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बिहार के मधुबनी की 70 वर्षीय नर्मदा देवी हस्तकरघा कला की मिसाल हैं. उन्होंने 1970 में आर्थिक तंगी के कारण घूंघट छोड़ करघा संभाला था. आज उनकी मधुबनी साड़ियों की धूम विदेशों तक है. वे भारत टेक्स एक्सपो 2026 में आकर्षण का केंद्र बनी हैं. उन्होंने हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है. वे महिलाओं को ट्रेनिंग देने के लिए विदेश भी जा चुकी हैं.
नई दिल्लीः कुछ कहानियां सिर्फ सफलता की नहीं होतीं, बल्कि हिम्मत, आत्मविश्वास और बदलाव की मिसाल बन जाती हैं. बिहार के मधुबनी की 70 वर्षीय नर्मदा देवी की कहानी भी ऐसी ही है. परिवार की आर्थिक तंगी ने उन्हें घूंघट की परंपरा से बाहर निकलकर करघा संभालने के लिए मजबूर किया, लेकिन उन्होंने इसे मजबूरी नहीं अपनी ताकत बना लिया. 1970 में हाथों से साड़ी बुनने का जो सफर शुरू हुआ वह आज देश की सीमाएं पार कर चुका है. अपने हुनर और अथक मेहनत के दम पर नर्मदा देवी न केवल हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी हैं बल्कि भारतीय हस्तकरघा की पहचान को भी दुनिया तक पहुंचाने का काम कर रही हैं. 70 साल की उम्र में भी उनका उत्साह, आत्मविश्वास और काम के प्रति समर्पण आज की पीढ़ी के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है. नर्मदा देवी इन दिनों भारत टेक्स एक्सपो 2026 में सरस आजीविका के तहत आई हुई हैं और लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हैं. लोग उनके साथ खूब सेल्फी ले रहे हैं.
22 साल की उम्र से कर रही काम
नर्मदा देवी ने खास बातचीत में बताया कि वह 22 साल की उम्र से काम कर रही हैं. 1970 के दशक में जब भारत सरकार की ओर से मेले लगाए जाते थे. तब से वह उसमें शामिल हो रही हैं. पहले मधुबनी पेंटिंग का काम करती थी. उसके बाद हाथों से साड़ियां बनाने का काम किया और वर्तमान में शिल्पग्राम के निदेशक भी हैं. उन्होंने बताया कि उनके ससुराल में खेती किसानी का माहौल था. महिलाएं उस वक्त ज्यादा काम नहीं करती थी लेकिन उस दौर में उन्होंने अपने घर के आर्थिक हालातों को सही करने के लिए 9 महीने के बेटे को गोद में लेकर घूंघट हटाया और काम शुरू कर दिया. आज वह 70 साल की हो गई हैं. अभी भी काम कर रही हैं और देश-विदेश घूम चुकी हैं. देश-विदेश में भी जाकर के महिलाओं को ट्रेनिंग देती हैं. यही नहीं नर्मदा देवी ने यह भी बताया कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी वह मिल चुकी हैं और उन्होंने भी इनको काफी सहयोग किया. वह कहती हैं कि वह 1970 के दौर में बिहार की पहली महिला बिजनेस थी. उस वक्त महिलाएं उतना काम नहीं करती थी. आज मधुबनी साड़ियों की बात करें तो सभी प्रकार की मधुबनी साड़ियां वह बनाती हैं.
अपनी बहू को भी सिखाया काम, हटाया घूंघट
नर्मदा देवी ने बताया कि आज उनके पोते पोतियां हैं. वह दादी भी हैं और नानी भी. उनका एक पोता इंजीनियर बन चुका है और आज वह अपनी बहू को भी घुंघट हटाकर अपने साथ शामिल कर चुकी हैं. सभी को आगे बढ़ा रही है. नर्मदा देवी की बहू शिल्पी झा ने बताया कि उनकी सास ने कभी भी किसी भी तरह का कोई दबाव नहीं बनाया. हमेशा आगे बढ़ाया. यही वजह है कि आज उनकी वजह से बिहार की ज्यादातर महिलाएं 20 से 25 हजार रुपए कमा रही है. इस काम को खुशी-खुशी कर रही है. सबका घर चल रहा है. यही वजह है कि दिल्ली में आयोजित इतने बड़े-बड़े इवेंट में आज बिहार की महिलाएं आ रही है और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
