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सेक्टर-105 स्थित सीएनजी पंप के पास नाले की स्थिति सबसे चिंताजनक नजर आई. यहां नाले में जमा गंदगी के कारण बदबूदार पानी ग्रीन बेल्ट में फैल रहा है, जिससे आसपास का वातावरण भी प्रभावित हो रहा है. जांच में यह भी सामने आया कि इस साल नालों की सफाई का कार्य समय पर शुरू ही नहीं हो सका. हर साल अप्रैल में नाला सफाई के टेंडर जारी कर 15 जून तक काम पूरा कराने का लक्ष्य रखा जाता था, लेकिन इस बार प्राधिकरण समय पर टेंडर जारी करना ही भूल गया.
नोएडा: नोएडा में मानसून की दस्तक से पहले शहर को जलभराव से बचाने के लिए की जाने वाली तैयारियां इस बार सवालों के घेरे में हैं. ग्राउंड पड़ताल में शहर के कई इलाकों में नालों की बदहाल स्थिति सामने आई है. कई स्थानों पर नाले गंदगी और फ्लोटिंग मैटेरियल से चोक पड़े हैं, जिससे दूषित पानी ओवरफ्लो होकर ग्रीन बेल्ट तक पहुंच रहा है. इससे एक ओर पौधों को नुकसान हो रहा है तो दूसरी ओर ग्राउंड वॉटर प्रदूषित होने की आशंका भी बढ़ गई है. हर साल 15 जून तक नालों की सालों की सफाई का काम पूरा कर लिया जाता है लेकिन इस बार प्राधिकरण टेंडर देना ही भूल गई.
बदबूदार पानी ग्रीन बेल्ट में फैल रहा
सेक्टर-105 स्थित सीएनजी पंप के पास नाले की स्थिति सबसे चिंताजनक नजर आई. यहां नाले में जमा गंदगी के कारण बदबूदार पानी ग्रीन बेल्ट में फैल रहा है, जिससे आसपास का वातावरण भी प्रभावित हो रहा है. जांच में यह भी सामने आया कि इस साल नालों की सफाई का कार्य समय पर शुरू ही नहीं हो सका. हर साल अप्रैल में नाला सफाई के टेंडर जारी कर 15 जून तक काम पूरा कराने का लक्ष्य रखा जाता था, लेकिन इस बार प्राधिकरण समय पर टेंडर जारी करना ही भूल गया. इसके चलते सफाई अभियान तय समय से काफी पीछे रह गया.
सूत्रों के अनुसार, मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद मई के अंतिम सप्ताह में आनन-फानन में शहर के दस वर्क सर्किलों के लिए एक-एक करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए गए. हालांकि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने, दस्तावेजों की जांच और कार्य आवंटन में ही लगभग 45 दिन का समय लग जाता है. ऐसे में मानसून से पहले सभी नालों की सफाई पूरी होना लगभग असंभव माना जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, शहर के करीब 80 से 90 प्रतिशत नालों की सफाई अब तक अधूरी है. हालांकि प्राधिकरण का दावा है कि 30 जून तक सभी नालों की सफाई का कार्य पूरा कर लिया जाएगा.
अभी तक नालों की सफाई अधूरी
नोएडा शहर में जो नोएडा प्राधिकरण अपनी देख रेख में साफ सफाई करता है उसमें नालों की संख्या 153 है, शाहदरा ड्रेन 7.5 किलोमीटर है. कोंडली ड्रेन 17.5 किलोमीटर है. शहरी क्षेत्र में नालियां 700 किलोमीटर की है. ग्रामीण क्षेत्र में नालियां 2000 किलोमीटर की है. मेन ड्रेन 200 किलोमीटर है, और सीवरेज 1500 किलोमीटर के है. इन सबकी सफाई का टेंडर अप्रैल में जारी होकर 15 जून तक पूरा कर लिया जाता है लेकिन जून खत्म होने के आया और सफाई सिर्फ न मात्र को हुई है इस स्थिति से आप अंदाजा लगा सकते है आने वाले दिनों में शहर की क्या हालत होने वाली है.
प्राधिकरण पर उठ रहे सवाल
आपको बता दें कि प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश ने जनवरी में जनस्वास्थ्य विभाग का सिविल विभाग के साथ विलय किया था, ताकि सफाई व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सके. लेकिन नई व्यवस्था में जिम्मेदारियों के स्पष्ट बंटवारे के अभाव में नाला सफाई का काम समय पर शुरू नहीं हो पाया. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि मानसून के दौरान तेज बारिश हुई तो क्या नोएडा एक बार फिर जलभराव की समस्या से जूझेगा, फिलहाल जमीनी हकीकत प्राधिकरण की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
