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पुरानी दिल्ली में ‘हजरत शाह वलीउल्लाह’ नाम की ऐतिहासिक लाइब्रेरी है. यहां 130 साल पुरानी कुरान और 100 साल पुरानी गीता का दुर्लभ संग्रह सुरक्षित है. छोटे कमरे में बसी इस लाइब्रेरी में 25,000 से ज्यादा किताबें मौजूद हैं. यहां पढ़ना सभी के लिए बिल्कुल मुफ़्त है.
नई दिल्ली: पुरानी दिल्ली की संकरी गलियों में इतिहास को समेटे एक बेहद खास पुस्तकालय है. इसका नाम हजरत शाह वलीउल्लाह पब्लिक लाइब्रेरी है. यह चावड़ी बाजार के पास जामा मस्जिद से सटे चूड़ीवालान (पहाड़ी इमली) इलाके में स्थित है. यह लाइब्रेरी उर्दू, अरबी और फ़ारसी साहित्य के विशाल संग्रह और दुर्लभ पांडुलिपियों के लिए देशभर में मशहूर है. विदेशी पर्यटक और शोधकर्ता भी यहां खिंचे चले आते हैं.
एक छोटे कमरे में 25 हजार से ज्यादा किताबें
यह लाइब्रेरी भले ही एक छोटे से कमरे में चलती है, लेकिन यहां ज्ञान का बड़ा भंडार है. यहां 25,000 से अधिक किताबें सुरक्षित रखी गई हैं. इनमें उर्दू, अरबी, फ़ारसी, हिंदी और अंग्रेजी भाषा की दुर्लभ किताबें शामिल हैं. यहां पढ़ना सभी के लिए एकदम मुफ़्त है. पाठक यहां सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक आकर अध्ययन कर सकते हैं.
साझा संस्कृति और सैकड़ों साल पुरानी धरोहर
यहां बहादुर शाह ज़फ़र, मिर्ज़ा ग़ालिब, ज़ौक, मोमिन और सर सैयद अहमद ख़ान जैसे दिग्गजों की दुर्लभ रचनाएं मौजूद हैं. इसके अलावा भारत की साझी विरासत की मिसाल पेश करते हुए रामायण और भगवद्गीता के फ़ारसी अनुवाद भी यहां रखे गए हैं.
यहां मौजूद कुछ दुर्लभ ऐतिहासिक खजाने:
- 700 साल पुरानी किताब: ईरानी लेखक अल्लामा अजीमुद्दीन की किताब ‘बदयूमिजान’ यहां मौजूद है.
- 130 साल पुरानी कुरान: यहां हाथ से लिखी गई 130 वर्ष पुरानी कुरान सुरक्षित है.
- 100 साल पुरानी गीता: यहां उर्दू और संस्कृत के मिश्रण वाली 100 साल पुरानी गीता उपलब्ध है.
- 150 साल पुरानी डिक्शनरी: बेगम भोपाली की 150 साल पुरानी डिक्शनरी में 6000 शब्दों के उर्दू, अरबी, संस्कृत, तुर्की, अंग्रेजी और पर्शियन भाषा में उच्चारण मिलते हैं.
- दीवाने ज़फ़र: दिल्ली सल्तनत के अंतिम बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र की रचना ‘दीवाने ज़फ़र’ भी यहां संरक्षित है.
दंगों के दौर से हुई थी शुरुआत
इस पुस्तकालय की नींव 1987 के सांप्रदायिक दंगों के दौरान पड़ी थी. उस समय कुछ स्थानीय युवाओं ने समझा कि शिक्षा ही समाज को जोड़ने का सबसे अच्छा जरिया है. बाद में ‘दिल्ली यूथ वेलफेयर एसोसिएशन’ ने इसका विस्तार किया और 1994 में इसे औपचारिक रूप दिया.
इस लाइब्रेरी का नाम 18वीं सदी के महान विद्वान और समाज सुधारक हजरत शाह वलीउल्लाह देहलवी के नाम पर रखा गया है. आज यह जगह इतिहास, मुगलकाल और सूफी साहित्य पर रिसर्च करने वाले छात्रों के लिए बेहद मददगार केंद्र बन चुकी है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
