मालवीय नगर अग्निकांड: लोगों की जान बचाने को फूंक दिए थे 2 लाख के गद्दे, अब रोजी-रोटी के लिए तरसा वही दिलेर

Malviya Nagar Fire hero fights for livelihood: कुछ दिन पहले दिल्ली के मालवाय नगर इलाके में एक रेस्टोरेंट में भीषण अग्निकांड हुआ था. जिसमें 23 लोगों की मौत हो गई थी. फ्लॉरिश स्टे नाम के ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट लाइसेंस वाले इस रेस्टोरेंट में जब आग लगी थी तो लोगों को बचाने के लिए सबसे पहले 62 वर्षीय रियाजुद्दीन मंसूरी मसीहा बनकर आए थे. दिलेर मंसूरी ने इस आग में लोगों को बचाने के लिए करीब 2 लाख रुपये के गद्दे हवन कर दिए थे लेकिन आज उनके सामने बड़ी मुसीबत आ गई है.

लोगों की जान बचाने के लिए अपनी दुकान के सारे गद्दे सड़क पर बिछा देने वालो रियाजुद्दीन मंसूरी आज रोजी-रोटी के लिए तरस रहे हैं. इनकी दिलेरी और मानवता के लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने खुद इन्हें सम्मानित किया था. 1 लाख 21 हजार रुपये के प्राइज के साथ ही इन्हें गुड समैरिटन’ का सम्मान भी दिया था, लेकिन वही बहादुर मंसूरी आज अपनी दुकान नहीं चला पा रहे हैं.

बता दें कि मंसूरी उसी रेस्टोरेंट के सामने गद्दों की दुकान चलाते हैं, जहां 3 जून को भीषण आग लगी थी और भारतीय लोगों के साथ ही विदेशी भी जलकर मर गए थे. हौज रानी स्थित फ्लौरिश स्टे में जब आग लगी तो इन्होंने अपनी दुकान के सारे गद्दे सड़क पर बिछा दिए, ताकि छलांग लगाकर बचने वाले लोग सुरक्षित गिर सकें. इस घटना में 23 लोगों की मौत हो गई, हालांकि बहुत सारे लोग उन गद्दों पर कूदकर बच गए.

लेकिन इस घटना के लगभग एक महीने बाद, गुरुवार को मंसूरी ने जब अपनी सड़क किनारे की दुकान दोबारा खोली तो वे परेशान हो गए. रेस्टोरेंट की आग के बाद से पुलिस ने सड़क पर बैरिकेडिंग लगाए हुए हैं, ऐसे में कोई भी गाड़ी अंदर नहीं घुस पा रही है और ग्राहक ही नहीं आ पा रहे.

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक मंसूरी ने बताया, “पुलिस ने यहां बैरिकेड लगा दिए हैं.वे कह रहे हैं कि जांच पूरी होने तक इन्हें नहीं हटाएंगे. मुझे कोई ग्राहक नहीं मिल रहा है.” उन्होंने कहा कि यह स्थिति अगले कुछ हफ्तों तक बनी रह सकती है.

मंसूरी की दुकान उस बेड एंड ब्रेकफास्ट के ठीक सामने है, ऐसे में बेरिकेडिंग से सबसे ज्यादा नुकसान उसी दुकान को हो रहा है. मंसूरी ने जब लोगों को बचाने के लिए गद्दे सड़क पर डाले थे तो इस काम में करीब 2 लाख रुपये के गद्दे और सामान का नुकसान हुआ था लेकिन उनकी बहादुरी की तारीफ हुई. दिल्ली सरकार ने उन्हें 1.21 लाख रुपये दिए और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उन्हें ‘गुड समैरिटन’ का सम्मान दिया.

मंसूरी ने बताया, “आग लगने वाले दिन मेरी दुकान में आग नहीं लगी, लेकिन पूरे सामान पर काला धुआं जमा हो गया था.सब कुछ साफ करना पड़ा. पहले अधिकारियों ने दुकान खोलने नहीं दी, अब जब खोली तो कोई ग्राहक नहीं आ रहा है.’

आग वाले दिन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने, उनके बेटे और अन्य स्थानीय लोगों ने मिलकर कम से कम 8 से 10 लोगों की जान बचाई.“मैंने अपने नुकसान के बारे में नहीं सोचा. किसी की जान से बढ़कर कुछ नहीं है.23 लोगों की मौत बहुत बड़ी त्रासदी है, लेकिन हम भगवान का शुक्र अदा करते हैं कि कुछ लोग बच गए.”

सिर्फ मंसूरी ही नहीं इस रेस्टोरेंट वाली सड़क पर दूसरे दुकानदार भी परेशान हैं.53 वर्षीय मोहम्मद शफीक, जो इलेक्ट्रिकल सामान की दुकान चलाते हैं, कहते हैं कि इस महीने उनकी कमाई सामान्य से सिर्फ 10% रह गई है.“बैरिकेड की वजह से लोग गाड़ियां अंदर नहीं ला पा रहे हैं. कई लोग यहां आने से डर रहे हैं. मेरे परिवार में सात सदस्य हैं.बच्चे स्कूल और कॉलेज में पढ़ते हैं.मैं अकेला कमाता हूं.बहुत चिंता है.”

आग की घटना के बाद दिल्ली सरकार की सीलिंग ड्राइव में आसपास के ज्यादातर गेस्टहाउस और होटल बंद हो गए हैं ऐसे में बाहर से यहां आकर रहने वालों को परेशानी हो रही है और किराया भी ज्यादा देना पड़ रहा है.

मंसूरी जैसे लोग दिखाते हैं कि मुसीबत के समय इंसानियत अभी भी जिंदा है.लेकिन अब उन्हें अपनी रोजी-रोटी की चिंता सता रही है.बैरिकेड हटने और दुकानों के सामान्य होने का इंतजार जारी है.

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