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Census 2027 Noida-Ghaziabad News : नोएडा में जनगणना 2027 का काम शुरू होने से पहले ही लापरवाही सामने आ गई है. सैकड़ों प्रगणक और पर्यवेक्षक अब तक जनगणना सामग्री लेने नहीं पहुंचे हैं. नोएडा अथॉरिटी ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि 26 मई दोपहर 12 बजे तक सामग्री नहीं लेने वालों पर FIR दर्ज कराई जाएगी. यानि लोगों के घर-घर पहुंचकर देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायद को पूरा करने वाले कर्मचारी खुद ही अब जनगणना ड्यूटी से दूरी बनाते दिख रहे हैं. नोएडा, गाजियाबाद में जनगणना 2027 का काम शुरू होने से पहले ही ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है.
जनगणना करने को तैयार नहीं कई सरकारी कर्मचारी…
नोएडा/गाजियाबाद : जनगणना जैसे देश के सबसे बड़े सरकारी अभियान में जहां कर्मचारी घर-घर जाकर लोगों का डेटा जुटाने वाले हैं, वहीं नोएडा में तैनात सैकड़ों प्रगणक (Enumerator) और पर्यवेक्षक खुद अपनी ड्यूटी से गायब नजर आ रहे हैं. हालात ऐसे हैं कि कई कर्मचारियों ने अब तक जनगणना का सामान तक नहीं लिया. लगातार फोन कॉल, मैसेज और निर्देशों के बावजूद वे सामने नहीं आए. इससे नाराज नोएडा अथॉरिटी ने अब सख्त रुख अपना लिया है. अधिकारियों ने साफ कह दिया है कि अगर तय समय तक कर्मचारी सामग्री लेकर काम शुरू नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ जनगणना अधिनियम 1948 के तहत FIR दर्ज कराई जाएगी. जनगणना 2027 (Census 2027) शुरू होने से पहले ही सामने आई यह लापरवाही प्रशासन के लिए बड़ा सिरदर्द बनती दिख रही है.
नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र में जनगणना के पहले चरण का काम 22 मई से शुरू होकर 20 जून 2026 तक चलना है. इसके लिए पूरे क्षेत्र में 2281 HLB (हाउस लिस्टिंग ब्लॉक) बनाए गए हैं. इस काम के लिए 2046 प्रगणकों और 341 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि बार-बार सूचना और आदेश देने के बावजूद अब तक करीब 700 प्रगणक और 140 पर्यवेक्षक जनगणना सामग्री लेने तक नहीं पहुंचे. यानी बड़ी संख्या में कर्मचारी या तो इस जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं या फिर इस काम में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे.
सरकारी कर्मचारियों को कॉल और मैसेज भी किए गए
इस लापरवाही ने नोएडा अथॉरिटी को नाराज कर दिया है. सोमवार को मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) ने समीक्षा बैठक में साफ निर्देश दिए कि 26 मई दोपहर 12 बजे तक सभी कर्मचारी सामग्री प्राप्त कर काम शुरू करें. ऐसा नहीं करने वालों के खिलाफ जनगणना अधिनियम 1948 की धारा-5 और धारा-11 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी. प्राधिकरण ने साफ कहा है कि जिन कर्मचारियों ने अभी तक सामान नहीं लिया है, उन्हें फोन कॉल और मैसेज के जरिए लगातार निर्देश दिए जा चुके हैं. इसके बावजूद गैरहाजिरी जारी है.
दरअसल, प्रशासन को डर है कि अगर शुरुआती चरण में ही इतनी उदासीनता रही तो आने वाले दिनों में जनगणना की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. कुछ अधिकारी इसे पहले हुए SIR सर्वे जैसी स्थिति बनने की आशंका से भी जोड़कर देख रहे हैं, जहां फील्ड लेवल पर कर्मचारियों की सक्रियता को लेकर सवाल उठे थे. अब सबकी नजर आज यानि 26 मई की डेडलाइन पर टिकी है. अगर तब तक कर्मचारी नहीं पहुंचे, तो नोएडा में जनगणना ड्यूटी से बचने वालों पर कानूनी कार्रवाई की शुरुआत हो सकती है.
गाजियाबाद में तो 10 पर केस हो गया
उधर, गाजियाबाद में जनगणना के कार्य में लापरवाही करने वाले 10 सरकारी कर्मचारियों पर जिलाधिकारी के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. सरकारी कर्मचारियों ने जनगणना के कार्य को अभी तक शुरू नहीं किया था. इसके बाद जिला अधिकारी रविंद्र कुमार ने एफआईआर के आदेश दिए.
बता दें कि जनगणना अधिनियम 1948 की धारा-5 और धारा-11 जनगणना कार्य में लगाए गए कर्मचारियों की जिम्मेदारियों और नियम तोड़ने पर सजा से जुड़ी अहम धाराएं हैं.
धारा-5 क्या कहती है?
यह धारा सरकार को अधिकार देती है कि वह जनगणना के लिए अधिकारियों, प्रगणकों (Enumerators) और पर्यवेक्षकों (Supervisors) की नियुक्ति करे. इसके तहत नियुक्त कर्मचारी को जनगणना कार्य करना कानूनी रूप से अनिवार्य होता है. यानी जिस कर्मचारी की ड्यूटी लगाई गई है, वह बिना उचित कारण इससे इनकार नहीं कर सकता. उसे निर्धारित क्षेत्र में जाकर सर्वे, डेटा संग्रह और रिकॉर्ड तैयार करना होता है. आसान शब्दों में कहें तो ड्यूटी लगने के बाद काम करना बाध्यकारी है. आदेश का पालन करना जरूरी है. जनगणना सामग्री लेना और समय पर काम शुरू करना जिम्मेदारी मानी जाती है.
धारा-11 क्या कहती है? कितनी सजा हो सकती है..
यह धारा जनगणना कार्य में लापरवाही, बाधा डालने या आदेश नहीं मानने पर दंड का प्रावधान बताती है. अगर कोई कर्मचारी जानबूझकर ड्यूटी नहीं करता. आदेशों की अवहेलना करता है. काम में बाधा डालता है. गलत जानकारी देता या जनगणना प्रक्रिया में सहयोग नहीं करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. कानून के मुताबिक दोषी पाए जाने पर अधिकतम 1000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है. कुछ गंभीर मामलों में तीन साल तक की जेल भी हो सकती है. कई मामलों में जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान है.
