Organic Waste series 1: गीला और सूखा कचरा क्या होता है? कैसे जैविक कचरे से हो सकती है छप्पर फाड़ कमाई? एक्सपर्ट से समझें

Organic Waste series 1: अगर आप शहर में रहते हैं तो आजकल आपसे घर के कूड़े-कचरे को गीला और सूखा अलग-अलग रखने के लिए कहा जाता होगा. आप ऐसा करते भी होंगे, या कई बार दोनों को मिक्स करके गलती भी करते होंगे.लेकिन क्या आपको पता है कि गीला और सूखा कचरा असल में होता क्या है? और इसे अलग-अलग स्टोर करने के लिए क्यों कहा जाता है? इसके अलावा आपने सार्वजनिक जगहों पर भी नीले और हरे डस्टबिन देखे होंगे लेकिन क्या आपको पता है कि किसमें कौन सा कचरा डालना होता है? वहीं क्या इस कचरे से पैसा भी कमाया जा सकता है? अगर आपको ये सभी सवालों के जवाब नहीं पता हैं तो आप ये स्टोरी जरूर पढ़िए. इसमें आपको एक्सपर्ट कचरे की हर बारीकी को समझा रहे हैं.

दरअसल आज से News18hindi की जैविक कचरे पर 10 स्टोरीज की एक सीरीज कर रहा है. इसकी पहली कहानी में आप आज पढ़ सकते हैं कि गीले और सूखे कचरे में क्या अंतर होता है, क्या गीले कचरे का बिजनेस भी किया जा सकता है? इससे कितनी इनकम हो सकती है?’ सीईईडब्ल्यू की सीनियर प्रोग्राम लीड प्रियंका सिंह की इन सभी सवालों के जवाब नीचे दे रही हैं.

क्या होता है गीला और सूखा कचरा?

गीले कचरे की सीरीज पर व‍िस्‍तार से जानकारी दे रही हैं सीईईडब्‍ल्‍यू की प्र‍ियंका स‍िंह.

काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) की सीनियर प्रोग्राम लीड प्रियंका सिंह कहती हैं, ‘भारत में 1 अप्रैल 2026 से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट यानी ठोस कचरा प्रबंधन के नए नियम लागू किए गए हैं. इसके अनुसार, वैसे जैविक कचरे को गीला कचरा माना जाता है, जो आसानी से सड़ या गल जाता है. इसमें रसोई से निकलने वाला कचरा, बचा हुआ भोजन, सब्जी और फलों के छिलके, मांस और फूल जैसी जैविक चीजें शामिल होती हैं. वहीं, उस कचरे को सूखा कचरा कहते हैं, जो आसानी से नष्ट नहीं होता है और जिसकी रीसायक्लिंग (पुनर्चक्रण) की जा सकती है. इसमें प्लास्टिक, कागज, गत्ता, कांच, धातु, कपड़े और मलबा इत्यादि शामिल होते हैं.

कितना रोजगार पैदा करता है गीला कचरा?
भारत में रोजाना लगभग 17 लाख टन शहरी ठोस कचरा पैदा होता है. इसमें लगभग आधा गीला यानी जैविक कचरा होता है. काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) का अध्ययन बताता है कि शहरों से निकलने वाला यह गीला कचरा बिजनेस का एक प्रमुख अवसर बन सकता है, जिसका अभी तक खास इस्तेमाल नहीं हो पाया है. अगर भारत ग्रीन ट्रांजिशन (green transition) के व्यापक लक्ष्यों पर काम करता है, तो 2047 तक जैविक कचरा क्षेत्र में 61.5 अरब डॉलर का बाजार तैयार हो सकता है और इसमें कुल 30.2 अरब डॉलर का संचयी निवेश आ सकता है. वहीं सामान्य परिस्थिति के हिसाब से 2047 तक जैविक कचरा बाजार 10 अरब डॉलर तक पहुंचेगा. ये आंकड़े बताते हैं कि बेहतर नीतियों और जमीनी स्तर पर उचित प्रबंधन से गीले कचरे से कितना आर्थिक लाभ कमाया जा सकता है.

गीले-सूखे कचरे को अलग करने के लिए क्यों कहते हैं, एक साथ रखने में क्या दिक्कत है?

आजकल कचरे को लेकर काफी जागरुकता है और यही वजह है कि सोसायटी या फ्लैटों में रह रहे लोगों से घर के कचरे को सेग्रीगेट करने के लिए कहा जाता है, ताकि सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग इकठ्ठा किया जा सके और फिर उन पर काम हो सके? घर के कचरे को दो अलग-अलग जगह बांटना जरूरी है. गीले को अलग और सूखे को अलग क्योंकि गीला कचरा आय का बड़ा स्त्रोत है. हालांकि सूखे कचरे से भी इनकम होती है, लेकिन बायोडिग्रेडेबल वेस्ट यानि गीले कचरे को आसानी से डीकंपोज किया जा सकता है.

गीले और सूखे कचरे में क्‍या होता है अंतर, समझें.

गीले कचरे को कैसे रंग के डस्टबिन में डालते हैं?
सिर्फ घर ही नहीं पार्कों और सार्वजनिक जगहों पर भी आपने दो रंग के डस्टबिन देखे होंगे. नीले और हरे, लेकिन क्या आपको पता कि किस रंग के कचरे को किस रंग के डस्टबिन में डालते हैं, नहीं तो बताते हैं कि गीले कचरे को हरे रंग (Green) के डस्टबिन में स्टोर किया जाता है. बता दें कि खाने के बचे हुए टुकड़े, फल और सब्जी के छिलके, सड़ी हुई चीजें और पौधे के पत्ते आदि जैवि क या गीला कचरा कहलाते हैं.

सूखे कचरे को किस रंग के डस्टबिन में जमा करें?
सूखे कचरे को हमेशा नीले रंग (Blue) के डस्टबिन में रखा जाता है. ऐसे में आगे से जब भी आप बाहर जाएं तो इन रंगों और कूड़े के प्रकारों को न केवल याद रखें, बल्कि बच्चों को भी समझाएं. कागज और गत्ते, प्लास्टिक की बोतलें, कांच और धातु की चीजें सूखा कचरा कहलाती हैं.

गीले कचरे का क्या किया जाता है?

गीले कचरे को खासतौर पर रीसायकल किया जाता है और इससे मुख्य रूप से खाद (Compost) और बायोगैस (Biogas) बनाई जाती हैं. चूंकि यह कचरा प्राकृतिक रूप से सड़ सकता है (Biodegradable), इसलिए इसका सही इस्तेमाल पर्यावरण के लिए बहुत फायदेमंद होता है.

कितनी बड़ी है गीले कचरे की इकॉनोमी? कितना पैसा कमा सकते हैं?
गीले कचरे का बाजार लगातार बढ़ रहा है. आने वाले साल में यह आमदनी का अच्छा सोर्स हो सकता है. एक्सपर्ट की मानें तो 2047 तक जैविक कचरा क्षेत्र में 61.5 अरब डॉलर का बाजार तैयार हो सकता है और इसमें कुल 30.2 अरब डॉलर का संचयी निवेश आ सकता है.

जैविक कचरा…सीरीज की अगली कहानी में पढ़ें.. ‘ गीले कचरे से, कम्पोस्टिंग, बायोगैस और वेस्ट-टु-एनर्जी इनमें से कौन सा काम कितनी जल्दी शुरू होता है और तेजी से कमाई शुरू करता है? इन्हें शुरू करने में कितना खर्च या लागत आती है? कितनी जगह चाहिए? इनसे फायदा भी बताएं.’

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