साढ़े 4 साल की उम्र से साधना और अब भव्य डेब्यू! जयंत चौधरी की बेटी इलेशा का कुचिपुड़ी में दिखा जलवा

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साढ़े 4 साल से साधना, अब भव्य डेब्यू! इलेशा ने कुचिपुड़ी में दिखाया जलवा

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Ilesha Singh Kuchipudi Debut: केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी की 15 साल की बेटी इलेशा सिंह ने नई दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में अपना पहला कुचिपुड़ी रंगप्रवेश पेश किया. इलेशा ने महज साढ़े चार साल की उम्र में कुचिपुड़ी की ट्रेनिंग शुरू की थी. पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. राजा रेड्डी, डॉ. राधा रेड्डी और श्रीमती कौशल्या रेड्डी के मार्गदर्शन में उन्होंने वर्षों तक इस शास्त्रीय नृत्य की साधना की. उनकी प्रस्तुति की शुरुआत वेंकटेश स्तोत्रम से हुई. इसके बाद दशावतारम, ‘सांसों की माला’ और शिव तरंगिणी पेश की गई. पीतल की थाली के किनारे पर नृत्य करना कार्यक्रम का खास आकर्षण रहा. जयंत चौधरी ने बेटी की मेहनत और अनुशासन पर गर्व जताया.

केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी की 15 साल की बेटी इलेशा सिंह ने कमानी ऑडिटोरियम में पहला कुचिपुड़ी रंगप्रवेश किया.

नई दिल्ली: साढ़े चार साल की उम्र में जब ज्यादातर बच्चे खेल-कूद और स्कूल की दुनिया में कदम रख रहे होते हैं, तब इलेशा सिंह ने नृत्य की कठिन साधना शुरू कर दी थी. उम्र सिर्फ 15 साल है, लेकिन कुचिपुड़ी के मंच पर उनकी तैयारी और आत्मविश्वास देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि उन्होंने इस सफर की शुरुआत इतनी कम उम्र में की थी. केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी की बेटी इलेशा ने नई दिल्ली के प्रतिष्ठित कमानी ऑडिटोरियम में अपना पहला कुचिपुड़ी रंगप्रवेश पेश किया. यह महज एक कार्यक्रम नहीं था. यह वर्षों की मेहनत, अनुशासन और लगातार अभ्यास के बाद मिली औपचारिक मंचीय शुरुआत थी. सोलो कुचिपुड़ी डांसर के तौर पर इलेशा ने मंच संभाला तो उनकी प्रस्तुति में शास्त्रीय नृत्य की परंपरा के साथ उनकी अपनी मेहनत भी साफ नजर आई.

इलेशा ने महज साढ़े चार साल की उम्र में कुचिपुड़ी सीखना शुरू किया था. इसके बाद सालों तक उन्होंने इस शास्त्रीय नृत्य की बारीकियों को सीखा और साधा. उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. राजा रेड्डी, डॉ. राधा रेड्डी और श्रीमती कौशल्या रेड्डी का मार्गदर्शन मिला. गुरुजनों की देखरेख में इलेशा ने नृत्य की तकनीक, भाव और अभिनय पक्ष पर मेहनत की. अब रंगप्रवेश के साथ उन्होंने कुचिपुड़ी की दुनिया में अपना पहला बड़ा कदम रखा है. इस मौके पर परिवार और करीबी लोगों के बीच भी उत्साह देखने को मिला.

इलेशा ने महज साढ़े चार साल की उम्र में कुचिपुड़ी सीखना शुरू किया था.

वेंकटेश स्तोत्रम से शुरुआत, दशावतारम में दिखी भक्ति की झलक

  • कमानी ऑडिटोरियम में इलेशा की रंगप्रवेश प्रस्तुति की शुरुआत वेंकटेश स्तोत्रम से हुई. इसके बाद दशावतारम पेश किया गया. इसमें भगवान विष्णु के दस अवतारों को नृत्य और भाव-भंगिमाओं के जरिए मंच पर जीवंत करने की कोशिश की गई. इलेशा की प्रस्तुति में शास्त्रीय नृत्य की परंपरा और भाव पक्ष का मेल दिखाई दिया.
  • इसके बाद ‘सांसों की माला’ की प्रस्तुति हुई. इसमें भक्ति, विरह और प्रेम जैसे भावों को नृत्य के जरिए पेश किया गया. एक सोलो कलाकार के तौर पर इलेशा के लिए यह प्रस्तुति खास थी. मंच पर उन्हें अपनी भाव-भंगिमाओं और नृत्य तकनीक के जरिए अलग-अलग भावों को दर्शाना था.

शिव तरंगिणी बना कार्यक्रम का खास आकर्षण

कार्यक्रम का एक खास आकर्षण ‘शिव तरंगिणी’ रहा. इसमें इलेशा ने भगवान शिव की महिमा को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया. इस प्रस्तुति में सिर्फ भाव ही नहीं, बल्कि तकनीकी दक्षता की भी परीक्षा थी. इलेशा ने पीतल की थाली के किनारे पर नृत्य करते हुए अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया. कुचिपुड़ी की इस कठिन प्रस्तुति में संतुलन और लय दोनों का खास महत्व होता है. रंगप्रवेश के दौरान यह हिस्सा दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहा.

अनुशासन और दृढ़ता ने यहां तक पहुंचाया: जयंत चौधरी

बेटी के इस खास मुकाम पर केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी भावुक और गर्व से भरे नजर आए. उन्होंने इलेशा की वर्षों की यात्रा को याद करते हुए कहा, ‘इलेशा की यात्रा साढ़े चार साल की उम्र से शुरू हुई. अनुशासन, दृढ़ता और शास्त्रीय नृत्य के प्रति प्रेम ने उसे इस मुकाम तक पहुंचाया है.’

इलेशा की रंगप्रवेश प्रस्तुति इसलिए भी खास है क्योंकि यह सिर्फ एक मंचीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि वर्षों की साधना का परिणाम है. साढ़े चार साल की उम्र में शुरू हुआ सफर अब 15 साल की उम्र में औपचारिक सोलो प्रस्तुति तक पहुंचा है.

कमानी ऑडिटोरियम में इलेशा की रंगप्रवेश प्रस्तुति की शुरुआत वेंकटेश स्तोत्रम से हुई.

कुचिपुड़ी की परंपरा में इलेशा की नई शुरुआत

रंगप्रवेश भारतीय शास्त्रीय नृत्य की परंपरा में एक अहम पड़ाव माना जाता है. इलेशा ने भी इस मंच के जरिए कुचिपुड़ी की दुनिया में अपना पहला बड़ा कदम रखा. इस सफर में उनके गुरुजनों का मार्गदर्शन और परिवार का सहयोग अहम रहा. कमानी ऑडिटोरियम का मंच इलेशा के लिए अब उनकी नृत्य यात्रा की एक यादगार शुरुआत बन गया है. वर्षों की साधना के बाद मिली यह प्रस्तुति आगे के सफर की नींव भी है. अब देखना होगा कि कुचिपुड़ी के मंच पर इलेशा अपनी इस शुरुआत को किस तरह आगे बढ़ाती हैं.

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Sumit KumarSenior Sub Editor

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…

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