योग दिवस: फ्रेंड्स कॉलोनी का वो सूना बंगला, जो कभी था सत्ता का केंद्र, बड़ी रोचक है यहां के 'रसपुतिन' की कहानी

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दिल्‍ली का वो सूना बंगला, जो कभी था सत्ता का केंद्र, कौन था यहां का ‘रसपुतिन’

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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर धीरेंद्र ब्रह्मचारी को याद करना जरूरी है, जिन्होंने भारत में योग को घर-घर तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई. इंदिरा गांधी के निजी योग गुरु रहे ब्रह्मचारी 1970 और 80 के दशक में देश के सबसे चर्चित योग शिक्षक थे. दूरदर्शन के लोकप्रिय कार्यक्रमों से उन्होंने लाखों लोगों को योग से जोड़ा. सत्ता के गलियारों में उनकी मजबूत पकड़, विवादों से भरा जीवन और योग के प्रचार-प्रसार में उनका योगदान आज भी चर्चा का विषय है.

बड़ी रोचक है बंगला नंबर ए-50 वाले ‘रसपुतिन’ की कहानी.

Yoga Divas & Dhirendra Brahmachari: भारत आज 21 जून को 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रहा है. ऐसे में हम योग के सबसे बड़े ब्रांड एंबेसेडर धीरेंद्र ब्रह्मचारी को याद करना चाहेंगे. दक्षिण दिल्ली के शानदार फ्रेंड्स कॉलोनी इलाके में ए-50 नंबर का एक बड़ा बंगला आजकल नजरअंदाज कर दिया जाता है. इसके गेट अक्सर बंद रहते हैं और यहा सन्नाटा रहता है. लेकिन 1970 के दशक और 80 के शुरुआती सालों में यह जगह सत्ता और प्रभाव का केंद्र हुआ करती थी. देश के बड़े-बड़े नेता, अधिकारी, उद्योगपति और प्रभावशाली लोग यहां आते थे. सबको बस कुछ मिनट धीरेंद्र ब्रह्मचारी के साथ बिताने की चाहत रहती थी, जो भारत के पहले सेलिब्रिटी योग गुरु बने.

उनसे मिलना आसान नहीं था. जो मिल पाते थे, उन्हें लगता था कि वे किसी बड़ी शक्ति को छू आए हैं. उनके घर में हमेशा चहल-पहल रहती थी. लोग उनसे मिलकर अपने को भाग्यशाली मानते थे. उनकी पहुंच प्रधानमंत्री तक थी.

धीरेंद्र ब्रह्मचारी अपने परिवार के साथ यहीं रहते थे. उनकी लंबी कद-काठी, पैनी नजर और आकर्षक व्यक्तित्व हर किसी पर गहरा असर छोड़ता था. लोग उन्हें सम्मान और कौतुक के भाव से देखते थे.

इंदिरा गांधी के निजी योग गुरु

  • ब्रह्मचारी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निजी योग शिक्षक थे. वे लगभग रोज 1 सफदरजंग रोड स्थित उनके घर जाकर योग सिखाते थे. उनके साथ उनके विश्वसनीय शिष्य बाल मुकुंद भी प्रधानमंत्री आवास में आते-जाते थे.
  • ब्रह्मचारी की लोकप्रियता 1978 से 1983 तक दूरदर्शन पर चले उनके कार्यक्रम से चरम पर पहुंची. इसमें वे योग आसन सिखाते थे और बाल मुकुंद उन्हें करके दिखाते थे. एक महिला एंकर डॉली दर्शकों के सवाल पूछती थीं, जिनका ब्रह्मचारी शांत और अधिकारपूर्ण तरीके से जवाब देते थे.
  • अब सरकारी स्कूल से योग शिक्षक के रूप में रिटायर बाल मुकुंद दक्षिण दिल्ली के महिपालपुर में शांत जीवन बिता रहे हैं. वे याद करते हुए कहते हैं, ‘गुरुजी कम बोलने वाले थे, लेकिन योग का उनका ज्ञान अद्भुत था. वे अजनबियों की भी मदद करते थे. बाद में वे भीड़ से बचने लगे क्योंकि लोग उनसे एहसान चाहते थे.’
  • ब्रह्मचारी ने टीवी कार्यक्रम के लिए बाल मुकुंद को अपने कई शिष्यों में से चुना था. कांग्रेस के प्रमुख नेता आरके धवन, बूटा सिंह और यशपाल कपूर भी उनके मार्गदर्शन में योग सीखने वालों में शामिल थे.

