हथिनीकुंड बैराज में खूब आ रहा पानी, पर दिल्‍ली में यमुना का पेट अभी तक क्‍यों है खाली?

होमताजा खबरDelhi

हथिनीकुंड बैराज में खूब आ रहा पानी, पर दिल्‍ली में यमुना अभी तक खाली क्‍यों?

Last Updated:

Yamuna River News: पर्वतीय राज्यों में लगातार तेज बारिश हो रही है. आमतौर पर ऐसा देखा जाता है कि मानसून सीजन में पानी की अधिकता होने से नदियों के निचले इलाकों के प्रवाह में भी तेजी आती है. हालांकि, इस बार अभी तक यमुना नदी में ऐसा नहीं देखा जा रहा है.

उच्‍च पवर्तीय राज्‍यों में अच्‍छी बारिश के बावजूद यमुना में प्रवाह नहीं देखा जा रहा है. (फाइल फोटो)

Yamuna River News: मानसून के दौरान हथिनीकुंड बैराज (एचकेबी) में यमुना में पानी की आवक बढ़ गई है. इसके बावजूद नदी में छोड़े जा रहे पानी की मात्रा में वैसी बढ़ोतरी नहीं हुई है, जैसी की होनी चाहिए. ऐसे में एक्‍सपर्ट्स ने यमुना की सेहत और प्रदूषण को लेकर गंभीर चिंता जताई है. उनका कहना है कि अतिरिक्त पानी का अधिकांश हिस्सा नहरों की ओर मोड़ दिया जा रहा है, जिससे दिल्ली में यमुना अपनी प्राकृतिक सफाई क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रही है.

साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपुल (SANDRP) की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के प्रति घंटे के डिस्चार्ज आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि मानसून शुरू होने के बाद हथिनीकुंड बैराज पर जल प्रवाह लगातार बढ़ा, लेकिन कई दिनों तक नदी में छोड़ा गया पानी लगभग 9.97 क्यूमेक (करीब 352 क्यूसेक) पर ही स्थिर रहा.

रिपोर्ट के मुताबिक, 1 से 5 जुलाई के बीच बैराज पर औसत दैनिक जल आवक लगभग 192 क्यूमेक से बढ़कर 242 क्यूमेक तक पहुंच गई, लेकिन नदी में छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा में कोई बदलाव नहीं हुआ. 8 और 9 जुलाई को जल आवक क्रमशः लगभग 390 और 442 क्यूमेक तक पहुंचने के बावजूद अधिकांश समय नदी में प्रवाह न्यूनतम स्तर पर ही बना रहा. 14 जुलाई तक भी यही स्थिति बनी रही.

SANDRP के सदस्य भीम सिंह रावत ने कहा कि मानसून के दौरान नदी में उसके प्राकृतिक प्रवाह का कम से कम 75 प्रतिशत पानी छोड़ा जाना चाहिए, जबकि न्यूनतम स्थिति में भी उपलब्ध जल का 50 प्रतिशत नदी में बहना आवश्यक है. उनका कहना है कि वर्तमान में लागू 352 क्यूसेक का प्रवाह केवल गर्मियों और कम प्रवाह वाले मौसम के लिए तय किया गया था, इसे मानसून में भी जारी रखना उचित नहीं है.

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (एनआईएच) ने 6 वर्ष पहले यमुना के लिए न्यूनतम 812 क्यूसेक प्रवाह की सिफारिश की थी, लेकिन जल शक्ति मंत्रालय ने अब तक इसे अधिसूचित नहीं किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सीवेज ट्रीटमेंट प्‍लांट और प्रदूषण नियंत्रण परियोजनाएं पर्याप्त नहीं होंगी, जब तक यमुना को उसका आवश्यक प्राकृतिक प्रवाह सुनिश्चित नहीं किया जाता.

About the Author

Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *