दादी-नानी की पारंपरिक रेसिपी का स्वाद एक बार चखेंगे तो बाजार की मिठाइयां भूल जाएंगे, सिर्फ 2 चीजों से बनती थी ये देसी मिठाई

Grandma Sweet Recipe: भारत की रसोई में ऐसी कई पारंपरिक रेसिपियां हैं जो समय के साथ धीरे-धीरे लोगों की यादों से ओझल होती जा रही हैं. कभी हर घर में त्योहार, मेहमानों के आने या बच्चों की फरमाइश पर बनने वाली ये देसी मिठाइयां आज बाजार की रंग-बिरंगी मिठाइयों के बीच कहीं खो गई हैं. लेकिन जिन लोगों ने बचपन में दादी-नानी के हाथों की बनी मिठाई का स्वाद चखा है, वे आज भी उसकी खुशबू और स्वाद को नहीं भूल पाए हैं.

ऐसी ही एक बेहद आसान और स्वादिष्ट पारंपरिक मिठाई है, जो सिर्फ दो मुख्य चीजों से तैयार होती थी. खास बात यह है कि इसमें न ज्यादा सामग्री लगती है और न ही घंटों की मेहनत. अगर आप एक बार इसे घर पर बना लेंगे तो यकीन मानिए, बाजार की कई मिठाइयां भी फीकी लगने लगेंगी.

सिर्फ दो चीजों से तैयार होती थी यह पारंपरिक मिठाई

पुराने समय में जब हर चीज घर पर बनाई जाती थी, तब गुड़ और गेहूं के आटे से तैयार होने वाली गुलगुली या गुलगुले लगभग हर घर की पसंदीदा मिठाई हुआ करते थे. गांवों में इसे शाम की चाय, त्योहारों और खास मौकों पर जरूर बनाया जाता था. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसमें महंगी सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती थी. गुड़ की प्राकृतिक मिठास और आटे का देसी स्वाद मिलकर ऐसा जायका तैयार करते थे जिसे बच्चे से लेकर बड़े तक सभी पसंद करते थे. यही वजह थी कि यह रेसिपी पीढ़ी-दर-पीढ़ी घरों में बनती चली आई.

कैसे बनती है यह देसी मिठाई?

सामग्री

1. 1 कप गेहूं का आटा
2. ¾ कप गुड़
3. थोड़ा सा सौंफ (वैकल्पिक)
4. इलायची पाउडर
5. तलने के लिए घी या तेल

सबसे पहले गुड़ को हल्के गुनगुने पानी में घोल लें. जब गुड़ पूरी तरह घुल जाए तो उसमें धीरे-धीरे आटा मिलाकर गाढ़ा घोल तैयार करें. चाहें तो स्वाद बढ़ाने के लिए सौंफ और इलायची भी मिला सकते हैं. अब इस घोल को 10 से 15 मिनट के लिए ढककर रख दें. इसके बाद कढ़ाही में घी या तेल गर्म करें और छोटे-छोटे हिस्सों में घोल डालकर सुनहरा होने तक तल लें. बाहर से हल्के कुरकुरे और अंदर से नरम गुलगुले तैयार हो जाएंगे.

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दादी-नानी की रसोई का सबसे बड़ा राज

कम चीजें, ज्यादा स्वाद

आज की तरह पहले रसोई में दर्जनों पैकेट और तैयार मिक्स नहीं होते थे. घर की महिलाएं उपलब्ध सामग्री से ही स्वादिष्ट व्यंजन बना लेती थीं. यही वजह है कि पारंपरिक रेसिपियों में सादगी होने के बावजूद स्वाद भरपूर होता था. गुड़ और आटे का यह मेल सिर्फ स्वाद ही नहीं देता, बल्कि घर में बनने की वजह से इसमें अपनापन भी महसूस होता है. शायद यही कारण है कि आज भी गांवों में कई लोग त्योहारों पर इस मिठाई को जरूर बनाते हैं.

बाजार की मिठाइयों से क्यों है अलग?

बाजार में मिलने वाली मिठाइयों में अक्सर ज्यादा चीनी, रंग और कई तरह की सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. वहीं यह पारंपरिक मिठाई बेहद साधारण सामग्री से तैयार होती है. इसकी ताजगी, देसी खुशबू और घर जैसा स्वाद इसे अलग पहचान देते हैं. अगर मेहमान अचानक घर आ जाएं या बच्चों के लिए कुछ मीठा बनाने का मन हो, तो यह रेसिपी कुछ ही मिनटों में तैयार की जा सकती है. यही इसकी सबसे बड़ी खासियत भी है.

नई पीढ़ी फिर से अपना रही है पुरानी रेसिपियां

सोशल मीडिया पर बढ़ रहा देसी स्वाद का ट्रेंड

पिछले कुछ समय में लोग फिर से पारंपरिक भारतीय व्यंजनों की ओर लौट रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी दादी-नानी की रेसिपियां तेजी से वायरल हो रही हैं. लोग कम सामग्री, आसान विधि और पुराने स्वाद वाली रेसिपियों को दोबारा अपने किचन में जगह दे रहे हैं. अगर आपने अभी तक गुड़ और आटे से बनने वाली इस देसी मिठाई का स्वाद नहीं चखा है, तो एक बार जरूर बनाकर देखें. हो सकता है यह आपके घर की नई पसंदीदा मिठाई बन जाए और बचपन की कई मीठी यादें भी ताजा कर दे.

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