मामूली शुरुआत से ऊंचाई तक

  • धीरेंद्र ब्रह्मचारी का जन्म बिहार के मधुबनी में हुआ था. वे 1958 में दिल्ली आए. योग की गहरी जानकारी और महत्वाकांक्षा के बल पर वे तीन मूर्ति हाउस (तब प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का निवास) पहुंच गए. वहां उन्होंने नेहरू की पुत्री इंदिरा गांधी को योग सिखाना शुरू किया. यही संबंध उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बना.
  • एक पुरानी घटना उनकी छवि को अच्छी तरह दिखाती है. 1958 में अमिताभ पांडे के पिता दिल्ली प्रशासन के मुख्य सचिव थे. उनका परिवार 221 राउज एवेन्यू (अब गांधी शांति प्रतिष्ठान) में रहता था. पूर्व आईएएस अधिकारी अमिताभ पांडे याद करते हैं:

पिता के निजी सचिव ने एक अज्ञात योग गुरु को घर लाए थे. कुछ महीनों तक वे नियमित रूप से योग सिखाने आते थे. मुझे पुरानी साइनस की शिकायत थी और नाक की हड्डी भी टेढ़ी थी. ब्रह्मचारी ने मुझे जलनेति सिखाई. उन्होंने सही मुद्रा, सांस लेने की तकनीक सब कुछ बताया. उस समय हमें नहीं पता था कि कुछ साल बाद वे कितने मशहूर हो जाएंगे. मेरे पास आज भी उनकी दी हुई ‘सूक्ष्म व्यायाम’ की किताब कहीं होगी. वे बहुत प्रभावशाली व्यक्तित्व के थे और जो योग सिखाते थे, खुद भी उसका बेहतरीन उदाहरण थे.

सत्ता के केंद्र में

  • गांधी परिवार से निकटता के कारण ब्रह्मचारी राष्ट्रीय घटनाओं के बीच में रहते थे. 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या से वे बहुत दुखी हुए. उन्होंने उनके अंतिम संस्कार की देखभाल की, ठीक वैसे ही जैसे पहले संजय गांधी के समय किया था.
  • इंदिरा के जाने के बाद उनकी चमक तेजी से कम होने लगी. राजीव गांधी ने दूरदर्शन का योग कार्यक्रम बंद कर दिया. एक समय के मशहूर गुरु अब ज्यादातर घर में ही रहने लगे. दिल्ली अक्सर सत्ता से दूर हो चुके लोगों को भूल जाती है. सिर्फ कुछ करीबी दोस्त ही उनसे मिलने आते थे.
  • महाराष्ट्र के पूर्व राज्य मंत्री के.एम. अजहर हुसैन याद करते हैं, ‘संजय गांधी के समय हम युवा कांग्रेस के लोग सुबह-सुबह प्रधानमंत्री घर पर इंतजार करते थे. ठंड के दिनों में भी धीरेंद्र ब्रह्मचारी धोती और पल्ला कंधे पर डालकर आते दिखाई देते. हम उन्हें प्रणाम करते तो वे मुस्कुराकर जवाब देते. उनकी व्यक्तित्व बहुत आकर्षक था.’

विवाद भी साथ रहे

  • कांग्रेस के कई लोगों को उनका प्रभाव पसंद नहीं था. उन्हें चुपके से ‘भारत का रसपुतिन’ कहते थे. इंदिरा गांधी के करीबी होने के कारण कोई खुलकर उनके खिलाफ नहीं बोलता था.
  • उनकी महत्वाकांक्षा कभी-कभी दबाव बनाने लगती थी. पूर्व प्रधानमंत्री आईके गुजराल ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि जब वे इंदिरा सरकार में मंत्री थे, तो ब्रह्मचारी ने गोल दक्खाना के पास एक अच्छी जगह आश्रम के लिए मांगी.
  • गुजराल ने मना किया तो गुरुजी ने फोन कर धमकी दी कि वे मंत्रिमंडल से बाहर हो सकते हैं. बाद में गुजराल हटाए गए. उनके बाद आए उमा शंकर दीक्षित पर भी दबाव पड़ा, लेकिन अंत में ब्रह्मचारी को वह जगह मिल गई. वहीं उन्होंने विश्वयतन योगाश्रम बनाया.

योग का बड़ा योगदान

  • विवादों के बावजूद योग को लोकप्रिय बनाने में ब्रह्मचारी का योगदान बहुत महत्वपूर्ण रहा. डीएवी स्कूल, दरियागंज के पूर्व प्रिंसिपल रामाकांत तिवारी कहते हैं, ‘उनकी वजह से देशभर के केंद्रीय विद्यालयों में योग शिक्षकों की भर्ती शुरू हुई. हजारों योग प्रशिक्षक सरकारी नौकरी पा सके.’
  • अंतिम सालों में ब्रह्मचारी मीडिया के कुछ हिस्सों से नाराज रहते थे. फिर भी वे चुनिंदा पत्रकारों को घर बुलाते और योग को खेल का दर्जा देने की वकालत करते थे. इस लेखक को भी एक बार उनके घर में उनसे मिलने का मौका मिला था. तब तक वे सुर्खियों से दूर हो चुके थे.

धीरेंद्र ब्रह्मचारी का 9 जून 1994 को एक विमान हादसे में निधन हो गया. वे 70 साल के थे. जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में मंतलाई स्थित अपने योग केंद्र के हवाई पट्टी पर विमान उतारते समय दुर्घटना हो गई. उनके पायलट भी इस हादसे में मारे गए. धीरेंद्र ब्रह्मचारी की कहानी असाधारण ऊंचाई, अटूट महत्वाकांक्षा और सत्ता के करीब रहने के बाद आने वाले उतार की कहानी है.

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