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Matrimonial Detective Agency in Delhi: सिया-केतन जैसे खौफनाक और चर्चित मामलों के बाद माता-पिता बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद डरे हुए हैं. अब कुंडली मिलान का दौर पुराना हो चुका है. यही वजह है कि दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश में शादी से पहले प्राइवेट डिटेक्टिव से पार्टनर का कैरेक्टर, क्रिमिनल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया प्रोफाइल खंगालने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. अरेंज हो या लव मैरिज, धोखे से बचने के लिए लोग अब प्री-मैरिटल वेरिफिकेशन का सहारा ले रहे हैं.
पेरेंट्स नए ट्रेंड को देखकर डरे हुए हैं.
नई दिल्ली. शादी से पहले लड़का-लड़की की कुंडली मिलाने के ट्रेंड के बारे में दुनिया जानती है, लेकिन बदलते दौर में अब कुंडली के साथ-साथ कैरेक्टर, क्रिमिनल रिकॉर्ड, कर्ज और सोशल मीडिया प्रोफाइल भी खंगाली जा रही है. देश में सिया-केतन और सोनम राजा रघुवंशी जैसे चर्चित धोखाधड़ी और मर्डर केस के बाद प्री-मैरिटल वेरिफिकेशन का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. रिश्ता तय होने के बाद अब सिर्फ शादी की तैयारियां नहीं होतीं बल्कि पर्दे के पीछे शुरू होती है सच्चाई की पड़ताल. परिवार अब यह पुख्ता करना चाहता है कि सामने वाला जैसा दिख रहा है क्या वास्तव में वैसा ही है? यही वजह है कि दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश में प्री-मैरिटल वेरिफिकेशन का चलन तेजी से बढ़ा है.
बड़े और छोटे शहरों में जासूसी का क्रेज
साउथ दिल्ली के भीकाजी कामा प्लेस स्थित एस्कॉन डिटेक्टिव एजेंसी के मैनेजिंग डायरेक्टर संजय कपूर ने बताया कि पहले उनके पास हर महीने 10 से 15 प्री-मैरिटल वेरिफिकेशन के केस आते थे लेकिन अब यह संख्या लगभग दोगुनी हो गई है. शादी से पहले बैकग्राउंड वेरीफिकेशन के लिए प्राइवेट डिटेक्टिव का सहारा लेने वालों की संख्या में 30 से 35% का इजाफा हुआ है. चौंकाने वाली बात यह है कि बड़े शहरों के साथ-साथ अब छोटे शहरों से भी ऐसे मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.
जांच मुख्य रूप से चार तरह की शादियों में कराई जा रही है
• अरेंज मैरिज (पारिवारिक पृष्ठभूमि जानने के लिए)
• लव मैरिज (भरोसे की पुष्टि के लिए)
• री-मैरिज (पिछले तलाक या विवाद के कारणों के लिए)
• एनआरआई मैरिज (विदेश में नौकरी और नागरिकता की सच्चाई के लिए)
आंकड़ों के मुताबिक, करीब 70 प्रतिशत मामलों में कैरेक्टर, सोशल स्टेटस और फैमिली बैकग्राउंड की जांच कराई जाती है जबकि बाकी मामलों में आपराधिक रिकॉर्ड, वित्तीय धोखाधड़ी और अन्य कानूनी पहलुओं की पड़ताल की जाती है.
क्यों डर रहे पेरेंट्स?
महानगरों में न्यूक्लियर फैमिली (एकल परिवार) का चलन बढ़ने और सोशल मीडिया के जरिए अजनबियों से मेल-मिलाप के कारण धोखाधड़ी के मामले बढ़े हैं. हाल के दिनों में सिया-केतन और सोनम राजा रघुवंशी जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों ने माता-पिता को झकझोर कर रख दिया है, जहां शादी के बाद गंभीर फाइनेंशियल चीटिंग, छिपाए गए आपराधिक रिकॉर्ड और हिंसा की बातें सामने आईं. आज के दौर में सिर्फ बाहरी पहनावे और बातों से किसी के असली चरित्र का अंदाजा लगाना नामुमकिन हो गया है. पेरेंट्स इस बात से डरे हैं कि उनकी उम्र भर की कमाई और बच्चों की जिंदगी किसी गलत इंसान के चक्कर में तबाह न हो जाए. इसी खौफ के कारण अरेंज ही नहीं बल्कि लव मैरिज में भी माता-पिता बच्चों के पार्टनर का प्री-मैरिटल बैकग्राउंड चेक कराने को मजबूर हैं.
राहुल (Case Study)
दिल्ली के रहने वाले राहुल अपनी बहन की शादी से पहले होने वाले दूल्हे और उसके परिवार का प्री-मैरिटल वेरिफिकेशन करा रहे हैं. राहुल कहते हैं कि हाल के चर्चित मामलों के बाद परिवार कोई जोखिम नहीं लेना चाहता. उनका मानना है कि प्यार की शादी हो या अरेंज मैरिज, भरोसे के साथ सच्चाई की पुष्टि भी जरूरी है.
फैमिली कोर्ट लॉयर मेघना
फैमिली कोर्ट की वकील मेघना का कहना है कि संयुक्त परिवार कम होने और रिश्तों में बढ़ते विवादों के बीच कई परिवार शादी से पहले पूरी जानकारी हासिल करना चाहते हैं. हालांकि, किसी भी जांच के दौरान कानून और निजता के अधिकार का सम्मान किया जाना भी उतना ही जरूरी है.
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डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में इन्होंने अपनी कलम से जटिल विषयों को …और पढ़ें
