइबर क्रिमिनल आपके कमजोर पासवर्ड का फायदा उठाकर क्‍लाउड एकाउंट तक आसानी से पहुंच जाते हैं. बीते कुछ सालों में दुनियाभर में कई क्लाउड स्टोरेज डेटा लीक चुके हैं. इन घटनाओं के बाद सेलिब्रिटी से लेकर आम लोगों तक की निजी तस्‍वीरें एमएमएस लीक बन गईं थीं.
  3. हर ऐप्‍स पर भरोसा: हम अक्सर फ्री गेम्स, फोटो एडिटर, बैटरी सेवर या कॉल रिकॉर्डर के नाम पर मौजूद थर्ड पार्टी ऐप्स को अपने फोन के कैमरा, माइक्रोफोन, गैलरी और कॉन्टैक्ट्स का एक्‍सेस दे देते हैं. हम यह भी नहीं सोचते कि ये ऐप्स उस डेटा का क्या करेंगे. कई मैलेशियस ऐप्स आपकी निजी फाइलें चुराकर सर्वर पर भेज देते हैं. इसके बाद, आपकी तस्‍वीरों और वीडियो को डार्क वेब पर बेचा जाता है. इसके बाद एमएमएस लीक और ब्‍लैकमेलिंक का गंदा खेल शुरू हो जाता है.
  4. आपनों से मिला धोखा: कई बार अपने करीबी रिश्तों ही धोखा दे जाते हैं. ब्रेकअप के बाद बदला लेने के लिए कई बार प्रेमी या प्रेमिका निजी वीडियो या तस्वीरों को लीक कर देते हैं. एक स्‍टडी में पाया गया कि 28 फीसदी मामलों में एक्‍स बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड ने ब्रेकअप के बाद धमकाने के लिए अश्लील तस्वीरों का इस्‍तेमाल किया. वहीं 17 फीसदी मामलों में बदला लेने के इरादे से अश्‍लील तस्‍वीरों को वायरल कर दिया गया. एक्‍सपर्ट के अनुसार, डिजिटल डेटिंग के इस दौर में किसी को भी अपनी निजी तस्वीरें भेजने से पहले दस बार सोच लें.
  5. मोर्फिंग-डीपफेक टेक्‍नोलॉजी: यह टेक्‍नोलॉजी आज की तारीख में सबसे खतरनाक है. इस टेक्‍नोलॉजी का इस्‍तेमाल करने वाले क्रिमिनल्‍स के पास आपकी कोई निजी तस्‍वीर या वीडियो होना भी जरूरी नहीं है. अक्‍सर साइबर क्रिमिनल सोशल मीडिया से तस्वीरें चुराकर उन्हें मोर्फ कर देते हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने के बाद अब डीपफेक वीडियो बनाना भी बेहद आसान हो गया है. डीपफेक तकनीक से किसी भी शख्‍स के चेहरे को किसी अश्लील वीडियो पर लगाया जा सकता है और वह वीडियो बिल्‍कुल रियल जैसा ही दिखता है.

एमएमएस लीक होने से कैसे बचें?

