पुरानी BMW-Audi खरीदने से पहले जरूर पढ़ें ये 5 बातें, वरना लग सकता है लाखों का झटका

लग्जरी कारों का आकर्षण किसी भी कार लवर को आसानी से खींच लेता है. BMW. Audi जैसी जर्मन लग्जरी गाड़ियां स्टाइल, परफॉर्मेंस और कम्फर्ट का बेहतरीन कॉम्बिनेशन ऑफर करती हैं. लेकिन नई कार की कीमत न देने की चाह में अगर आप पुरानी लग्जरी कार खरीदने जा रहे हैं. तो जल्दबाजी घातक साबित हो सकती है. ये गाड़ियां शुरू में तो शानदार लगती हैं, लेकिन मेंटेनेंस, पार्ट्स की महंगाई और छिपी हुई समस्याओं के कारण कई बार मालिक का बजट बर्बाद कर देती हैं.

भारत में लग्जरी कारों का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन बिना पूरी जांच के खरीदारी न करें. छोटी-मोटी गलती आपको बाद में लाखों रुपये का नुकसान पहुंचा सकती है. इसलिए खरीदारी से पहले कुछ बेहद जरूरी चीजों को जरूर चेक करें. सही तरीके से जांच करने पर आप एक बेहतरीन डील पा सकते हैं, वरना हर महीने सर्विसिंग में ही बड़ी रकम खर्च हो जाएगी. सावधानी से आगे बढ़ें और इन 5 महत्वपूर्ण टिप्स को फॉलो करें.

1. सर्विस हिस्ट्री और मेंटेनेंस रिकॉर्ड्स

बीएमडब्ल्यू और ऑडी जैसी कारों में नियमित सर्विसिंग बेहद जरूरी होती है. खरीदते समय कार के सभी सर्विस रिकॉर्ड्स, बिल्स और ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर्स के स्टैम्प्स को जरूर देखें. अगर ऑनर ने नियमित अंतराल पर सर्विस नहीं कराई है तो इंजन, टर्बो और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स में छिपी समस्या हो सकती है. डीलर या सेलर से सभी डॉक्यूमेंट्स मांगें और क्रॉस चेक करें कि कार कितने किलोमीटर पर सर्विस हुई थी.

2. प्रोफेशनल मैकेनिकल और बॉडी इंस्पेक्शन करवाएं

खुद की आंखों से या साधारण मैकेनिक से काम न चलाएं. किसी लग्जरी कार स्पेशलिस्ट या ब्रांड ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर से पूरी इंस्पेक्शन करवाएं. इंजन, ट्रांसमिशन, सस्पेंशन, ब्रेक्स और इलेक्ट्रिकल सिस्टम की गहराई से जांच जरूरी है. ऑडी और बीएमडब्ल्यू में कॉमन समस्याएं जैसे ऑयल लीक, सस्पेंशन एयर बैग फेलियर या इलेक्ट्रॉनिक मॉड्यूल खराबी को पहले ही पकड़ लें. पेंट थिकनेस गेज और अंडरबॉडी चेक से एक्सीडेंट हिस्ट्री भी पता चल जाती है.

3. एक्सीडेंट हिस्ट्री, चेसिस नंबर और ओडोमीटर की जांच

कार का चेसिस नंबर (VIN) लेकर ऑनलाइन पोर्टल्स या आरटीओ रिकॉर्ड्स से एक्सीडेंट हिस्ट्री चेक करें. कई बार सेलर ओडोमीटर रोल बैक कर देते हैं. बीएमडब्ल्यू और ऑडी में हाई माइलेज वाली कारें महंगी पड़ सकती हैं, क्योंकि पार्ट्स जल्दी खराब होते हैं. डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और सर्विस रिकॉर्ड्स से माइलेज वेरिफाई करें. अगर कार पहले टैक्सी या हाई-यूज में रही है तो सावधानी बरतें.

4. टेस्ट ड्राइव और इलेक्ट्रॉनिक फीचर्स की पूरी जांच

कम से कम 15-20 किलोमीटर टेस्ट ड्राइव जरूर लें. अलग-अलग स्पीड पर इंजन, गियर शिफ्ट, ब्रेकिंग और सस्पेंशन पर ध्यान दें. एसी, इंफोटेनमेंट सिस्टम, सनरूफ, पावर विंडोज, लाइट्स और सभी सेंसर काम कर रहे हैं या नहीं, चेक करें. लग्जरी कारों में छोटी-छोटी इलेक्ट्रॉनिक खराबी भी बाद में बहुत महंगी पड़ती है. रेन, नाइट और हाईवे कंडीशन में ड्राइव करके रियल परफॉर्मेंस समझें.

5. बजट में मेंटेनेंस और रीसेल वैल्यू का ध्यान रखें

खरीद मूल्य के अलावा आने वाले खर्चों का पूरा हिसाब लगाएं. बीएमडब्ल्यू और ऑडी की सर्विसिंग, पार्ट्स और इंश्योरेंस कॉस्ट महंगी होती हैं. इंजन ऑयल, ब्रेक पैड, टायर और बैटरी जैसे खर्चे सालाना 50-80 हजार या इससे ज्यादा हो सकते हैं. कार की रीसेल वैल्यू, फ्यूल एफिशिएंसी और इंश्योरेंस क्लेम हिस्ट्री भी देखें. अगर बजट टाइट है, तो थोड़ी कम माइलेज वाली लेकिन बेहतर कंडीशन वाली कार चुनें.

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *