नई दिल्ली. अब घर में रखे पुराने और अनुपयोगी कपड़े फेंकने की बजाय उन्हें दान कर पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तीकरण में योगदान दिया जा सकेगा. दिल्ली सरकार ने मंगलवार को ‘ओल्ड क्लोथ्स डोनेशन प्रोजेक्ट’ की शुरुआत की. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की मौजूदगी में डीएमआरसी, डीएमआरसी लेडीज वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन (DLWO), राज्य शहरी आजीविका मिशन (SULM) और टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग संस्थाओं के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए.
इस परियोजना के तहत पहले चरण में दिल्ली मेट्रो के 10 प्रमुख स्टेशनों पर ‘अर्पण केंद्र’ स्थापित किए जाएंगे, जहां नागरिक सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक अपने पुराने कपड़े दान कर सकेंगे. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह पहल टेक्सटाइल कचरे को कम करने, सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने कहा कि सरकार पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तीकरण को साथ लेकर आगे बढ़ रही है.
इन 10 मेट्रो स्टेशनों पर खुलेंगे ‘अर्पण केंद्र’
पहले चरण में शाहदरा, डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल, मालवीय नगर, हौज खास, द्वारका, मोहन एस्टेट, लाजपत नगर, मयूर विहार फेज-1, पंजाबी बाग वेस्ट और शालीमार बाग मेट्रो स्टेशनों पर संग्रह केंद्र शुरू किए जाएंगे.
दान किए गए कपड़ों का क्या होगा?
एकत्र कपड़ों को उनकी उपयोगिता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा. इस्तेमाल योग्य कपड़ों से स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाएं बैग, परिधान और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करेंगी, जबकि अनुपयोगी कपड़ों को रीसाइक्लिंग के जरिए नए धागे और कपड़ों में बदला जाएगा. धार्मिक वस्त्रों का भी सम्मानजनक तरीके से पुन: उपयोग किया जाएगा.
महिलाओं को मिलेगा रोजगार
इस परियोजना का संचालन राज्य शहरी आजीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं करेंगी. उन्हें अपसाइक्लिंग और रीसाइक्लिंग का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी. रीसाइक्लिंग से तैयार उत्पादों की बिक्री भी इन केंद्रों पर की जाएगी.
QR कोड स्कैन कर ऐसे करें कपड़े दान
पुराने कपड़े दान करने के लिए नागरिकों को ‘अर्पण केंद्र’ पर लगे QR कोड को स्कैन कर डिजिटल फॉर्म भरना होगा. नाम, मोबाइल नंबर और कपड़ों का विवरण दर्ज करने के बाद सत्यापन किया जाएगा और दानकर्ता को तुरंत डिजिटल प्रमाणपत्र मिलेगा. सभी दान का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा, जिससे रियल-टाइम मॉनिटरिंग और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि फिलहाल 10 केंद्रों से शुरुआत की जा रही है और भविष्य में इस पहल का विस्तार दिल्ली के अन्य क्षेत्रों तक भी किया जाएगा.
