जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन कराने में देरी पड़ेगी भारी! कानून में होने जा रहा बदलाव, अब कोर्ट से लेना होगा आदेश

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जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन कराने में देरी पड़ेगी भारी! कानून में बदलाव संभव

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केंद्र सरकार देश में जन्म-मृत्यु पंजीकरण कानून में बड़ा बदलाव करने जा रही है. इसके ल‍िए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रस्‍ताव केंद्रीय कैब‍िनेट के सामने रखा है. इस नए प्रस्‍ताव के अनुसार पंजीकरण कराने में 2 साल से ज्यादा देरी करने पर अब प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश लेना होगा.

भारत में अब जन्‍म और मृत्‍यु पंजीकरण को लेकर एक्‍ट में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. इससे न‍ियम और कठ‍िन हो जाएंगे और लोगों की मुश्‍क‍िल बढ़ेगी.

Birth-Death Registration: जन्म और मृत्यु पंजीकरण कानून में केंद्र सरकार बड़ा बदलाव करने जा रही है. इसके लागू होते ही लोगों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. नए कानून के प्रस्ताव के मुताबिक अगर किसी बच्चे के जन्म या किसी व्यक्ति की मृत्यु का पंजीकरण समय पर नहीं कराया गया है तो आने वाले दिनों में उसे बनवाने में लोगों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है. पंजीकरण की प्रक्रिया काफी जटिल हो सकती है.

जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार जन्म और मृत्यु पंजीकरण कानून (Registration of Births and Deaths Act) में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है. प्रस्ताव में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति बच्चे के जन्म के दो साल बाद जन्म प्रमाण पत्र बनवाने जाता है या निधन के दो साल बाद परिजन मृत्यु का पंजीकरण की कोशिश करेंगे तो उन्हें इसके लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) का आदेश लेना अनिवार्य होगा.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों से जानकारी मिली है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संशोधन प्रस्ताव को बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट के सामने रखा है. अब इस पर फाइनल फैसला होना बाकी है.

क्या है नए प्रस्ताव में?

अभी तक के नियमों के अनुसार अगर कोई व्यक्ति जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक साल तक या उससे भी ज्यादा समय में नहीं कराता है और उसके बाद कराने जाता है तो उसको संबंधित जिलाधिकारी (DM), उप-जिलाधिकारी (SDM) या कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति लेना जरूरी होता है. एक एप्लिकेशन पर मुहर के बाद ये काम हो जाता है.

लेकिन अब नए नियमों के मुताबिक 2 साल की देरी तक को डीएम या एसडीएम की अनुमति मान्य होगी, लेकिन इससे ज्यादा समय हो जाने पर अब लोगों को कोर्ट के चक्कर काटने पड़ेंगे. दो साल से ज्यादा देर हो जाने पर अब प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट से अनुमति लेनी होगी.

क्या क्या है नए प्रस्ताव में?

  1. 21 दिन के भीतर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराना अनिवार्य रहेगा.
  2. 30 दिन से 1 साल तक की देरी होने पर जिला रजिस्ट्रार या अधिकृत अधिकारी की लिखित अनुमति, निर्धारित शुल्क और दस्तावेजों के साथ पंजीकरण कराया जा सकेगा.
  3. 1 से 2 साल तक की देरी होने पर मौजूदा व्यवस्था के अनुसार DM/SDM या कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति पर्याप्त होगी.
  4. 2 साल से अधिक देरी होने पर केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही पंजीकरण हो सकेगा.

सरकार यह बदलाव क्यों कर रही है?

सरकार से सभी बदलाव कई कारणों से कर रही है.

  • . सरकार का मानना है कि जन्म और मृत्यु का रिकॉर्ड समय पर और डिजिटल रूप से दर्ज होना बेहद जरूरी है.
  • . इस रिकॉर्ड के समय पर दर्ज होने से सरकारी योजनाओं की बेहतर योजना बन सकेगी.
  • . जनसंख्या और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े अधिक सटीक होंगे.
  • . फर्जी या गलत तरीके से देर से कराए जाने वाले पंजीकरण पर रोक लगेगी.
  • . डिजिटल सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) को और मजबूत बनाया जा सकेगा.

ऐसे में अगर ये संशोधन प्रस्ताव लागू हो जाता है तो आने वाले दिनों में ये पंजीकरण कराने कठिन होंगे.

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प्रिया गौतमSenior Correspondent

Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें

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