Ghaziabad News : 50 किलो का घोड़ा, 500 किलो का मेक इन इंडिया…गाजियाबाद की खूबसूरती में चार चांद लगाएगा कबाड़, जानिए कैसे?

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Ghaziabad ki local news : गाजियाबाद नगर निगम कबाड़ से कलाकृतियां और बड़े स्ट्रक्चर तैयार करा रहा है, जो शहर की खूबसूरती बढ़ाने के साथ उसके इतिहास को भी बताएंगे. नगर निगम ने वेस्ट टू वंडर और वेस्ट टू आर्ट की पहल के तहत इन्हें शहर के प्रमुख चौराहों, मुख्य मार्गों और एंट्री-एग्जिट प्वाइंट पर लगवाएगा. कई कलाकृतियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. इनमें 50 किलो का घोड़ा, 500 किलो का मेक इन इंडिया और 500 किलो की आई लव गाजियाबाद कलाकृति मुख्य हैं. नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बताया कि गाजियाबाद नगर निगम कई वर्षों से वेस्ट टू वंडर के तहत काम कर रहा है. निगम का उद्देश्य केवल कबाड़ का निस्तारण करना नहीं बल्कि उससे ऐसी उपयोगी चीजें तैयार करना भी है, जो शहर की पहचान बन सकें.

गाजियाबाद. जिस कबाड़ को अब तक गंदगी और बेकार सामान माना जाता रहा है, वही अब गाजियाबाद की खूबसूरती बढ़ाने के साथ शहर के इतिहास को बताने का माध्यम बनेगा. नगर निगम ने वेस्ट टू वंडर और वेस्ट टू आर्ट की पहल को आगे बढ़ाते हुए कबाड़ से आकर्षक कलाकृतियां और बड़े स्ट्रक्चर तैयार कराने शुरू किए हैं. इन्हें शहर के प्रमुख चौराहों, मुख्य मार्गों और एंट्री-एग्जिट प्वाइंट पर लगाया जाएगा. आने वाले समय में लोगों को सड़क किनारे कबाड़ से बनी ऐसी कलाकृतियां नजर आएंगी जो न केवल शहर का सौंदर्य बढ़ाएंगी, बल्कि गाजियाबाद और उत्तर प्रदेश के इतिहास से भी परिचित कराएंगी.

लगाने के लिए सर्वे

नगर निगम लोहे, एल्यूमीनियम, खराब टायर और प्लास्टिक को अलग कर उनका रचनात्मक इस्तेमाल कर रहा है. इसके लिए एमएस ग्रुप को जिम्मेदारी दी गई है. फिलहाल कई कलाकृतियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. इनमें करीब 50 किलो वजन की घोड़े की कलाकृति, लगभग 500 किलो का मेक इन इंडिया और करीब 500 किलो की आई लव गाजियाबाद कलाकृति शामिल है. इसके अलावा करीब 400 किलो की वेलकम टू गाजियाबाद कलाकृति भी तैयार की गई है. नगर निगम की टीम इन कलाकृतियों को लगाने के लिए शहर में उपयुक्त स्थानों का सर्वे कर रही है.

पहले भी हो चुका काम

नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बताया कि गाजियाबाद नगर निगम पिछले कई वर्षों से वेस्ट टू वंडर के तहत काम कर रहा है. शहर के सौंदर्यीकरण के साथ मुख्य चौराहों, प्रमुख मार्गों और एंट्री-एग्जिट प्वाइंट को आकर्षक बनाने के लिए कबाड़ का इस्तेमाल किया जा रहा है. उनका कहना है कि निगम का उद्देश्य केवल कबाड़ का निस्तारण करना नहीं बल्कि उससे ऐसी उपयोगी और आकर्षक चीजें तैयार करना भी है जो शहर की पहचान बन सकें. नगर निगम इससे पहले भी इस तरह के प्रयोग कर चुका है. पिछले साल मेरठ रोड पर कबाड़ से म्यूजिकल स्क्वायर चौराहा तैयार किया गया था. शहर के कई पार्कों में भी कबाड़ से आकर्षक कलाकृतियां और स्ट्रक्चर तैयार कराए गए हैं. अब इसी प्रयोग को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है. निगम ऐसे स्ट्रक्चर भी तैयार करा रहा है जिनमें गाजियाबाद के इतिहास की झलक दिखाई देगी. कुछ कलाकृतियों के जरिए उत्तर प्रदेश के इतिहास और संस्कृति को भी दर्शाया जाएगा ताकि शहर से गुजरने वालों को इनके बारे में जानकारी मिले.

नगर आयुक्त के मुताबिक अगले एक महीने में शहर के प्रमुख चौराहों और एंट्री-एग्जिट प्वाइंट पर कलाकृतियों देखने को मिल सकती है. निगम का मानना है कि कबाड़ के इस रचनात्मक इस्तेमाल से एक तरफ शहर की खूबसूरती बढ़ेगी, दूसरी तरफ लोगों में कचरे के बेहतर इस्तेमाल और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता भी बढ़ेगी. इस तरह बेकार समझी जाने वाली सामग्री अब शहर के सौंदर्यीकरण में चार चांद लगाएगी.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…

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