हरभजन सिंह के 5 महारिकॉर्ड…जिनका टूटना नामुमकिन है! 25 साल से अटूट है 32 विकेटों का विश्व कीर्तिमान

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Harbhajan Singh 5 records: हरभजन सिंह का नाम क्रिकेट इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है. ‘टर्बनेटर’ के नाम से मशहूर इस दिग्गज स्पिनर ने अपनी फिरकी से दुनिया भर के दिग्गजों को घुटने टेकने पर मजबूर किया. चाहे वो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐतिहासिक 2001 सीरीज हो या 400 टेस्ट विकेट का मील का पत्थर. भज्जी के नाम कई ऐसे रिकॉर्ड हैं जो उन्हें भारत का सबसे सफल ऑफ-स्पिनर बनाते हैं.

हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) ने जुलाई 2011 में डोमिनिका टेस्ट के दौरान कार्लटन बॉ को आउट कर अपने 400 टेस्ट विकेट पूरे किए थे. यह उपलब्धि उन्होंने 31 साल और 4 दिन की उम्र में हासिल की, जिससे वह सबसे कम उम्र में 400 टेस्ट विकेट लेने वाले भारतीय स्पिनर बन गए.

इस लिस्ट में वह दुनियाभर के गेंदबाजों में दूसरे स्थान पर हैं. उनसे आगे सिर्फ श्रीलंका के दिग्गज मुथैया मुरलीधरन का नाम है, जिन्होंने 29 साल 273 दिन की उम्र में यह कारनामा किया था. यह रिकॉर्ड उनकी निरंतरता और लंबे समय तक फॉर्म में रहने का प्रमाण है.

मार्च 2001 में कोलकाता के ईडन गार्डन्स में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए ऐतिहासिक टेस्ट में हरभजन सिंह ने वह कमाल किया, जो उनसे पहले कोई भी भारतीय नहीं कर सका था. उन्होंने लगातार तीन गेंदों पर तीन विकेट लेकर ‘हैट्रिक’ पूरी की. इस दौरान उन्होंने रिकी पोंटिंग, एडम गिलक्रिस्ट और शेन वॉर्न जैसे दिग्गज बल्लेबाजों को चलता किया था. यह विकेट भारतीय टीम के मनोबल को बढ़ाने वाला साबित हुआ था. उनके बाद इरफान पठान (2006) और जसप्रीत बुमराह (2019) ने यह उपलब्धि हासिल की, लेकिन पहला होने का गौरव केवल भज्जी के पास है.

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2001 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे रोमांचक सीरीज मानी जाती है. इस सीरीज में हरभजन सिंह का जादू सिर चढ़कर बोला था. उन्होंने तीन मैचों की उस श्रृंखला में कुल 32 विकेट लिए थे. यह एक विश्व रिकॉर्ड है. दुनिया का कोई भी अन्य स्पिनर तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में 32 से ज्यादा विकेट नहीं ले पाया है. उनके पीछे मुरलीधरन का नाम आता है जिन्होंने तीन टेस्ट में 30 विकेट लिए थे. यह आंकड़ा बताता है कि हरभजन उस समय किस बेहतरीन फॉर्म में थे.

साल 2001 में चेन्नई टेस्ट के दौरान हरभजन सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपनी फिरकी का ऐसा जाल बिछाया कि कंगारू बल्लेबाज लाचार नजर आए. उन्होंने मैच में 217 रन देकर कुल 15 विकेट झटके थे. यह किसी भी भारतीय गेंदबाज द्वारा एक टेस्ट मैच में किया गया दूसरा सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है.इस लिस्ट में उनसे आगे केवल नरेंद्र हिरवानी हैं, जिन्होंने 1988 में वेस्टइंडीज के खिलाफ 136 रन देकर 16 विकेट लिए थे. भज्जी का यह स्पेल आज भी क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में ताजा है.

यदि हम हरभजन सिंह के पूरे करियर पर नजर डालें, तो उनका 5वां सबसे बड़ा रिकॉर्ड उनका कुल विकेटों का आंकड़ा है. अनिल कुंबले के बाद, हरभजन सिंह भारत के दूसरे ऐसे ऑफ-स्पिनर हैं जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 400 से ज्यादा विकेट लेने का मुकाम हासिल किया (कुल 417 विकेट). उन्होंने न केवल स्पिन के दम पर बल्कि आक्रामक रवैये के साथ भारतीय टीम को कई यादगार जीत दिलाई। उनके 417 विकेट का आंकड़ा यह साबित करता है कि वे केवल एक सीजन के सितारे नहीं, बल्कि एक लंबे समय तक चलने वाले ‘मैच विनर’ थे.

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