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RAF Pellet Gun Controversy : दिल्ली में जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन और बल प्रयोग के आरोपों ने बवाल खड़ा कर दिया है. केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने अपनी दंगारोधी इकाई RAF के खिलाफ जांच शुरू की है. इसके साथ ही सहायक कमांडेंट सोनिया सहरावत की विवादित सोशल मीडिया पोस्ट पर भी जांच की जा रही है.
पैलेट गन का इस्तेमाल कब करना चाहिए?
RAF Pellet Gun Controversy : दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के संसद मार्च के दौरान हुए प्रदर्शन के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) पर पैलेट गन इस्तेमाल करने के संगीन आरोप लगे हैं. लेडी हार्डिंग और सफदरजंग अस्पताल में भर्ती घायल छात्रों की मेडिकल रिपोर्ट से पैलेट गन यानी छर्रों के घाव मिलने के दावे सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी एक छात्र को मीडिया के सामने लाकर इस मामले को और तूल दे दिया है. इस गंभीर मामले पर सीआरपीएफ ने अपनी दंगारोधी इकाई रैपिड एक्शन फोर्स के आईजी को जांच के आदेश दिए हैं. जांच में न सिर्फ बल प्रयोग की निष्पक्षता जांची जाएगी, बल्कि विवादों में आई सहायक कमांडेंट सोनिया सहरावत के सोशल मीडिया हैंडल की भी जांच हो रही है.
पैलेट गन क्या है?
पैलेट गन एक विशेष प्रकार का नॉन-लीथल यानी गैर-घातक भीड़ नियंत्रण हथियार है, जिसका इस्तेमाल सुरक्षा बल अनियंत्रित हिंसक भीड़ को रोकने के लिए करते हैं. यह शॉटगन की तरह काम करती है. इसके एक कारतूस से लेड (सीसे) या रबर के सैकड़ों छोटे-छोटे गोल छर्रे (Pellets) तेजी से बाहर निकलते हैं और हवा में फैल जाते हैं. इसका मुख्य उद्देश्य किसी की जान लेना नहीं, बल्कि छर्रों के दर्द से प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेलना होता है. लेकिन यदि इसे पास से या शरीर के ऊपरी हिस्सों विशेषकर चेहरे और आंखों पर दागा जाए तो यह त्वचा को चीर देती है और इंसान हमेशा के लिए अंधा हो सकता है या उसकी जान भी जा सकती है.
RAF ने दिल्ली में पैलेट गन, ARG, PAG और इलेक्ट्रिक शॉक हथियारों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी. (फोटो AP)
कब चलाना चाहिए और कब नहीं?
मानवाधिकारों और गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस के अनुसार पैलेट गन के उपयोग को लेकर कड़े नियम तय हैं. जब भीड़ अत्यधिक हिंसक हो जाए, पथराव, आगजनी करे और वॉटर कैनन, आंसू गैस या लाठीचार्ज जैसे प्राथमिक उपाय विफल हो जाएं, तो इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. पैलेट गन हमेशा कमर के नीचे पैरों पर निशाना साधकर ही चलाई जानी चाहिए ताकि गंभीर अंग-भंग न हो.
कब नहीं चलाना चाहिए?
शांतिपूर्ण या निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर इसका उपयोग सख्त मना है. चेहरे, छाती या आंख का सीधा निशाना बनाकर इसे दागना गैर-कानूनी है. आरएएफ पर पैलेट गन चलाने के आरोप और जांच हो रही है. दिल्ली पुलिस ने हालांकि पैलेट गन के इस्तेमाल से पूरी तरह इनकार किया था, लेकिन प्रदर्शन में तैनात RAF जो CRPF की विशेष शाखा है के शस्त्रागार में पैलेट गन शामिल होती हैं. अस्पताल में भर्ती घायल छात्रों जैसे 19 वर्षीय साहिल, जिनकी आंख में चोट लगी है के दावों के बाद सीआरपीएफ ने जांच शुरू कर दी है. आईजी स्तर के अधिकारी उन परिस्थितियों का सत्यापन कर रहे हैं कि क्या जवानों ने आत्मरक्षा में कदम उठाया था या फिर बल प्रयोग सीमा से अधिक था.
जंतर-मंतर हिंसा के दौरान 118 पुलिसकर्मी घायल हुए. (फोटो AP)
सहायक कमांडेंट सोनिया सहरावत की इंस्टा पोस्ट पर क्यों फंसा पेंच?
प्रदर्शन के दौरान सुर्खियों में आई आरएएफ की सहायक कमांडेंट सोनिया सहरावत की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं. एक तरफ जहां उन्होंने मीडिया में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जवानों ने किसी पर अत्याचार नहीं किया और वे खुद पथराव में घायल हुईं, वहीं दूसरी तरफ उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर की गई एक कथित स्टोरी ने विवाद तूल पकड़ लिया. प्रदर्शनकारियों पर कटाक्ष करती उस स्टोरी पर विपक्ष और छात्र संगठनों ने तीखी आपत्ति जताई. वर्दीधारी अधिकारियों के लिए सोशल मीडिया पर राजनीतिक या विवादास्पद टिप्पणी करने पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान है.
आरएएफ की इस जांच रिपोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं के बाद राजधानी में सुरक्षा बलों के भीड़ नियंत्रण तरीकों पर गंभीर बहस छिड़ गई है. क्या दिल्ली में वाकई पैलेट गन का गैर-जरूरी इस्तेमाल हुआ? इसका सच जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा.
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I am an alumnus of Bharatiya Vidya Bhavan, Delhi with a career in journalism that spans across several prestigious newsrooms. Over the years, I have honed my craft at Sahara Samay, Tehelka, P7 and Live India, a…
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