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पेरिस ओलंपिक के बाद हार, चोट और आत्मविश्वास की कमी से जूझने वाली लवलीना बोरगोहेन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि चैंपियन कभी हार नहीं मानते. 28 साल की भारतीय मुक्केबाज ने करियर जारी रखने को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया. राष्ट्रमंडल खेलों में पहली बार पदक जीतने वाली लवलीना ने रजत पदक हासिल किया और अब उनका अगला लक्ष्य एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना है. वहीं भारतीय बॉक्सिंग टीम के ऐतिहासिक प्रदर्शन ने नई उम्मीद जगाई है.
लवलीना बोरगोहेन
नई दिल्ली: पिछले एक साल में चोट, आत्मविश्वास की कमी और मुश्किल दौर से गुजरने के बाद महिला बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने कॉमनवेल्थ गेम्स में वापसी की. अपना तीसरा कॉमनवेल्थ खेल रहे लवलीना का अगला टारगेट अब अगले महीने से शुरू होने वाले एशियन गेम्स है.
पेरिस ओलंपिक में पदक जीत चुकी मुक्केबाज लवलीना ने कहा कि पेरिस ओलंपिक के बाद भी अपने करियर को जारी रखना उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है. राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के रिकॉर्ड 10 मुक्केबाजी पदक जीतने के बाद खेल मंत्री मनसुख मांडविया से मुलाकात के दौरान 28 वर्षीय लवलीना ने पेरिस ओलंपिक के बाद की चुनौतियों को याद किया. वह 2024 ओलंपिक में क्वार्टर फाइनल में हारकर बाहर हो गई थीं. लवलीना ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा:
सबसे पहले तो मेरे लिए इतने लंबे समय तक खेल जारी रखना ही बड़ी बात थी. पेरिस ओलंपिक के बाद कई उतार-चढ़ाव आए. कई बार यह सवाल भी उठा कि मैं आगे खेलना चाहती हूं या नहीं, लेकिन मैंने वापसी की और खेल जारी रखा. यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है. मैंने लगभग सभी खेलों और प्रतियोगिताओं में पदक जीते हैं, लेकिन अगर स्वर्ण पदक जीतती तो और अच्छा होता. मैं अपनी टीम के लिए बहुत खुश हूं, जिसने शानदार प्रदर्शन किया. सात स्वर्ण पदक हम सभी के लिए बड़ी उपलब्धि है. अब मैं एशियाई खेलों के लिए भी तैयार हूं. मुझे बेहतर प्रदर्शन करके स्वर्ण पदक जीतना है.
भारतीय टीम के विदेशी कोच सैंटियागो नीवा ने राष्ट्रमंडल खेलों में टीम के प्रदर्शन को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा कि इस सफलता से आगामी प्रतियोगिताओं के लिए टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है. नीवा ने महिला 51 किग्रा वर्ग में साक्षी की स्वर्ण पदक जीत को भारतीय मुक्केबाजी की मजबूत प्रतिभा का उदाहरण बताया.
उन्होंने कहा कि इस वर्ग में जगह बनाना ही कठिन था क्योंकि चयन मुकाबलों में तीन विश्व चैंपियन और दो युवा विश्व चैंपियन मौजूद थीं. उन्होंने कहा:
साक्षी ने फाइनल में इंग्लैंड की मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ जिस तरह का प्रदर्शन किया और अपने अनुभव का इस्तेमाल किया, वह भविष्य के लिए काफी सकारात्मक संकेत है.
नीवा ने कहा कि अब टीम का ध्यान अब एशियाई खेलों और ओलंपिक क्वालीफिकेशन की तैयारियों पर होगा. विश्व चैंपियन जैस्मीन लंबोरिया ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों में खिताब जीतने के बाद उनका मुख्य लक्ष्य लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक है और वह लगातार सुधार करती रहेंगी. राष्ट्रमंडल खेलों में विश्व चैंपियन के रूप में उतरने के दबाव पर जैस्मीन ने कहा कि इस पहचान ने उन्हें बीमारी से उबरकर बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा दी.
