CWG 2026: हॉकी-रेसलिंग बाहर, कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को नीरज चोपड़ा, मीराबाई और किन-किन से उम्मीद?

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Commonwealth Games 2026: आज से स्कॉटलैंड के ग्लासगो में राष्ट्रमंडल खेल यानी कॉमनवेल्थ गेम्स की शुरुआत हो रही है. भारत के सामने बर्मिंघम की सफलता दोहराना मुश्किल होगा क्योंकि हॉकी, कुश्ती और शूटिंग जैसे गेम्स के बाहर होने से हमारी ताकत आधी हो जाएगी. अब सारा दारोमदार बॉक्सर्स, नीरज चोपड़ा और मीराबाई चानू जैसे एथलीट्स पर होगा.

कॉमनवेल्थ गेम्स इंडिया

ग्लास्गो में आज से पिछले तीन दशक का सबसे छोटा कॉमनवेल्थ गेम्स होने जा रहा है. बजट में कटौती के चलते इस बार सिर्फ 10 खेलों की ही स्पर्धायें होंगी. 74 देशों के करीब 3000 खिलाड़ी जोर आजमाइश करेंगे. ओवो हाइड्रो पर बृहस्पतिवार को उद्घाटन समारोह के जरिये इन खेलों की औपचारिक शुरूआत होगी.

खेलों में कटौती तो क्यों भारत को नुकसान?
पिछले दो दशक से राष्ट्रमंडल खेलों में शीर्ष पांच में रहने का सिलसिला कायम रखना इस बार स्पर्धाओं में कटौती के कारण मुश्किल हो सकता है. भारत मैनचेस्टर में 2002 राष्ट्रमंडल खेलों के बाद से हर बार शीर्ष पांच में रहा है. इस बार हॉकी, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और निशानेबाजी के नहीं होने से यह कर पाना मुश्किल लग रहा है. बर्मिघम में इन्हीं खेलों में भारत के 61 में से लगभग आधे पदक आए थे. ऐसे में अब एथलेटिक्स, मुक्केबाजी और भारोत्तोलन पर जिम्मेदार आन पड़ी है.

विक्टोरिया ने किया मना तो ग्लास्गो को मेजबानी
ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया प्रांत को इन खेलों की मेजबानी मिली थी, लेकिन बढ़ती लागत के कारण उसने हाथ खींच लिया. राष्ट्रमंडल खेलों का भविष्य ही खतरे में पड़ते देख ग्लास्गो ने मेजबानी के लिए हामी भरी. पहले भी 2014 में मेजबान रह चुके स्कॉटलैंड के इस शहर ने करीब 160 मिलियन पाउंड के बजट में इन खेलों का आयोजन किया है, जो बर्मिंघम में 2022 में हुए राष्ट्रमंडल खेलों से 60 प्रतिशत कम है.

एथलेटिक्स से भारत की बड़ी उम्मीदें
भारत ने एथलेटिक्स में 32 सदस्यीय दल उतारा है जो 22 पदक स्पर्धाओं में भाग लेगा, इसकी अगुवाई दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा करेंगे. वह इस बार पदक के प्रबल दावेदार के रूप में नहीं बल्कि चैलेंजर के रूप में उतरेंगे. भारत को ऊंची कूद में सर्वेश कुशारे, लंबी कूद में मुरली श्रीशंकर, त्रिकूद में प्रवीण चित्रावेल और महिला तथा पुरूष चार गुणा 400 मीटर रिले टीमों से भी पदक की उम्मीद है. भारत ने बर्मिंघम में एथलेटिक्स में आठ पदक जीते थे.

भारत को वेटलिफ्टिंग से बड़ी उम्मीदें
भारोत्तोलन में नजरें ओलंपिक रजत पदक विजेता मीराबाई चानू पर लगी होंगी. मणिपुर की 31 वर्ष की चानू पिछले दो राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुकी है. भारोत्तोलन में भारत के 11 खिलाड़ी ही भाग लेंगे क्योंकि राष्ट्रीय शिविर में कई खिलाड़ी डोप टेस्ट में नाकाम हुए हैं. जिससे भारत की पदक की उम्मीदें कम हो गई हैं.

बॉक्सर्स सिर्फ मुक्के नहीं मेडल भी बरसाएंगे
मुक्केबाजी में टोक्यो ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन (75 किलो) राष्ट्रमंडल खेलों में पहला पदक जीतना चाहेंगी. वहीं 57 किलो में विश्व चैम्पियन जैसमीन लंबोरिया बर्मिंघम में जीते कांसे को स्वर्ण में बदलने को उत्सुक होंगी. एशियाई चैंपियन प्रीति पवार (54 किलो), साक्षी चौधरी (51 किलो) और अरूंधति चौधरी (70 किलो) भी दावेदारों में हैं. पुरूष वर्ग में नरेंदर बेरवाल (प्लस 90 किलो) और विश्व कप पदक विजेता सचिन सिवाच (60 किलो) से उम्मीदें हैं.

जूडो और लॉन बॉल से भी उम्मीद
लॉन बॉल में भारत ने बर्मिंघम में महिला वर्ग में स्वर्ण और पुरूष वर्ग में रजत पदक जीते थे और इस बार भी उसे दोहराना चाहेंगे. जूडो में पिछले खेलों में तीन पदक मिले थे, जिसे बेहतर करने का लक्ष्य होगा. पैरा एथलीटों से भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है. इस बार छह खेलों में पैरा स्पर्धाएं भी साथ में हो रही है.

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Anshul TalmaleDeputy News Editor

अंशुल तलमले फरवरी 2025 से नेटवर्क18 ग्रुप में डिप्टी न्यूज एडिटर की जर्सी पहनकर स्पोर्ट्स डेस्क की कप्तानी कर रहे हैं. यहां स्पोर्ट्स कंटेंट प्लानिंग, एडिटोरियल डायरेक्शन एंड स्ट्रेटजी मेकिंग का रोल संभाल रहे अ…

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