  1. डिवाइस सेफ्टी: साइबर एक्‍सपर्ट्स के अनुसार, आपका मोबाइल फोन प्राइवेसी को पब्लिक करने की सबसे बड़ी वजह है. ऐसे में अपने डिवाइस में स्‍ट्रांग पासवर्ड या पिन लगाए. पासवर्ड के लिए कभी भी 0000, 1234 या डेट ऑफ बर्थ जैसे आसान पासवर्ड का न करें. फिंगरप्रिंट या फेस अनलॉक जैसे बायोमेट्रिक लॉक ही इस्‍तेमाल करें. इसके अलावा, अपने सभी ऑनलाइन अकाउंट्स में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन से प्रोटेक्‍ट करें. इससे अगर कोई आपका पासवर्ड चुरा भी लेता है, तो भी वह आपके अकाउंट में लॉगिन नहीं कर पाएगा.
  2. प्राइवेट फोटो और वीडियो: संभव हो तो आप अपने फोन में किसी भी प्रकार की पर्सनल या अंतरंग फोटो और वीडियो सेव करके न रखें. यदि जरूरी हो तो आपको कभी भी गैलरी ऐप में नहीं रखें. इन वीडियो और तस्‍वीरों को सेव करने के लिए पासवर्ड-प्रोटेक्टेड फोल्डर या एन्क्रिप्टेड ऐप का ही इस्‍तेमाल करें. ऐप्स फाइलों को एन्क्रिप्ट करके रखना चालिए, जिसे बिना पासवर्ड के कोई देख ना सके. साथ ही, इन निजी फाइलों को क्लाउड स्टोरेज पर अपलोड करने से हमेशा बचना चाहिए. अगर क्लाउड बैकअप जरूरी है, तो फाइल को एन्क्रिप्ट करके ही अपलोड करें.
  3. सोशल मीडिया पर रहे सकर्त: सोशल मीडिया पर आप जितनी अधिक डिटेल्‍स और तस्वीरें पब्लिक करेंगे, जोखिम उतना ही बड़ा होगा. इसलिए अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स की प्राइवेसी सेटिंग्स को बेहद स्‍ट्रांग रखें. अपनी प्रोफाइल को प्राइवेट रखें, ताकि केवल आपके फॉलोअर्स या दोस्त ही आपकी तस्वीरें देख सकें. अपनी पोस्ट पर टैगिंग की परमिशन को ‘अप्रूवल रिक्वायर्ड’ पर सेट कर दें, ताकि कोई आपकी फोटो बिना आपकी इजाजत के टैग न कर सके. किसी अनजान व्यक्ति से चैट करते समय बेहद सावधानी रखें.
  4. फॉलो करें साइबर सेफ्टी रूल्‍स: साइबर सेफ्टी के कुछ बुनियादी नियम हैं, जिन्हें अपनाकर आप काफी हद तक सुरक्षित रह सकते हैं. पहला – किसी भी स्पैम या फ्रॉड एसएमएस को ‘7726’ नंबर पर फॉरवर्ड करें. दूसरा – विदेश से आने वाली ऐसी स्पूफ कॉल्स जो भारतीय नंबर दिखाती हैं, उनसे भी अलर्ट रहें. तीसरा – कभी भी किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, चाहे वह एसएमएस में आया हो, ईमेल में हो, या सोशल मीडिया मैसेज में. ये लिंक फिशिंग वेबसाइट पर ले जा सकते हैं. चौथा – रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, कैफे पर सार्वजनिक वाई-फाई का इस्‍तेमाल करते समय कोई बैंकिंग या निजी काम न करें.
  5. सेक्स्टिंग का सही इस्तेमाल: डिजिटल डेटिंग और रिश्तों के इस दौर में सेक्स्टिंग यानी अंतरंग तस्वीरें या मैसेज शेयर करना आम बात हो गई है. एक बार जब आप किसी को अपनी निजी तस्वीर भेज देते हैं, तो वह पूरी तरह से उस शख्‍स के भरोसे पर निर्भर होती है. रिश्ता खत्म होने पर वही तस्वीर आपके खिलाफ एमएमएस लीक बन सकती है. अगर फिर भी आप भेजना चाहते हैं, तो सुनिश्चित करें कि तस्वीर में आपका चेहरा दिखाई न दे, और ऐसे किसी भी निशान या पहचान से बचें जिससे आपकी पहचान हो सके. कभी भी किसी ऐसे व्यक्ति पर भरोसा न करें जिससे आपने असल जिंदगी में न मिला हो.

यदि आपका एमएमएस लीक हो जाए, तो तुरंत उठाएं ये 7 कदम

  1. भावनात्मक तौर पर मजबूत रहें: जब आपको पता चलता है कि आपका निजी वीडियो या तस्वीर लीक हो गई है, तो सबसे पहला एहसास शर्म, डर और गुस्से का होता है. ऐसी स्थिति में आप शांत रहें और घबराएं नहीं. इस समय सबसे पहले किसी ऐसे विश्वसनीय व्यक्ति से बात करें जिस पर आपको पूरा भरोसा हो. चाहे वह परिवार का सदस्य हो, या फिर कोई करीबी दोस्‍तो हो. ऐसे समय में अकेले रहने और मौन रहने से बचें. यदि आपको लगता है कि आप मानसिक रूप से बहुत परेशान हैं, तो किसी काउंसलर से मिलने में संकोच न करें.
  2. सबूत इकट्ठा करें: जैसे ही पता चले कि आपका एमएमएस लीक हो गया है, तुरंत उस कंटेंट के स्क्रीनशॉट लें. स्क्रीनशॉट में तारीख और समय दिखना चाहिए. उन सभी लिंक्स और यूआरएल को सेव कर लें, जहां आपका कंटेंट अपलोड या शेयर किया गया है. यदि किसी ने ब्लैकमेल किया है, तो उन मैसेजेस के स्क्रीनशॉट भी ले लें. ऐसे कॉल की रिकॉर्डिंग करने की कोशिश करें. एक बात का ध्यान रखें कि कुछ भी डिलीट न करें. लोग अक्सर शर्म के मारे या डर के कारण कंटेंट डिलीट कर देते हैं, लेकिन ऐसा न करें.
  3. साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत: आप राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) https://cybercrime.gov.in पर आप ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं. इस पोर्टल की सबसे अच्छी बात यह है कि आप गुमनाम तौर पर भी शिकायत दे सकते हैं. आपको अपना नाम बताने की जरूरत नहीं है. पोर्टल पर ‘महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध’ की एक स्‍पेशल कैटेगरी है, जहां आपकी शिकायत को प्राथमिकता दी जाती है. इसके अलावा, आप नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल भी कर सकते हैं. शिकायत दर्ज करते समय अपने पास मौजूद सभी सबूत अपलोड करना न भूलें. पुलिस आपकी शिकायत मिलने के बाद उस प्लेटफॉर्म को टेकडाउन नोटिस भेजेगी ताकि कंटेंट हटाया जा सके.
  4. एफआईआर या ई-एफआईआर दर्ज कराएं: ऑनलाइन शिकायत के बाद आप अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में एफआईआर भी दर्ज कराएं. अगर आप पुलिस स्टेशन जाने में सहज महसूस नहीं करते हैं, तो आप ई-एफआईआर का विकल्प भी चुन सकते हैं. कई राज्यों की पुलिस ने ई-एफआईआर की सुविधा दे रखी है. एफआईआर दर्ज कराते समय अपने साथ सभी सबूत ले जाएं. अगर पुलिस आपकी एफआईआर दर्ज करने से मना करती है, तो आप उच्च पुलिस अधिकारी, एसपी, या मजिस्ट्रेट से संपर्क कर सकते हैं.
  5. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को रिपोर्ट करें: हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के पास अश्लील या बिना सहमति के शेयर किए गए निजी कंटेंट को हटाने की एक प्रक्रिया होती है. सबसे पहले, जिस प्लेटफॉर्म पर आपका कंटेंट अपलोड है, वहां जाकर ‘रिपोर्ट’ बटन पर क्लिक करें. साथ ही बताए कि ये मेरी निजी तस्वीर है और मेरी सहमति के बिना शेयर की गई हैं. ज्यादातर प्लेटफॉर्म 24 से 48 घंटे के भीतर कंटेंट की समीक्षा करके उसे हटा देते हैं. अगर प्लेटफॉर्म कार्रवाई नहीं करता है, तो आप उस कंपनी के ग्रिवांस ऑफिसर से ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं.

