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Gardening Tips : गुड़हल के पौधे में बरसात और उमस के मौसम में सफेद रूई जैसे कीड़े (मीलीबग) लगना आम समस्या है. ये कीड़े पौधे का रस चूसकर पत्तियों को पीला और फूलों को कमजोर कर देते हैं. इससे बचाव के लिए प्रभावित पत्तियों को हटाएं और पौधे पर पानी की तेज धार डालें. एक लीटर पानी में 4-5 मिली नीम का तेल और कुछ बूंदें लिक्विड साबुन मिलाकर नियमित छिड़काव करना भी प्रभावी उपाय है. साथ ही पौधे को पर्याप्त धूप, हवा और सही सिंचाई मिलती रहे. समय पर देखभाल से गुड़हल फिर से स्वस्थ होकर भरपूर फूल देने लगता है.
Gardening Tips : गुड़हल का पौधा लगभग हर घर के बगीचे में देखने को मिल जाता है. बड़े और रंग-बिरंगे फूलों की वजह से यह पौधा लोगों की पहली पसंद होता है. लेकिन बरसात और उमस के मौसम में कई बार इसकी पत्तियों, कलियों और तनों पर सफेद रूई जैसे कीड़े दिखाई देने लगते हैं. ये कीड़े पौधे का रस चूसते हैं, जिससे पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं, कलियां झड़ जाती हैं और फूल खिलना कम हो जाते हैं. अगर समय रहते इन पर ध्यान न दिया जाए तो पूरा पौधा कमजोर पड़ सकता है. प्रयागराज के गार्डनिंग एक्सपर्ट राधे कुमार ने जरूरी बात समझाई है.
सफेद कीड़े दिखते ही घबराने की जरूरत नहीं
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि पौधे में सफेद कीड़े दिखते ही घबराने की जरूरत नहीं है. शुरुआत में यदि इनकी संख्या कम हो तो प्रभावित पत्तियों और टहनियों को काटकर अलग कर दें. इससे संक्रमण बाकी हिस्सों में फैलने से काफी हद तक रुक जाता है. इसके बाद पौधे को साफ पानी की तेज धार से धो सकते हैं, जिससे कई कीड़े अपने आप हट जाते हैं.
नीम का तेल सबसे असरदार
घरेलू उपायों में नीम का तेल सबसे असरदार माना जाता है. एक लीटर पानी में 4 से 5 मिली नीम का तेल और कुछ बूंदें लिक्विड साबुन मिलाकर घोल तैयार करें. इस मिश्रण का छिड़काव पत्तियों के ऊपर और नीचे दोनों तरफ करें. लगातार दो से तीन सप्ताह तक हर 5 से 7 दिन के अंतराल पर इसका उपयोग करने से सफेद कीड़ों की संख्या काफी कम हो सकती है.
यदि नीम का तेल उपलब्ध न हो तो हल्के साबुन वाले पानी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. स्प्रे करने के बाद कुछ देर पौधे को छांव में रखें. ध्यान रहे कि तेज धूप में छिड़काव करने से पत्तियों को नुकसान पहुंच सकता है.
पौधे की नियमित देखभाल भी बहुत जरूरी है. सूखी पत्तियों और टहनियों को समय-समय पर हटाते रहें. गमले में पानी जमा न होने दें और पौधे को ऐसी जगह रखें जहां उसे पर्याप्त धूप और हवा मिल सके. स्वस्थ पौधों पर कीटों का हमला अपेक्षाकृत कम होता है.
अगर कीड़ों का प्रकोप बहुत ज्यादा बढ़ जाए और घरेलू उपाय असर न करें, तो कृषि विशेषज्ञ या नर्सरी से सलाह लेकर उपयुक्त कीटनाशक का इस्तेमाल किया जा सकता है. दवा का प्रयोग हमेशा निर्देशों के अनुसार ही करें.
थोड़ी सी देखभाल और समय पर किए गए उपायों से गुड़हल का पौधा फिर से हरा-भरा हो सकता है. नियमित निरीक्षण, सही सिंचाई और प्राकृतिक उपाय अपनाकर आप अपने बगीचे में लंबे समय तक खूबसूरत और स्वस्थ गुड़हल के फूलों का आनंद ले सकते हैं.
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8 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. क्राइम, खेल, …और पढ़ें
