नई दिल्ली. क्या कभी आपने सोचा है कि फेसबुक खोलते ही कुछ खास तरह की पोस्ट्स सबसे ऊपर और बार-बार क्यों दिखाई देती हैं. किसी एक दोस्त की पोस्ट तुरंत दिख जाती है, लेकिन दूसरे की कई दिन नजर नहीं आती. इंस्टाग्राम पर भी ऐसा ही होता है. कभी किसी अनजान क्रिएटर की रील तुरंत स्क्रीन पर आज जाती है, जबकि आप उसे फॉलो ही नहीं करते. ये सब करता है मेटा का अल्गोरिद्म (Meta Algorithm). अब यही अल्गोरिद्म प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पोस्ट को कुछ देर के लिए हटाने की वजह से चर्चा में है. मेटा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 23 जुलाई 2026 को पोस्ट किया गया एक वीडियो गलती से हटाने की बात मानी है और माफी मांगी है. ऐसा पहली बार नहीं है मेटा अल्गोरिद्म विवाद में फंसा है. पहले भी कई बार इसके किसी खास कंटेंट को छुपाने या बढ़ाने जैसे आरोप लग चुके हैं.
अब वापस असली सवाल पर आते हैं कि आखिर मेटा अल्गोरिद्म है क्या और ये कैसे काम करता है. साधारण शब्दों में कहें तो यही वह सिस्टम है जो हर सेकंड करोड़ों पोस्टों को छांटकर तय करता है कि आपकी स्क्रीन पर सबसे पहले क्या दिखेगा. Meta का एक नहीं, कई एल्गोरिद्म हैं. फेसबुक और इंस्टाग्राम चलाने को अलग-अलग अल्गोरिद्म का यूज होता है. ऐसे ही पोस्ट, रील्स, एक्सप्लोर पेज और थ्रेड्स के लिए अलग-अलग. लेकिन इन सभी का मकसद एक ही है. आपको वही कंटेंट दिखाना, जिसे देखने की संभावना सबसे ज्यादा है.
मेटा अल्गोरिद्म कैसे काम करता है?
Meta का एल्गोरिद्म किसी जादू की तरह नहीं, बल्कि यह एक बेहद तेज और चतुर एआई आधारित ‘सिफारिश करने वाली मशीन’ है. यह हर क्लिक, हर लाइक, हर शेयर, हर सेव और हर सेकेंड के वॉच टाइम पर गहरी नजर रखता है. उससे सीखता है और फिर उसी आधार पर तय करता है कि अगली बार आपकी स्क्रीन पर कौन-सी पोस्ट सबसे पहले दिखाई जाएगी.
फेसबुक.कॉम वेबसाइट के हेल्प वाले पेज पर बताया गया है कि मेटा कैसे कंटेंट डिस्ट्रिब्यूशन करता है. Meta सबसे पहले सभी पोस्ट इकट्ठी करता है. मान लीजिए आपने सुबह 8 बजे फेसबुक खोला. जैसे ही ऐप खुलती है, मेटा सबसे पहले उन सभी पोस्टों की सूची तैयार करता है, जो आपको दिखाई जा सकती हैं. इस लिस्ट में शामिल होती हैं-
- आपके दोस्तों की पोस्ट
- वे Pages को आपने Follow किए हैं
- जिन ग्रुप्स में आप हैं
- स्पॉन्सर्ड पोस्ट
- AI द्वारा सुझाई गई रिकमेंडेड पोस्ट
- रील्स
- वायरल वीडियो
इसे मेटा इनवेंटरी (Inventory) कहता है. इसे ऐसे समझिए जैसे कोई होटल अपना मेन्यू तैयार करता है. Meta भी पहले पोस्टों का पूरा मेन्यू तैयार करता है.
जांच-पड़ताल
इनवेंटरी बनाने के बाद मेटा हर पोस्ट की जांच करता है. यहीं से अल्गोरिद्म का असली खेल शुरू होता है. वह हर पोस्ट से जुड़े हजारों संकेत (Signals) देखता है. जैसे-
- पोस्ट किसने डाली?
- वह व्यक्ति यूजर का कितना करीबी है?
- पोस्ट कितनी पुरानी है?
- कितने लोगों ने इसे लाइक किया?
- कितने लोगों ने शेयर किया?
- कमेंट कितने लोगों ने किया?
मेटा यह भी देखता है कि आप मोबाइल पर फेसबुक या इंस्टाग्राम चला रहे हैं या लैपटॉप पर. दिन है या रात और आपके इंटरनेट की स्पीड कैसी है. साथ ही वह इस बात पर भी नजर रखता है कि आपने अभी किस तरह की पोस्ट देखी थी? यानी हर छोटी-बड़ी चीज अल्गोरिद्म के लिए एक संकेत है अनुमान लगाने के लिए.
AI लगाता है अनुमान
मेटा अल्गोरिद्म के माध्यम से आपके दिमाग को पढ़ने की कोशिश नहीं करता. वह तो बस आपकी पुरानी आदतों का विश्लेषण कर अनुमान लगाता है. आपको क्रिकेट पसंद हैं. आप रोज क्रिकेट की रील्स देखते हैं. क्रिकेट वाली पोस्ट लाइक और शेयर करते हैं. मैच के वीडियो देखना भी आपकी आदत में शुमार है. अब यदि किसी ने विराट कोहली या शुभमन गिल की नई रील डाली है, तो मेटा को पहले से अंदाजा होगा कि शायद आप इसे भी पूरा देखेंगे. इसी तरह यदि आप शेयर बाजार की खबरें पढ़ते हैं, तो मेटा आपकी फीड में उसी तरह का कंटेंट बढ़ा देगा. यदि AI को लगता है कि आपको कोई Reel पसंद आएगी, तो वह उसे आपकी Feed में भेज देगा, चाहे आपने उस क्रिएटर को कभी फॉलो ही क्यों न किया हो.
हर पोस्ट के लिए अनुमान लगाता है AI
AI हर पोस्ट के लिए अनुमान लगाता है. वह इस बात पर विचार करता है कि क्या आप किसी खास पोस्ट को लाइक या शेयर करेंगे या फिर उस पर कमेंट करेंगे. वीडियो पूरा देखेंगे या पोस्ट को सेव करेंगे. इन सभी सवालों के जवाब मेटा खुद नहीं जानता. लेकिन AI संभावनाएं निकालता है.
रेलेवेंस स्कोर
इन जवाबों के आधार पर मेटा हर पोस्ट को एक स्कोर देता है. इसे रेलेवेंस स्कोर (Relevance Score) कहा जाता है. जिस पोस्ट का स्कोर ज्यादा होगा, वही आपकी फीड में ऊपर दिखाई देगी. जिसका स्कोर कम होगा, वह नीचे चली जाएगी या शायद आपको दिखाई ही नहीं दे. वह पोस्ट को कुछ पैरामीटर्स के आधार पर स्कोर देता है. जैसे आपके किसी वीडियो को पूरा देखने की संभावना 90 फीसदी है या लाइक करने के चांस 40 फीसदी है तो ऐसी पोस्ट तो ऐसी पोस्ट का स्कोर बढ़ जाएगा. यानी मेटा हर पोस्ट से पूछता है कि क्या फलां व्यक्ति के लिए यह उपयोगी है? यदि जवाब हां होता है, तो उसे ऊपर भेज दिया जाता है.
