यमुना के पानी पर चौंकाने वाली रिसर्च, मछलियों के अंगों में असामान्य बदलाव से बढ़ी चिंता

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यमुना के पानी पर चौंकाने वाली रिसर्च, मछलियों में असामान्य बदलाव से बढ़ी चिंता

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अध्ययन के दौरान कालिंदी कुंज क्षेत्र, जहां यमुना में सबसे अधिक झाग बनता है, वहां के पानी के नमूनों में रखी गई मछलियों पर सबसे गंभीर प्रभाव देखा गया. इस परिणाम ने न केवल शोध कर रहे छात्रों बल्कि प्रोफेसरों को भी हैरान कर दिया.

नई दिल्ली: राजधानी में बहने वाली यमुना नदी के पानी को लेकर दौलत राम कॉलेज की एक शोध रिपोर्ट ने गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं. कॉलेज की बायोकेमिस्ट्री लैब द्वारा किए गए इस अध्ययन में यमुना के अलग-अलग हिस्सों से पानी के नमूने लेकर उनमें जेब्राफिश रखकर परीक्षण किया गया. इसका उद्देश्य यह समझना था कि नदी के विभिन्न हिस्सों का पानी जीवों पर किस तरह का प्रभाव डालता है.

मछलियों पर सबसे गंभीर प्रभाव
अध्ययन के दौरान कालिंदी कुंज क्षेत्र, जहां यमुना में सबसे अधिक झाग बनता है, वहां के पानी के नमूनों में रखी गई मछलियों पर सबसे गंभीर प्रभाव देखा गया. इस परिणाम ने न केवल शोध कर रहे छात्रों बल्कि प्रोफेसरों को भी हैरान कर दिया.

चौंकाने वाले नतीजे सामने आए
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया कि शोध के लिए यमुना के तीन स्थानों दिल्ली में प्रवेश बिंदु, मध्य धारा और निकास बिंदु—से पानी के नमूने लिए गए. इन नमूनों को अलग-अलग कंटेनरों में रखकर उनमें जेब्राफिश डाली गई. मात्र एक सप्ताह के भीतर ही चौंकाने वाले नतीजे सामने आए.

शरीर के अंगों में असामान्य वृद्धि
डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया कि कालिंदी कुंज के पानी में रखी गई मछलियों के शरीर के अंगों में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई. विशेष रूप से उनके दिल और रीढ़ की हड्डी के आकार में बदलाव पाया गया. इसके अलावा त्वचा, आंखों और अन्य अंगों पर भी नकारात्मक प्रभाव देखा गया. यह परिणाम यमुना के प्रदूषण स्तर की गंभीरता को दर्शाते हैं.

परिणाम संभावित खतरे के संकेत
डॉ. कुमार के अनुसार, यह शोध इस उद्देश्य से किया गया था कि यमुना के आसपास रहने वाले लोगों, खासकर हैंडपंप का पानी उपयोग करने वालों, पर इसके संभावित प्रभाव को समझा जा सके. हालांकि इंसानों पर अभी तक कोई प्रत्यक्ष अध्ययन नहीं हुआ है, लेकिन मछलियों पर मिले परिणाम संभावित खतरे की ओर संकेत करते हैं.

अलग-अलग शोध जारी
वहीं, डॉ. नरेंद्र कुमार ने यह भी बताया कि लैब में जेब्राफिश के माध्यम से आयुर्वेदिक दवाओं, जेनेटिक प्रभावों और खाद्य रंगों पर भी अलग-अलग शोध जारी हैं. खासकर जलेबी और लड्डू जैसे खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले रंगों के प्रभाव का परीक्षण किया जा रहा है, जिसके परिणामों का फिलहाल इंतजार है.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें

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