अजब-गजब साधना! ना केमिकल, ना पेंट; 74 की उम्र में 'कुदरती रंगों' से मधुबनी कला में जान फूंक रहीं अंबिका देवी

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Ambika Devi Madhubani Painting Story: 74 वर्षीय अंबिका देवी 30 साल से मधुबनी पेंटिंग बना रही हैं और नई पीढ़ी को सिखा रही हैं. 2021 में बिहार राज्य पुरस्कार से सम्मानित, वे प्राकृतिक रंगों का उपयोग करती हैं. यह कला उनके लिए जीवन है, जिसे वे अपने हाथों से जीवित रख रही हैं.

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नई दिल्ली: बिहार के मधुबनी जिले की रहने वाली अंबिका देवी पिछले 30 वर्षों से मधुबनी पेंटिंग बना रही हैं. 74 वर्ष की उम्र में भी उनका उत्साह बिल्कुल कम नहीं हुआ है. वह सिर्फ खुद पेंटिंग नहीं बनातीं, बल्कि मधुबनी पेंटिंग की शिक्षिका के रूप में नई पीढ़ी को भी इस कला की बारीकियां सिखा रही हैं. उनके लिए यह सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि जीवन का सबसे बड़ा जुनून है.

फूलों, पत्तियों और मिट्टी से तैयार होते हैं प्राकृतिक रंग
अंबिका देवी की सबसे बड़ी खासियत है कि उनकी पेंटिंग्स में इस्तेमाल होने वाले रंग पूरी तरह प्राकृतिक होते हैं. गुलाब की पंखुड़ियों से लाल रंग, नीम की पत्तियों से हरा रंग और दीपक की कालिख से काला रंग तैयार किया जाता है. कागज़, मिट्टी और अन्य पारंपरिक सामग्री पर इन रंगों से बनाई गई पेंटिंग्स प्रकृति से उनके गहरे जुड़ाव को दिखाती हैं.

बचपन में मां को देखकर सीखी कला
अंबिका देवी बताती हैं कि बचपन में जब उनकी मां मधुबनी पेंटिंग बनाती थीं, तो वह उनके पास बैठकर घंटों देखा करती थीं. धीरे-धीरे उन्होंने खुद पेंटिंग बनानी शुरू की और फिर यही उनका जीवन बन गया. एक साल का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने अपनी कल्पना और अनुभव के आधार पर नई-नई डिजाइन बनानी शुरू की. उनका कहना है कि हर पेंटिंग दिल और दिमाग दोनों से तैयार होती है.

राज्य पुरस्कार ने बढ़ाया हौसला
साल 2021 में अंबिका देवी को मधुबनी कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए बिहार राज्य पुरस्कार स्टेट अवॉर्ड से सम्मानित भी किया गया. यह सम्मान उनके वर्षों की मेहनत और इस लोककला को जीवित रखने की लगन का परिणाम है.

हर पेंटिंग में लगती है कई दिनों की मेहनत
एक छोटी पेंटिंग बनाने में करीब 10 से 15 दिन लग जाते हैं. जबकि बड़ी और बारीक पेंटिंग को तैयार करने में 15 से 20 दिन तक का समय लग सकता है. उनकी सबसे महंगी पेंटिंग की कीमत लगभग 15,000 रुपये है. वहीं छोटी पेंटिंग्स 350 रुपये से शुरू होती हैं और काम की बारीकी के अनुसार उनकी कीमत बढ़ती जाती है.

गर्मी में कम, सर्दियों में बढ़ती है बिक्री
अंबिका देवी बताती हैं कि इस कला में आमदनी तय नहीं होती. गर्मियों में बिक्री काफी कम रहती है, जबकि सर्दियों और प्रदर्शनी के मौसम में काम अच्छा चलता है. कभी 10 हजार तो कभी 20 हजार रुपये तक की कमाई हो जाती है, लेकिन यह पूरी तरह बाजार और मांग पर निर्भर करता है.

कला नहीं, जीवन है मधुबनी पेंटिंग
74 साल की उम्र में भी अंबिका देवी हर दिन पेंटिंग बनाती हैं. उनका कहना है कि उन्हें यह काम दिल से पसंद है और जब तक हाथ साथ देंगे, तब तक वह इस कला को जीवित रखने का प्रयास करती रहेंगी.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें

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