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Delhi Jantar Mantar Protest: जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस में हुए हिंसक प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने किस तरह हालात संभाले, इसकी अंदरूनी जानकारी सामने आई है. News18 को मिले शीर्ष पुलिस सूत्रों के अनुसार 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें छह वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं. एसीपी जय प्रकाश के सिर में फ्रैक्चर हो गया, जबकि एसीपी विवेक भगत ने घायल सिपाही को बचाने के लिए खुद पथराव झेला. पुलिस ने बड़े स्तर पर लाठीचार्ज से बचते हुए सीमित बल का इस्तेमाल किया ताकि भगदड़ और बड़े नुकसान को रोका जा सके.
जंतर-मंतर हिंसा के दौरान 118 पुलिसकर्मी घायल हुए. (फोटो AP)
Jantar Mantar Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस में हुए हालिया प्रदर्शन की तस्वीरें पूरे देश ने देखीं. कहीं बैरिकेड टूटे, कहीं पथराव हुआ और कहीं आंसू गैस के गोले छोड़े गए. लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक दूसरी कहानी भी सामने आई है. यह कहानी उन पुलिसकर्मियों की है, जो लगातार पथराव झेलते रहे, लेकिन भीड़ पर बड़े स्तर का लाठीचार्ज करने से बचते रहे. दिल्ली पुलिस के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, उस दिन सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ प्रदर्शनकारियों को रोकना नहीं थी, बल्कि संसद मार्ग, संसद भवन की ओर जाने वाले रास्तों, कनॉट प्लेस और आसपास के संवेदनशील इलाकों को किसी बड़े हादसे से बचाना भी था. अगर भीड़ बेकाबू हो जाती या भगदड़ मचती, तो हालात कहीं ज्यादा भयावह हो सकते थे.
सूत्रों का कहना है कि पुलिस के सामने दोहरी चुनौती थी. एक तरफ हजारों लोगों की भीड़ थी और दूसरी तरफ देश की सबसे संवेदनशील सरकारी इमारतों और व्यावसायिक इलाकों की सुरक्षा. ऐसे माहौल में पुलिस ने आक्रामक कार्रवाई की बजाय संयम की रणनीति अपनाई. इसी दौरान कई पुलिस अधिकारी और जवान गंभीर रूप से घायल हुए. सबसे ज्यादा चर्चा एसीपी जय प्रकाश और एसीपी विवेक भगत की बहादुरी की हो रही है. एक अधिकारी के सिर पर बड़ा पत्थर लगा, जबकि दूसरे अधिकारी ने घायल सिपाही को बचाने के लिए खुद पथराव झेला. News18 को मिले शीर्ष पुलिस सूत्रों के अनुसार, यही संयम और त्वरित कार्रवाई सेंट्रल दिल्ली को बड़े नुकसान से बचाने में अहम साबित हुई.
हालात तब बिगड़ने लगे जब कुछ समूह तय प्रदर्शन स्थल से अलग होकर बैरिकेड तोड़ने की कोशिश करने लगे. (PTI)
News18 को मिले शीर्ष सूत्रों के अनुसार लगातार हमलों के बावजूद दिल्ली पुलिस ने भीड़ पर बड़े स्तर का लाठीचार्ज नहीं किया. पुलिस को आशंका थी कि घनी भीड़ में आक्रामक कार्रवाई करने से भगदड़ मच सकती है और बड़ी संख्या में लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है. इसलिए पुलिस ने मानव श्रृंखला बनाकर बैरिकेड संभाले रखे और जरूरत पड़ने पर सीमित स्तर पर केवल आंसू गैस जैसे गैर-घातक उपायों का इस्तेमाल किया.
सूत्रों के मुताबिक जंतर-मंतर के पास बैरिकेड लाइन संभाल रहे एसीपी जय प्रकाश के सिर पर एक बड़ा पत्थर आकर लगा, जिससे उनके सिर की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया. वहीं एक अन्य घटना में एसीपी विवेक भगत ने उस समय जान की परवाह नहीं की जब एक सिपाही भीड़ के बीच घिर गया था.
