कभी फुटपाथ पर सोते थे कृष्ण कुमार, आज दिल्ली में बन गए टीचर, संघर्ष की कहानी कर देगी भावुक

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कभी फुटपाथ पर सोते थे कृष्ण कुमार, आज दिल्ली में बन गए टीचर, जानें पूरी कहानी

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कभी फुटपाथ पर रात गुजारने और मजदूरी कर जीवन चलाने वाले कृष्ण कुमार आज बच्चों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं. दिल्ली में शिक्षक के रूप में कार्यरत कृष्ण कुमार ने छात्रों को अपनी संघर्ष की कहानी सुनाते हुए बताया कि कैसे शिक्षा ने उनकी जिंदगी बदल दी. उन्होंने कहा कि हालात कितने भी कठिन हों, अगर इंसान मेहनत और पढ़ाई का साथ नहीं छोड़ता, तो वह अपनी किस्मत बदल सकता है. उनके अनुसार शिक्षा सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि जिंदगी बदलने का सबसे बड़ा हथियार है.

नई दिल्ली: कभी फुटपाथ पर रात गुजारने और मजदूरी कर जीवन चलाने वाले कृष्ण कुमार आज बच्चों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं. दिल्ली में शिक्षक के रूप में कार्यरत कृष्ण कुमार ने छात्रों के बीच अपनी संघर्ष भरी कहानी साझा करते हुए बताया कि किस तरह शिक्षा ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी. उन्होंने कहा कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इंसान मेहनत और पढ़ाई का साथ नहीं छोड़ता, तो वह अपनी किस्मत बदल सकता है. उनके अनुसार शिक्षा सिर्फ डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि जिंदगी बदलने का सबसे बड़ा हथियार है.

परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब
कृष्ण कुमार ने बताया कि जब वह 12वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे, तब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी. घर की मजबूरियों के कारण उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी और काम की तलाश में घर से बाहर निकलना पड़ा. शुरुआत में उन्होंने मजदूर के रूप में सिर्फ 65 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी पर काम किया. हालांकि कुछ समय बाद उन्हें एहसास हुआ कि मजदूरी से उनकी जिंदगी नहीं बदलने वाली. बेहतर भविष्य की तलाश में वह बिना किसी तय योजना के ट्रेन पकड़कर अलग-अलग शहरों में भटकते रहे.

खाने तक के पैसे नहीं थे
कृष्ण कुमार राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के छोटे से गांव मोहन मगरिया के रहने वाले हैं. वर्तमान में वह दिल्ली सरकार के कौटिल्य गवर्नमेंट सर्वोदय विद्यालय, चिराग एन्क्लेव में गेस्ट टीचर के रूप में कार्यरत हैं. उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब उनके पास खाने तक के पैसे नहीं थे. एक नए शहर में पहुंचने के बाद उन्होंने भूख लगने पर चाय वाले से मदद मांगी. कई दिनों तक उन्होंने चाय और बिस्किट के सहारे गुजारा किया. दिन में नौकरी की तलाश और रात में फुटपाथ पर सोना उनकी दिनचर्या बन गई थी. करीब 20 से 22 दिनों के संघर्ष के बाद उन्हें दूध बेचने का काम मिला, जहां उन्हें 1500 रुपये की नौकरी मिली.

धीरे-धीरे मेहनत रंग लाई
धीरे-धीरे मेहनत रंग लाने लगी. बाद में उनकी मुलाकात एक कैटरिंग व्यवसायी से हुई, जिसने उन्हें 5000 रुपये महीने की नौकरी दी. इसके बाद मुंबई में बर्तन की दुकान पर काम मिला, जहां उनकी आमदनी 10 हजार रुपये तक पहुंच गई. कुछ समय बाद नासिक में सेना से जुड़े एक निजी कार्य में केबल ऑपरेटर की नौकरी मिली, जहां वह 22 हजार रुपये तक कमाने लगे. लगातार मेहनत कर उन्होंने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की.

दोबारा पढ़ाई शुरू करने की सलाह
कृष्ण कुमार ने बताया कि कई साल बाद जब वह घर लौटे, तब उनकी मां ने उन्हें दोबारा पढ़ाई शुरू करने की सलाह दी. मां को भरोसा था कि उनका बेटा पढ़ाई में अच्छा है और जिंदगी में कुछ बड़ा कर सकता है. मां की बात मानकर उन्होंने फिर से पढ़ाई शुरू की. इस दौरान उन्होंने एक प्राइवेट स्कूल में मात्र 600 रुपये की नौकरी करते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी. बाद में उन्होंने BA, MA और B.Ed जैसी डिग्रियां हासिल कीं.

संघर्ष और सफलता की सीख
लगातार मेहनत और शिक्षा के दम पर आखिरकार 10 जुलाई 2013 को कृष्ण कुमार दिल्ली में शिक्षक बन गए. आज वह बच्चों को सिर्फ किताबों की पढ़ाई ही नहीं, बल्कि जिंदगी के संघर्ष और सफलता की सीख भी देते हैं. उन्होंने बच्चों से कहा कि अगर फुटपाथ पर रहने वाला एक व्यक्ति शिक्षक बन सकता है, तो वे भी पढ़ाई के दम पर डॉक्टर, पुलिस अधिकारी, शिक्षक या सेना में अधिकारी बन सकते हैं. साथ ही उन्होंने बच्चों से यह वादा भी लिया कि सफलता मिलने के बाद वे अपने संघर्ष के दिनों और अपने गुरु को कभी नहीं भूलेंगे.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें

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