दिल्ली के कनॉट प्लेस में है 200 साल पुराना शिव मंदिर, पांडवों से जुड़ी है मान्यता, आज भी रहस्य बना है शिवलिंग

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कनॉट प्लेस में है 200 साल पुराना शिव मंदिर, पांडवों से जुड़ी है मान्यता

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दिल्ली के कनॉट प्लेस में 200 साल पुराना प्राचीन शिव मंदिर स्थित है. मान्यता है कि इसका संबंध पांडवों से है और अर्जुन ने यहाँ तपस्या की थी. मंदिर का शिवलिंग लगातार छोटा होता जा रहा है. जो आज भी एक रहस्य बना हुआ है. यहां सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है.

नई दिल्लीः दिल्ली के कनॉट प्लेस की चहल-पहल और आधुनिक इमारतों के बीच एक ऐसा प्राचीन मंदिर भी मौजूद है, जिसका इतिहास करीब 150 से 200 साल पुराना बताया जाता है. यह है प्राचीन शिव मंदिर. जिसे स्थानीय तौर पर पांडवों से जुड़ा मंदिर भी माना जाता है. मंदिर से जुड़ी कई मान्यताएं आज भी लोगों को यहां खींचकर लाती हैं. खास बात यह है कि मंदिर की देखरेख एक ही परिवार की चार पीढ़ियों से होती आ रही है.

150-200 साल पुराना है मंदिर
मंदिर के पंडित प्रकाश कौशिक बताते हैं कि उनके परदादा, दादा, पिता और अब वह खुद इस मंदिर से जुड़े हुए हैं. यानी उनका परिवार करीब चार पीढ़ियों से यहां सेवा कर रहा है. पंडित प्रकाश के मुताबिक मंदिर की सीमा का निर्माण जयपुर के राजा जय सिंह ने करवाया था. मंदिर में मौजूद प्राचीन शिवलिंग को लेकर मान्यता है कि इसका संबंध पांडवों के समय से है. कहा जाता है कि अर्जुन ने यहां तपस्या की थी और भगवान शंकर ने उन्हें दर्शन दिए थे. मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने अर्जुन को धनुष-बाण भी प्रदान किया था. इसी वजह से इस स्थान को पांडवों से जोड़कर देखा जाता है.

मंदिर में कभी हिंदी के साथ लिखी थी उर्दू
इस मंदिर के इतिहास से जुड़ी एक और दिलचस्प बात सामने आती है. पंडित प्रकाश कौशिक के मुताबिक मंदिर में पहले हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में लिखावट मौजूद थी. उस समय भारत और पाकिस्तान का बंटवारा नहीं हुआ था और यहां काम करने वाले कारीगरों ने दोनों भाषाओं में लिखावट की थी. हालांकि बाद में कुछ श्रद्धालुओं ने मंदिर में उर्दू में लिखे होने को लेकर सवाल उठाए. इसके बाद परिवार के बुजुर्गों की सलाह से उस हिस्से को ढक दिया गया. आज वहां पहले जैसी लिखावट दिखाई नहीं देती, लेकिन यह मंदिर के पुराने इतिहास का एक हिस्सा रही है.

छोटा होता जा रहा है प्राचीन शिवलिंग
मंदिर में मौजूद शिवलिंग को लेकर एक और दावा लोगों का ध्यान खींचता है. पंडित प्रकाश कौशिक के मुताबिक, यहां का शिवलिंग किसी ने बनाकर स्थापित नहीं किया था, बल्कि यह मंदिर के समय से ही यहां मौजूद है. उनका कहना है कि पिछले करीब 40 वर्षों में शिवलिंग के आकार और ऊंचाई में बदलाव आया है और यह पहले की तुलना में छोटा दिखाई देता है. शिवलिंग पर मौजूद जनेऊ जैसी आकृति को भी मंदिर की खास विशेषता माना जाता है. यही वजह है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं के बीच इस शिवलिंग को लेकर अलग तरह की आस्था देखने को मिलती है.

सोमवार को उमड़ती है भक्तों की भीड़
भगवान शिव के भक्तों के लिए सोमवार का दिन खास होता है और इस मंदिर में भी सोमवार को अच्छी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. पंडित प्रकाश बताते हैं कि सुबह करीब 5 बजे से रात 10:30-11 बजे तक भक्तों का आना-जाना लगा रहता है. सोमवार को मंदिर में पूजा-पाठ, रुद्राभिषेक और भंडारे का आयोजन भी किया जाता है. भक्त भगवान शिव को भोग लगाते हैं और दर्शन के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं.

जानिए मंदिर का समय
अगर आप भी इस प्राचीन मंदिर में दर्शन करना चाहते हैं तो शनिवार और मंगलवार को मंदिर सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक खुलता है. वहीं बाकी दिनों में मंदिर सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है.

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Prashun Singh

प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.

इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…

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