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पश्चिम बंगाल के कोन्नगर की रहने वाली टिया अपने पालतू तोते ‘मिट्ठू’ को बचाने के लिए बड़ी लड़ाई लड़ रही है. मिट्ठू को ‘एग-बाइंडिंग’ नाम की गंभीर मेडिकल समस्या हो गई है, जिसमें उसके पेल्विक में अंडा फंस गया है. कोलकाता में इलाज की कोशिश नाकाम रहने के बाद अब उसे दिल्ली लाया जा रहा है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर बिना सर्जरी इलाज की संभावना तलाश रहे हैं. अगर ऐसा संभव नहीं हुआ तो करीब 1.5 लाख रुपये की जटिल सर्जरी करनी पड़ सकती है.
दिल्ली में टिया के मिट्ठू की सर्जरी का खर्च करीब डेढ़ लाख रुपए तक आ सकता है. (एआई इमेज)
कोलकाता. पश्चिम बंगाल के कोन्नगर में रहने वाले श्यामलाल करीब दो साल पहले एक तोता अपने घर लाए थे. घर में आए इस नए मेहमान का नाम श्याल लाल की पोती टिया ने मिट्ठू रखा था. कुछ ही दिनों में टिया और मिट्ठू के बीच इतनी गहरी दोस्ती हो गई कि टिया अपना ज्यादातर खाली समय मिट्ठू के साथ बिताने लगी. बीते दो सालों में दोनों का रिश्ता इतना गहरा हुआ कि टिया अपने से भी ज्यादा ध्यान मिट्ठू का रखने लगी थी. मिट्ठू की हर बात और हर हरकत पर टिया का ध्यान रहता था.
कुछ दिनों पहले टिया ने महसूस किया कि उसे देखकर हमेशा चहकने वाली मिट्ठू अचानक से शांत हो गई है. ना ही वह कुछ बोल रही थी और सारी पसंदीदा चीजें देने के बावजूद वह कुछ खा भी नहीं रही थी. मिट्ठू का यह हाल देख टिया काफी परेशान हो चली थी. कुछ दिन देखने के बाद टिया ने यह बात अपने दादा श्यामलाल को बताई और जिद करने लगी कि उसे डॉक्टर को दिखाए. अपनी पोटी की बात मान श्यामलाल मिट्ठू को लेकर डॉक्टर के पास पहुंच गए. डॉक्टर्स ने मिट्ठू की डिजिटल रेडियोग्राफी करवाई.
- मिट्ठू की बीमारी सुन माथे पर आया पसीना
रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टर ने जो बातें कहीं, उसे सुनकर श्याम लाल के माथे पर आ गए. डॉक्टर ने श्याम लाल को बताया कि मिट्ठू के पेल्विक में एक अंडा फंसा हुआ है. एक्स्ट्रा लार्ज साइज का होने की वजह से वह नेचुरल तरीके से बाहर नहीं निकल पा रहा है. यहां तक तो बात ठीक थी, इसके आगे डॉक्टर ने जो कहा, वह सभी को परेशान करने वाली थी. डॉक्टर ने बताया कि जल्द ही उसको सही इलाज नहीं दिया गया तो मिट्ठू की जान पर भी बन सकती है. यह सुनकर टिया के माथे पर पसीना बह चला था. - अब सर्जरी ही बचा था जान बचाने का रास्ता
अपनी पोती की यह हालत देख श्याल लाल ने मिट्ठू का हर संभव इलाज कराने का फैसला किया. इलाज की शुरूआत कोलकाता से हुई. डॉक्टर्स ने क्रीम की मदद से पेल्विक में फंसे अंडे को बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा. आखिर में, डॉक्टर्स ने सलाह दी कि मिट्ठू की जान बचाने का एक ही रास्ता है कि सर्जरी का पेल्विक में फंसे अंडे को बाहर निकाला जाए. सर्जरी के लिए टिया और श्यामलाल राजी भी हो गए. लेकिन कोलकाता में पक्षियों का कोई डॉक्टर ही नहीं था, जो उसकी सर्जरी कर सके. नतीजतन, उन्हें सर्जनी के लिए दिल्ली जाने की सलाह दी गई. - दिल्ली में भी आसान नहीं है मिट्ठू की सर्जरी
डॉक्टर्स की सलाह पर श्यामलाल मिट्ठू को लेकर दिल्ली आने का फैसला कर लिया. दिल्ली निकलने से पहले कोलकाता के डॉक्टर्स ने श्यामलाल को बताया कि कैल्शियम इकट्ठा होने की वजह से अंडा इतना बड़ा हो गया है कि वह नेचुरल तरीके से बाहर नहीं निकल पा रहा है. मेडिकल की भाषा में ऐसी स्थिति को ‘एग-बाइंडिंग’ कहते हैं. ऐसी स्थिति में पेल्विक की सर्जरी बेहद जटिल है. साथ ही, इस सर्जरी का खर्च करीब 1.5 लाख रुपए तक आ सकता है. हालांकि दिल्ली के डॉक्टर्स कुछ ऐसा रास्ता निकालने की कोशिश में हैं, जिससे सर्जरी ना करनी पड़े.
पक्षियों में जानलेवा होती है एग-बाइंडिंग
वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट्स के अनुसार, पक्षियों में कैल्सियम की वजह से एग-बाइंडिंग की समस्या बेहद गंभीर होती है. इस समस्या के चलते पक्षियों की जान तक जा सकती है. कई बार लुब्रिकेंट के जरिए पक्षियों के पेल्विक में फंसे अंडे को बाहर निकाल लिया जाता है. जब ये रास्ते फेल जो जाते हैं तो सर्जरी ही इकलौता ऑप्शन बचता है. इस सर्जरी के लिए देश में सिर्फ कुछ चुनिंदा शहरों में ही डॉक्टर मौजूद हैं, जिसमें मुंबई, दिल्ली और चेन्नई शामिल हैं. कोलकाता में सर्जरी की सुविधा ना होने की वजह से मिट्ठू को दिल्ली लाना पड़ रहा है.
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Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें
