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सड़क पर चलने वाली गाड़ियां अब सिर्फ दौड़ेंगी नहीं, बल्कि एक दूसरे से ‘बात’ भी करेंगी. केंद्र सरकार ऐसी तकनीक लाने की तैयारी कर रही है, जिससे गाड़ियां रियल टाइम में एक दूसरे को खतरे की जानकारी भेज सकेंगी. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हादसों की आशंका पहले ही पता चल जाएगी और ड्राइवर समय रहते सतर्क हो सकेगा. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने इसके लिए सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स में बदलाव का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है.
हाईवे पर लेन बदलते समय भी यह सिस्टम काफी मददगार होगा.
नई दिल्ली. कल्पना कीजिए कि आपके आगे चल रही कार अचानक ब्रेक लगा देती है, लेकिन कोहरे या मोड़ की वजह से आपको वह कार दिखाई नहीं देती. ऐसी स्थिति में अगर आपकी गाड़ी पहले ही आपको अलर्ट दे दे कि आगे खतरा है, तो बड़ा हादसा टल सकता है. केंद्र सरकार अब ऐसी ही तकनीक को भारत में लागू करने की तैयारी कर रही है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 में बदलाव के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है. इसके तहत व्हीकल टू व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रस्ताव है. यह सिस्टम सड़क पर चल रही गाड़ियों के बीच रियल टाइम में जानकारी साझा करेगा, जिससे ड्राइवरों को समय रहते खतरे की चेतावनी मिल सके.
इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा सड़क दुर्घटनाओं में कमी के रूप में देखने को मिल सकता है. अगर आगे चल रही गाड़ी अचानक ब्रेक लगाए, किसी मोड़ पर दूसरी गाड़ी आ रही हो या कोई वाहन ब्लाइंड स्पॉट में हो, तो सिस्टम पहले ही ड्राइवर को अलर्ट भेज देगा. घने कोहरे, तेज बारिश या रात के समय जब सामने साफ दिखाई नहीं देता, तब भी यह तकनीक आसपास मौजूद गाड़ियों की स्थिति और उनकी रफ्तार की जानकारी देती रहेगी. इससे ड्राइवर पहले से सतर्क हो जाएगा और दुर्घटना की संभावना कम होगी. हाईवे पर लेन बदलते समय भी यह सिस्टम काफी मददगार होगा. यदि किसी दूसरी गाड़ी के बहुत करीब आने का खतरा होगा, तो गाड़ी के अंदर तुरंत चेतावनी दिखाई देगी.
एम्बुलेंस को रास्ता देना होगा आसान
इस तकनीक का फायदा सिर्फ आम वाहन चालकों को ही नहीं मिलेगा. यदि पीछे से एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड या पुलिस की इमरजेंसी गाड़ी आ रही होगी, तो आसपास मौजूद दूसरी गाड़ियों को पहले ही अलर्ट मिल जाएगा. इससे चालक समय रहते वाहन साइड में कर सकेंगे और इमरजेंसी सेवाओं को बिना रुकावट रास्ता मिल सकेगा. इसके अलावा ट्रैफिक मैनेजमेंट भी पहले से बेहतर होगा क्योंकि गाड़ियों के बीच लगातार जानकारी का आदान प्रदान होता रहेगा.
कैसे काम करेगी यह तकनीक?
हर वाहन में एक ऑन बोर्ड यूनिट लगी होगी, जो सेलुलर व्हीकल टू एवरीथिंग यानी C-V2X तकनीक के जरिए आसपास मौजूद दूसरी गाड़ियों से संपर्क बनाए रखेगी. यह सिस्टम वाहन की रफ्तार, दिशा, ब्रेक लगाने जैसी जरूरी जानकारी कुछ ही मिलीसेकंड में दूसरी गाड़ियों तक पहुंचा देगा. यह तकनीक मौजूदा एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम यानी ADAS के साथ मिलकर काम करेगी, जिससे सुरक्षा और मजबूत होगी. इसके लिए दूरसंचार विभाग 5.875 GHz से 5.925 GHz फ्रीक्वेंसी बैंड को लाइसेंस मुक्त कर चुका है.
कब से लागू होंगे नए नियम?
सरकार ने ऑटो कंपनियों को नई तकनीक अपनाने के लिए समय भी दिया है. ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, 1 अक्टूबर 2027 से बनने वाले टू व्हीलर, थ्री व्हीलर, कार और कमर्शियल वाहनों में यदि V2V सिस्टम लगाया जाता है, तो उसे AIS 230 मानकों का पालन करना होगा. इसके बाद 1 अक्टूबर 2028 से बनने वाली L, M और N कैटेगरी की सभी नई गाड़ियों में V2V कम्युनिकेशन सिस्टम अनिवार्य करने का प्रस्ताव है. इसके लागू होने के बाद भारत भी उन देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जहां सड़क सुरक्षा के लिए गाड़ियों के बीच स्मार्ट कम्युनिकेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है.
