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Khandua Patta Saree: दिल्ली के भारत टेक्सटाइल एक्सपो में ओडिशा की पारंपरिक खंडुआ पट्टा साड़ियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. इन साड़ियों की खास बात यह है कि इन्हें उन्हीं पवित्र धागों से तैयार किया जाता है, जिनसे भगवान जगन्नाथ के वस्त्र बनाए जाते हैं. एक साड़ी को चार कारीगर करीब सात दिनों में हाथों से तैयार करते हैं. रथ, हाथी, पेड़-पौधों और पारंपरिक आकृतियों वाली इन साड़ियों की मांग अब कनाडा, अमेरिका और यूरोप समेत कई देशों में है. यह साड़ियां ओडिशा की समृद्ध हथकरघा परंपरा, धार्मिक आस्था और उत्कृष्ट शिल्पकला का अनूठा उदाहरण हैं.
नई दिल्ली: भगवान जगन्नाथ को जिन पवित्र धागों से वस्त्र पहनाए जाते हैं, उन्हीं धागों से तैयार की गई पारंपरिक साड़ियां आज देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अपनी खास पहचान बना रही हैं. दिल्ली में आयोजित भारत टेक्सटाइल एक्सपो में ओडिशा का एक स्टॉल लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. यहां प्रदर्शित साड़ियां अपनी खूबसूरत बुनाई के साथ-साथ धार्मिक आस्था और सदियों पुरानी परंपरा की वजह से लोगों का ध्यान खींच रही हैं. कारीगरों का कहना है कि भगवान जगन्नाथ के वस्त्र तैयार करने वाले शिल्पकार ही इन साड़ियों की बुनाई भी करते हैं. यही वजह है कि हर साड़ी में परंपरा, श्रद्धा और उत्कृष्ट हस्तशिल्प का अनूठा मेल देखने को मिलता है.
सात दिन में तैयार होती है एक साड़ी
ओडिशा हैंडलूम की प्रतिनिधि केतकी सेनापति ने बताया कि एक साड़ी तैयार करने में करीब सात दिन का समय लगता है. इसे चार कारीगर मिलकर पूरी तरह हाथों से बुनते हैं. साड़ी बनाने में उसी तरह के विशेष धागों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनसे भगवान जगन्नाथ के वस्त्र तैयार किए जाते हैं.
उन्होंने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया पारंपरिक तरीके से की जाती है. हर साड़ी में कारीगरों की मेहनत और वर्षों पुरानी कला की झलक दिखाई देती है.
विदेशों तक पहुंची ओडिशा की पहचान
केतकी सेनापति ने बताया कि इन हस्तनिर्मित साड़ियों की मांग लगातार बढ़ रही है. अब इनका निर्यात कनाडा, अमेरिका और यूरोप समेत कई देशों में किया जा रहा है. विदेशी ग्राहक भी इन साड़ियों की बुनाई, डिजाइन और धार्मिक महत्व को काफी पसंद कर रहे हैं. भारत टेक्सटाइल एक्सपो में आने वाले लोग जब इन साड़ियों के पीछे की कहानी जानते हैं, तो उन्हें खरीदने में खास रुचि दिखाते हैं. यह स्टॉल ओडिशा की समृद्ध हथकरघा परंपरा और भगवान जगन्नाथ से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने पेश कर रहा है.
‘खंडुआ पट्टा’ नाम से जाना जाता है यह कपड़ा
केतकी सेनापति ने बताया कि इस खास कपड़े को खंडुआ पट्टा कहा जाता है. यह कपड़ा बेहद हल्का होता है. इसी वजह से इसकी साड़ियां पहनने में काफी आरामदायक होती हैं. उन्होंने बताया कि साड़ियों की डिजाइन भी बेहद खास होती है. इनमें भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा से जुड़े प्रतीक उकेरे जाते हैं. साड़ी पर रथ, हाथी, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और पारंपरिक आकृतियां बनाई जाती हैं. यही डिजाइन इन साड़ियों को दूसरी साड़ियों से अलग पहचान देती है.
परंपरा और आधुनिक फैशन का अनोखा मेल
खंडुआ पट्टा साड़ियां पारंपरिक होने के साथ-साथ आधुनिक फैशन का भी शानदार उदाहरण हैं. इनकी खूबसूरत बुनाई और आकर्षक डिजाइन महिलाओं को खूब पसंद आती है. यही कारण है कि इनकी मांग लगातार बढ़ रही है. ओडिशा में तैयार होने वाला यह विशेष कपड़ा राज्य की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा माना जाता है. भारत टेक्सटाइल एक्सपो में इसकी मौजूदगी देश-विदेश के लोगों को ओडिशा की समृद्ध कला, संस्कृति और हस्तकरघा परंपरा से रूबरू करा रही है.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें
