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AURA एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित पनडुब्बी है, जो बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के पानी के भीतर खुद रास्ता तय कर सकती है. इसमें आधुनिक सेंसर और AI सिस्टम लगाए गए हैं, जो आसपास के वातावरण को समझकर नेविगेशन में मदद करते हैं.
नई दिल्ली: भारत में तकनीक और स्टार्टअप क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. इसी कड़ी में पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के छात्र खालिद और उनकी टीम ने एक अनोखा प्रोजेक्ट ‘AURA’ तैयार किया है. यह एक पूरी तरह से ऑटोनॉमस, यानी खुद चलने वाली पनडुब्बी है. इसे विशेष रूप से सर्च एंड रेस्क्यू और पानी के अंदर रिसर्च के लिए डिजाइन किया गया है. इस प्रोजेक्ट को गुजरात सरकार की एक समस्या के समाधान के रूप में विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य देश में ही सस्ती और स्वदेशी तकनीक तैयार करना है.
AURA की खासियत
AURA एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित पनडुब्बी है, जो बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के पानी के भीतर खुद रास्ता तय कर सकती है. इसमें आधुनिक सेंसर और AI सिस्टम लगाए गए हैं, जो आसपास के वातावरण को समझकर नेविगेशन में मदद करते हैं. इसका उपयोग सर्च एंड रेस्क्यू मिशन के साथ-साथ पानी के भीतर मौजूद वनस्पति (फ्लोरा) और जीव-जंतुओं (फौना) की खोज और अध्ययन में किया जा सकता है.
पानी की दुनिया को समझने की पहल
प्रोजेक्ट से जुड़े छात्र खालिद का कहना है कि इंसान अब तक पानी के भीतर की दुनिया का बहुत छोटा हिस्सा ही जान पाया है. AURA जैसे प्रोजेक्ट की मदद से झीलों, नदियों और समुद्र में छिपी नई जानकारियों को सामने लाया जा सकता है. भारत में जल स्रोतों की विविधता अधिक होने के कारण यह तकनीक शोध के क्षेत्र में काफी उपयोगी साबित हो सकती है.
कम लागत में बड़ा नवाचार
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम लागत है. जहां सामान्य पनडुब्बियों की कीमत 4 से 5 लाख रुपये तक होती है, वहीं AURA को करीब 90 हजार रुपये में तैयार किया गया है. सॉफ्टवेयर और अन्य खर्चों को जोड़कर इसकी कुल लागत लगभग 1.8 लाख रुपये है. इस परियोजना के लिए टीम को गुजरात सरकार से 2.5 लाख रुपये की फंडिंग भी मिली है, जो इसकी उपयोगिता और महत्व को दर्शाता है.
लगातार हो रहा सुधार
AURA फिलहाल अपने पांचवें मॉडल में है और टीम इसे लगातार बेहतर बनाने में जुटी हुई है. वर्तमान में यह तकनीक TRL-5 स्तर पर है और इसे जल्द ही TRL-7 तक पहुंचाकर बाजार में उतारने की योजना है. टीम AI मॉडल जैसे YOLO को और उन्नत बना रही है, ताकि पनडुब्बी की सटीकता और कार्यक्षमता बढ़ाई जा सके. साथ ही, डिजाइन में सुधार कर पानी के भीतर घर्षण (ड्रैग) कम करने पर भी काम किया जा रहा है, जिससे बैटरी की क्षमता बढ़ सके.
पर्यावरण के अनुकूल तकनीक
AURA को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह जल पर्यावरण को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाती. इसमें किसी भी प्रकार के जहरीले तत्व का उपयोग नहीं किया गया है और यह पूरी तरह वॉटर-फ्रेंडली है. टीम का मानना है कि AURA जैसे स्वदेशी और कम लागत वाले प्रोजेक्ट भारत में अंडरवॉटर रोबोटिक्स के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल सकते हैं. इससे न केवल लागत में कमी आएगी, बल्कि देश में नई तकनीकों के विकास को भी मजबूती मिलेगी.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें
