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रामकृष्ण मिशन के सेक्रेटरी स्वामी सर्वलोकानंद महाराज ने कहा कि नई शिक्षा नीति (NEP) में सरकार कई महापुरुषों के जीवन और विचारों को शामिल कर रही है. उन्होंने बताया कि स्वामी विवेकानंद को भी इसमें स्थान दिया गया है. हालांकि उनका मानना है कि स्कूलों में स्वामी विवेकानंद पर एक पूरा अध्याय पढ़ाया जाना चाहिए. इससे बच्चे और युवा उनके जीवन, विचारों और आदर्शों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे.
नई दिल्ली: आज के दौर में बढ़ते तनाव, अवसाद और मानसिक दबाव के बीच रामकृष्ण मिशन ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है. मिशन का कहना है कि यदि स्कूलों और कॉलेजों में स्वामी विवेकानंद के जीवन, विचारों और आदर्शों को पढ़ाया जाए, तो युवाओं में मानसिक मजबूती विकसित हो सकती है. मिशन का मानना है कि स्वामी विवेकानंद का जीवन केवल आध्यात्मिक प्रेरणा का स्रोत नहीं है. यह आधुनिक युवाओं के लिए तनाव से उबरने और जीवन का उद्देश्य समझने का भी प्रभावी मार्गदर्शन प्रदान करता है.
हर चुनौती का मजबूती से सामना
खास बातचीत में रामकृष्ण मिशन के सेक्रेटरी स्वामी सर्वलोकानंद महाराज ने कहा कि नई शिक्षा नीति (NEP) में सरकार कई महापुरुषों के जीवन और विचारों को शामिल कर रही है. जानकारी के अनुसार, इसमें स्वामी विवेकानंद को भी स्थान दिया गया है. हालांकि उनका मानना है कि स्वामी विवेकानंद पर एक पूरा अध्याय पढ़ाया जाना चाहिए. इससे युवा और बच्चे उनके जीवन से प्रेरणा लेकर जीवन की हर चुनौती का मजबूती से सामना कर सकेंगे.
‘कॉल टू द नेशन’ जरूर पढ़ें
स्वामी सर्वलोकानंद महाराज ने कहा कि यदि आज के युवाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनना है, तो उन्हें स्वामी विवेकानंद की पुस्तक ‘कॉल टू द नेशन’ जरूर पढ़नी चाहिए. उनके अनुसार, इस पुस्तक में स्वामी विवेकानंद ने बताया है कि सच्चा देशभक्त कैसे बना जा सकता है. उन्होंने कहा कि डॉक्टर और इंजीनियर तो बहुत लोग बन जाते हैं, लेकिन सबसे जरूरी है एक अच्छा इंसान बनना. इसके साथ ही युवाओं को निस्वार्थ भाव से जीने की सीख भी लेनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अपने लिए तो हर कोई जीता है, लेकिन दूसरों और देश के लिए कैसे जिया जाए, यह इस पुस्तक से सीखा जा सकता है.
बच्चों को पढ़ाएं रामायण और महाभारत
स्वामी सर्वलोकानंद महाराज ने कहा कि आज का युवा कई तरह की उलझनों और भ्रम का सामना कर रहा है. उसे सही दिशा और जीवन का उद्देश्य समझने के लिए स्वामी विवेकानंद की यह पुस्तक अवश्य पढ़नी चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि आज के युवाओं को भ्रमित होने से बचाना है और उनमें अच्छे संस्कार विकसित करने हैं, तो इसकी शुरुआत घर से होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि बच्चे स्कूल और कॉलेज जाने से पहले अपने शुरुआती एक-दो वर्ष परिवार के बीच ही बिताते हैं. ऐसे में यदि माता-पिता बचपन से ही उन्हें अच्छे संस्कार नहीं देंगे, तो समाज का समुचित विकास संभव नहीं होगा.
आदर्शों से परिचित कराना चाहिए
साथ ही, उन्होंने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों को बचपन से ही रामायण और महाभारत की कहानियां और उनके आदर्शों से परिचित कराना चाहिए. जब बच्चे छोटी उम्र से ही इन ग्रंथों में निहित मूल्यों और शिक्षाओं को समझेंगे, तो वे समाज के लिए बेहतर इंसान बन सकेंगे. इसके साथ ही उन्होंने माता-पिता से अपने बच्चों में देशभक्ति की भावना विकसित करने की भी अपील की.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें
