आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका लगा है. आप के सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी से बगावत करते हुए खुद को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में विलय करने का ऐलान कर दिया है. इस बगावत की अगुवाई राघव चड्ढा ने किया. इस घटनाक्रम ने न सिर्फ आप की संसदीय ताकत को कमजोर किया है, बल्कि पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को भी उजागर कर दिया है.
राघव चड्ढा सहित 7 राज्यसभा सांसदों की बगावत के बाद आम आदमी पार्टी में हलचल बढ़ती दिख रही है. पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. बलबीर सिंह शनिवार सुबह पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया से मुलाकात उनके दिल्ली स्थित आवास पर पहुंचे है. उधर पार्टी सांसदों की इस बगावत पर आप की पंजाब इकाई ने प्रहार किया है. पार्टी के फेसबुक पेज पर लिखा, ‘पंजाब के गद्दार कड़ी सज़ा के हकदार हैं… पंजाब उन्हें करारा जवाब देगा.’
‘कोई भूचाल, कोई बगावत नहीं…’
मनीष सिसोदिया से मुलाकात के बाद बलवीर सिंह ने कहा, ‘कोई भूचाल कोई बगावत नहीं है. इन लोगों ने पार्टी के साथ विश्वासघात किया है. पंजाब में भगवंत मान के नेतृत्व में अच्छा काम हो रहा है और मेहनत से काम करेंगे. मर्जर कैसे होगा पार्टी के नेता नहीं गए, विधायक यहीं हैं.’ वहीं अपनी मुलाकात पर उन्होंने कहा, ‘मनीष सिसोदिया से मिलता रहता हूं. वे अनुभवी मेंटर हैं.’
संजय राउत ने बीजेपी को बताया बकासुर
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है. राउत ने बीजेपी को ‘बकासुर की पार्टी’ करार देते हुए देश की मौजूदा स्थिति पर भी कड़ी टिप्पणी की. उन्होंने यह भी कहा कि डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत को लेकर दिया गया ‘नरक’ वाला बयान गलत नहीं है.
राउत ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की नीतियों ने देश की स्थिति को खराब कर दिया है और आम जनता कई समस्याओं से जूझ रही है. उनके मुताबिक, महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक तनाव जैसे मुद्दों ने लोगों का जीवन कठिन बना दिया है, जिससे देश ‘नरक जैसी स्थिति’ की ओर बढ़ रहा है.
राज्यसभा में आप के कुल 10 सांसद थे. इनमें से 7 सांसदों के एक साथ अलग होने से यह संख्या दो-तिहाई से अधिक हो गई, जिससे इन सांसदों को दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता से राहत मिल गई. चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सभी जरूरी दस्तावेज राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन को सौंप दिए गए हैं और औपचारिक मंजूरी के बाद वे बीजेपी में शामिल हो जाएंगे.
कौन-कौन सांसद हुए शामिल?
राघव चड्ढा के साथ जिन सांसदों ने आप छोड़ी, उनमें संदीप पाठक, स्वाति मालीवाल, अशोक मित्तल, विक्रमजीत साहनी, राजेंद्र गुप्ता और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह शामिल हैं. इनमें से 6 सांसद पंजाब से और एक दिल्ली से है, जिससे पंजाब की राजनीति पर इसका सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है.
क्या है बगावत का कारण?
सूत्रों के मुताबिक इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की शुरुआत 5 अप्रैल से हुई, जब आप नेतृत्व ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटा दिया. इसके बाद पार्टी और चड्ढा के बीच दूरी तेजी से बढ़ी. बताया जा रहा है कि चड्ढा ने धीरे-धीरे अन्य सांसदों से संपर्क कर उनकी नाराजगी को समझा और सामूहिक कदम उठाने की रणनीति बनाई.
बताया जाता है कि कई नेताओं में लंबे समय से असंतोष पनप रहा था. संदीप पाठक को दिल्ली चुनाव हार के बाद साइडलाइन किए जाने की बात सामने आई, जबकि स्वाति मालीवाल पहले ही पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर बोल चुकी थीं.
केजरीवाल की आखिरी कोशिश नाकाम
सूत्रों के मुताबिक आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने बागी सांसदों को मनाने की कोशिश की थी. उन्होंने उन्हें अगली बार टिकट देने का भी प्रस्ताव दिया था, लेकिन तब तक सांसद पार्टी छोड़ने का मन बना चुके थे. बताया जा रहा है कि केजरीवाल ने उन्हें बैठक के लिए बुलाया, लेकिन उससे पहले ही सांसदों ने अपने फैसले का ऐलान कर दिया.
राघव चड्ढा और आप में जुबानी जंग
राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ने की वजह बताते हुए कहा कि आप अब अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है. उन्होंने कहा, ‘जिस पार्टी को मैंने 15 साल दिए, वह अब अपने मूल्यों और आदर्शों से दूर हो चुकी है. मुझे लगने लगा था कि मैं गलत पार्टी में हूं.’
वहीं आप नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम को ‘ऑपरेशन लोटस’ करार दिया और आरोप लगाया कि बीजेपी उनके सांसदों को तोड़ने की साजिश कर रही है, ताकि पंजाब में पार्टी सरकार को कमजोर किया जा सके.
आप के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने कहा, ‘हमारे सांसदों को तोड़ा जा रहा है. ईडी-सीबीआई का इस्तेमाल किया जा रहा है. ईडी का छापा पड़ा और तोड़ लिया है. भय दिखाकर ये ऑपरेशन लोटस चलाया जा रहा है.’
बीजेपी ने किया स्वागत
बीजेपी ने इन सांसदों का खुलकर स्वागत किया. पार्टी नेता नितिन नवीन ने कहा कि सभी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाएंगे.
वहीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी इस पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘इंकलाब के नारे से शुरु हुई AAP का अंत अविश्वास और अलगाव से हो रहा है.’ इसके साथ ही उन्होंने लिखा, ‘आपकी पार्टी में अब आम आदमी नहीं, सिर्फ भ्रष्ट आदमी बचा है. केजरीवाल जी, दो-तिहाई राज्यसभा सांसदों का जाना आपकी तानाशाही पर सीधी चोट है. अब दिल्ली के बाद पंजाब की बारी है.
‘AAP के 50 विधायक भी बीजेपी में होंगे शामिल’
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा, ‘आप को सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि उनके 50 विधायक भाजपा में शामिल हो सकते हैं, अभी केवल सांसदों ने ही पार्टी छोड़ी है.’ उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के पास कोई विचारधारा नहीं है. यह स्वाभाविक था. इन सांसदों का पंजाब में कोई महत्व नहीं है.’
इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों पर पड़ सकता है. आप की राज्यसभा में ताकत घटने के साथ-साथ राज्य में पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर भी सवाल खड़े हो गए हैं. करीब 14 साल पहले भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से निकली आप के लिए यह सबसे बड़ा राजनीतिक संकट माना जा रहा है. संसद में संख्या बल घटने के साथ-साथ पार्टी की एकजुटता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि आप इस संकट से कैसे उबरती है और पंजाब समेत अन्य राज्यों में अपनी राजनीतिक जमीन को कैसे बचाती है.