क्या मैं गुमनाम रूप से साइबर क्राइम की शिकायत कर सकता हूं?
हां, आप गुमनाम रूप से साइबर क्राइम की शिकायत कर सकते हैं. राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (https://cybercrime.gov.in) पर ‘गुमनाम शिकायत’ का विकल्प मौजूद है. इसका मतलब है कि आपको अपना नाम, पता, या कोई अन्य पहचान संबंधी जानकारी देने की आवश्यकता नहीं है. यह सुविधा खासतौर पर उन पीड़ितों के लिए बनाई गई है जो अपनी पहचान उजागर करने से डरते हैं या जिन्हें सामाजिक अपमान का डर होता है. गुमनाम शिकायत दर्ज करने के लिए आपको बस इतना करना है कि पोर्टल पर ‘रिपोर्ट अदर साइबर क्राइम’ के ऑप्शन में जाकर ‘गुमनाम’ का चयन करें. फिर आप घटना का विवरण, लिंक, स्क्रीनशॉट आदि अपलोड कर सकते हैं. ध्यान रखें कि गुमनाम शिकायत में पुलिस आपसे संपर्क नहीं कर सकती, क्योंकि उनके पास आपकी जानकारी नहीं होती.

अगर पुलिस एफआईआर दर्ज करने से मना करे तो क्या करें?
पुलिस का एफआईआर दर्ज करने से मना करना कानूनन गलत है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, यदि किसी संज्ञेय अपराध की जानकारी मिलने पर पुलिस बिना किसी देरी के एफआईआर दर्ज करने के लिए बाध्य है. एमएमएस लीक का मामला IT अधिनियम की धारा 66E और 67A के तहत संज्ञेय अपराध है. अगर पुलिस एफआईआर दर्ज करने से मना करती है, तो आप वरिष्‍ठ अधिकारियों से मिलकर शिकायत करें. इसके अलावा आपके पास नजदीकी मजिस्ट्रेट या सेशन जज के पास शिकायत दर्ज कराने का विकल्‍प भी मौजूद है.

क्या डीपफेक या मोर्फिंग के मामले में क्‍या कानूनी कार्रवाई होती है?
डीपफेक या मोर्फिंग के मामलों में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 66E (प्राइवेसी उल्लंघन) और धारा 67A (यौन स्पष्ट सामग्री) मोर्फिंग के तहत कार्रवाई होती है. इसके अलावा, भारतीय न्‍याय संहिता के तहत मानहानि और महिला की मर्यादा भंग की धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है. हाल ही में सरकार ने डीपफेक के खिलाफ सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं. मोर्फिंग के मामले में सबूत थोड़े मुश्किल होते हैं, लेकिन साइबर फोरेंसिक की मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि वीडियो या फोटो एडिटेड है.

क्या लीक होने के बाद मुझे अपना फोन नंबर या सोशल मीडिया अकाउंट बदल लेना चाहिए?
तुरंत नहीं, क्योंकि आपको सबूत और शिकायत के लिए पुराने नंबर की जरूरत पड़ेगी. पहले सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करें, फिर चाहें तो नंबर बदल सकते हैं. हां, सोशल मीडिया अकाउंट के पासवर्ड जरूर बदल लें.

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें

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